Jaya Ekadashi 2026: जया एकादशी कब है? जानिए व्रत का पारण समय, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
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Jaya Ekadashi 2026: जया एकादशी कब है? जानिए व्रत का पारण समय, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जया एकादशी का व्रत बहुत ही शुभ माना जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित होता है। कहा जाता है कि इस दिन श्रद्धा और नियम से पूजा करने से जीवन के दुख, तनाव और परेशानियां दूर होती हैं।

Written byMahak SinghMahak Singh
Jan 29, 2026, 07:20 am IST
inधर्म-संस्कृति
जया एकादशी शुभ मुहूर्त

जया एकादशी शुभ मुहूर्त

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जया एकादशी का व्रत बहुत ही शुभ माना जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित होता है। कहा जाता है कि इस दिन श्रद्धा और नियम से पूजा करने से जीवन के दुख, तनाव और परेशानियां दूर होती हैं। साथ ही घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। जया एकादशी का व्रत करने से मन को शांति मिलती है और व्यक्ति का आत्मविश्वास भी बढ़ता है। जया एकादशी का व्रत जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी इसका सही समय पर पारण करना भी होता है। यदि व्रत का पारण विधि अनुसार न किया जाए, तो व्रत का पूरा फल नहीं मिलता। इसलिए द्वादशी तिथि पर सही समय में व्रत खोलना आवश्यक माना गया है।

जया एकादशी 2026 की तिथि- वैदिक पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में माघ माह के शुक्ल पक्ष की जया एकादशी का व्रत 29 जनवरी 2026 को रखा जाएगा। वहीं इसका पारण 30 जनवरी 2026 को किया जाएगा। एकादशी तिथि की शुरुआत 28 जनवरी को शाम 4 बजकर 35 मिनट पर होगी और इसका समापन 29 जनवरी को दोपहर 1 बजकर 55 मिनट पर होगा।

पूजा के शुभ मुहूर्त- जया एकादशी के दिन पूजा-पाठ के लिए कुछ विशेष शुभ समय बताए गए हैं। इन मुहूर्तों में पूजा करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:25 से 6:18 तक। अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:13 से 12:56 तक। विजय मुहूर्त: दोपहर 2:22 से 3:05 तक। गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:55 से 6:22 तक। इन शुभ समयों में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। जया एकादशी का व्रत हमेशा द्वादशी तिथि पर ही खोला जाता है। वर्ष 2026 में पारण का शुभ समय 30 जनवरी को सुबह 7:10 से 9:20 बजे तक रहेगा। इस समय के अंदर किसी भी समय व्रत का पारण किया जा सकता है।

जया एकादशी व्रत पूजा विधि- व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें। घर के मंदिर में देसी घी का दीपक जलाएं। फिर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा विधि-विधान से करें। पूजा में भगवान को फल, फूल, तुलसी दल और मिठाई अर्पित करें। विष्णु मंत्रों का जाप करें और विष्णु चालीसा का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। पूजा के बाद भगवान को सात्विक भोग लगाएं। इस दिन मन में किसी प्रकार का क्रोध, ईर्ष्या या गलत विचार नहीं आने दें। व्रत के दिन संयम और शांति बनाए रखना बहुत जरूरी होता है।

व्रत में भोजन नियम- जया एकादशी के दिन केवल सात्विक भोजन ही करना चाहिए। कई भक्त निर्जल व्रत रखते हैं, जबकि कुछ फलाहार करते हैं। इस दिन तामसिक भोजन जैसे मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। द्वादशी के दिन व्रत खोलते समय सबसे पहले भगवान विष्णु का स्मरण करें। चरणामृत लें और तुलसी के पत्ते के साथ व्रत का पारण करना शुभ माना जाता है। इसके बाद हल्का सात्विक भोजन ग्रहण करें। जया एकादशी के बाद द्वादशी तिथि पर दान करना बहुत पुण्यदायी माना गया है। गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, धन या दैनिक उपयोग की चीजें दान करनी चाहिए। ऐसा करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है।

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Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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