उत्तर प्रदेश

अलीगढ़ में 28 साल पुराने अवैध कब्रिस्तान पर एडीए का बुलडोजर एक्शन, 12 करोड़ की जमीन मुक्त

अलीगढ़ के रामघाट रोड पर 28 साल पुराने अवैध कब्रिस्तान को एडीए ने बुलडोजर से ध्वस्त कर 12 करोड़ रुपये की 2420 वर्ग मीटर जमीन मुक्त कराई। 1983 से अधिग्रहित जमीन पर कार्रवाई, अब एडीए का बोर्ड लगा।

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कुलदीप सिंह

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां प्रशासन ने रामघाट रोड पर अवैध तरीके से बने कब्रिस्तान को साफ कर दिया है। ये कार्रवाई अलीगढ़ विकास प्राधिकरण (एडीए) ने 28 साल पुराने अवैध कब्रिस्तान पर बुलडोजर पर कर दिया। इस जमीन की कीमत करीब 12 करोड़ रुपये बताई जा रही है। कुल 2420 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाली यह जमीन अब पूरी तरह एडीए के कब्जे में आ गई है। कार्रवाई बुधवार को हुई, जिसमें जिला प्रशासन और पुलिस की टीम भी साथ थी। अब वहाँ एडीए का बोर्ड लगा दिया गया है।

1983 से चल रहा है ये खेल

यह सब 1983 से शुरू होता है। एडीए ने उस साल स्वर्ण जयंती नगर नाम की आवासीय योजना के लिए रामघाट रोड पर गाटा नंबर 21 की 2420 वर्ग मीटर जमीन अधिग्रहित की थी। तारीख थी 24 जनवरी 1983। एडीए ने कब्जा तो ले लिया, लेकिन वहाँ कोई निर्माण कार्य नहीं किया। कुछ साल बाद कुछ लोगों ने इस खाली पड़ी जमीन पर कब्जा कर लिया और इसे कब्रिस्तान की तरह इस्तेमाल शुरू कर दिया। राजस्व विभाग और एडीए के रिकॉर्ड में यह जमीन हमेशा एडीए की ही दिखती रही, कभी कब्रिस्तान के रूप में दर्ज नहीं हुई।

कब्रिस्तान कब और कैसे बना

लगभग 1997 में एडीए को इस अवैध कब्जे की खबर मिली। उन्होंने मुकदमा भी दर्ज कराया, लेकिन कब्जा हट नहीं सका। मामला फाइलों में दबता चला गया। फिर 2013 में सपा सरकार के समय राज्य की कब्रिस्तान विकास योजना के तहत यहाँ बाउंड्री वॉल और गेट बनवा दिए गए। स्थानीय लोगों ने इसका इस्तेमाल कब्रिस्तान के रूप में जारी रखा। लेकिन रिकॉर्ड में यह कभी भी आधिकारिक कब्रिस्तान नहीं बना। 2017 में सरकार बदली तो मामला फिर से चर्चा में आया। 2018 में शासन स्तर से जांच के आदेश हुए, लेकिन प्रकरण उलझता रहा।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने लिया एक्शन

हाल ही में फिर शिकायतें आईं। मुख्यमंत्री कार्यालय ने संज्ञान लिया और मंडलायुक्त की अध्यक्षता में जांच के निर्देश दिए। तहसील और प्रशासनिक स्तर पर जांच हुई। अभिलेखों की जांच की गई, जीपीआर सर्वे भी कराया गया। सबूतों से साफ हुआ कि जमीन एडीए की है और कब्जा अवैध है। इसके बाद बुधवार को कार्रवाई हुई।

कार्रवाई कैसे हुई

सुबह करीब 10:30 बजे एडीए सचिव दीपाली भार्गव के नेतृत्व में टीम पहुंची। दो बुलडोजर लगाए गए। सबसे पहले मुख्य दीवार और गेट गिराए गए, फिर चारों तरफ से अतिक्रमण हटाया गया। शाम साढ़े छह बजे तक काम चला, कुल आठ घंटे लगे। कई थानों की पुलिस फोर्स मौके पर थी। जमीन की घेराबंदी कर दी गई और एडीए का बोर्ड लगा दिया गया।

सपा कर रही विरोध

कार्रवाई के दौरान कुछ स्थानीय लोग विरोध जता रहे थे, लेकिन टीम ने समझा-बुझाकर उन्हें शांत कर दिया। सपा से जुड़े कुछ पदाधिकारियों ने कलक्ट्रेट जाकर विरोध दर्ज कराया। लेकिन मौके पर कोई बड़ा विवाद नहीं हुआ, हालात शांत रहे। एडीए उपाध्यक्ष कुलदीप मीणा ने कहा कि यह जमीन एडीए की है, जो कई सालों से अवैध कब्जे में थी। जांच और सर्वे के बाद इसे मुक्त कराया गया है।

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