महाराष्ट्र को पहली बार एक महिला उपमुख्यमंत्री मिलने जा रही है। सुनेत्रा पवार आज (31 जनवरी 2026) शाम को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगी। यह फैसला उनके पति और राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के विमान दुर्घटना में निधन के कुछ दिन बाद आया है। सुनेत्रा पवार राज्यसभा सांसद हैं और अब वे महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा कदम उठा रही हैं।
शपथ ग्रहण की पूरी जानकारी
शपथ ग्रहण का कार्यक्रम आज शाम करीब 5 बजे मुंबई के राजभवन में होगा। यह एक सादा समारोह होगा, जिसमें ज्यादा हलचल नहीं रहेगी। इससे पहले दोपहर 2 बजे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के विधायकों की बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में सुनेत्रा पवार को एनसीपी विधायक दल का नेता चुना जाएगा। उसके बाद ही शाम को शपथ का रास्ता साफ होगा। एनसीपी के कई बड़े नेता जैसे छगन भुजबल, प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे और धनंजय मुंडे ने इस पर सहमति जताई है।
राजनीतिक वजह
अजीत पवार के निधन से एनसीपी (अजित गुट) में नेतृत्व का सवाल खड़ा हो गया था। पार्टी में परिवार के किसी सदस्य को आगे लाने की बात चल रही थी, ताकि बारामती और पवार परिवार का प्रभाव बना रहे। एनसीपी के वरिष्ठ नेताओं ने सुनेत्रा पवार के नाम पर आम सहमति बनाई, क्योंकि वे लंबे समय से पार्टी और क्षेत्र के कामकाज में सक्रिय रहीं हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी एनसीपी के नेताओं ने मुलाकात की और उन्हें इस फैसले की जानकारी दी। फडणवीस ने कहा कि भाजपा और पूरी सरकार पवार परिवार के साथ है और मुश्किल वक्त में साथ खड़ी रहेगी।
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इसके अलावा एनसीपी के अजित गुट और शरद पवार गुट के विलय की बातें भी चल रही हैं। अजीत पवार के निधन से पहले दोनों गुट विलय पर सहमत हो चुके थे। हाल के स्थानीय निकाय चुनावों में दोनों ने एक ही चिह्न (घड़ी) पर साथ लड़ा था। लेकिन अभी विलय का अंतिम फैसला परिवार और एनडीए के रिश्तों को देखकर लिया जाएगा।
सुनेत्रा पवार कौन हैं?
सुनेत्रा पवार 63 साल की हैं और एक राजनीतिक परिवार से आती हैं। उनके पिता पद्मसिंह पाटिल महाराष्ट्र के पूर्व कैबिनेट मंत्री और लोकसभा सांसद रह चुके हैं। वे धाराशिव (उस्मानाबाद) की रहने वाली हैं। शादी के बाद बारामती में अजीत पवार के साथ मिलकर उन्होंने जमीनी स्तर पर काफी काम किया है। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने बारामती से सुप्रिया सुले के खिलाफ एनसीपी (अजित गुट) की ओर से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गईं। फिलहाल वे राज्यसभा सदस्य हैं। उपमुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें राज्यसभा की सदस्यता छोड़नी पड़ सकती है और बारामती विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ना होगा।

















