पहले जब भी परिवार के साथ यात्रा करनी होती थी, तो सबसे बड़ी परेशानी पहचान से जुड़ी होती थी। हर सदस्य का आधार कार्ड, उसकी फोटोकॉपी या प्रिंटआउट साथ रखना जरूरी हो जाता था। कई बार ऐसा भी होता था कि किसी का कार्ड घर पर रह जाता, तो एयरपोर्ट, होटल या रेलवे स्टेशन पर काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता था। खासतौर पर बुजुर्गों और छोटे बच्चों के दस्तावेज संभालना हमेशा चुनौती बन जाता था। लेकिन अब सरकार और UIDAI इस समस्या को खत्म करने के लिए आधार ऐप का नया फैमिली फ्रेंडली वर्जन लॉन्च करने जा रही है। यह अपडेट डिजिटल पहचान को और ज्यादा स्मार्ट, आसान और सुरक्षित बनाने वाला है।
एक फोन में पूरे परिवार का आधार- इस नए ऐप की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि अब पूरे परिवार की पहचान एक ही मोबाइल फोन में जोड़ी जा सकेगी। यानी घर के सभी सदस्यों को अलग-अलग फोन में आधार ऐप इंस्टॉल करने की जरूरत नहीं रहेगी। परिवार का कोई एक सदस्य, जैसे घर का मुखिया, अपने ऐप में बाकी सदस्यों की प्रोफाइल जोड़ सकेगा। इसमें बच्चे, बुजुर्ग या अन्य सदस्य शामिल हो सकते हैं। इस बदलाव से यात्राओं के दौरान काफी सुविधा मिलेगी। अब एयरपोर्ट, होटल या रेलवे स्टेशन पर पहचान वेरिफिकेशन का काम कुछ ही सेकंडों में पूरा किया जा सकेगा। यात्रियों को बार-बार आधार कार्ड निकालने या फोटोकॉपी दिखाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
यह भी पढ़ें- e-Aadhaar क्या है, कैसे डाउनलोड करें और कहां होता है इस्तेमाल?
तेज और आसान वेरिफिकेशन- नए ऐप के जरिए परिवार की सभी प्रोफाइल एक ही स्क्रीन पर दिखाई देंगी। इससे एक ही जगह से सभी सदस्यों की पहचान आसानी से वेरिफाई हो सकेगी। उदाहरण के तौर पर, एयरपोर्ट पर चेक-इन के समय अब हर व्यक्ति को अलग-अलग कार्ड दिखाने की जरूरत नहीं होगी। UIDAI इस ऐप में स्कैन-और-वेरिफाई फीचर भी जोड़ रहा है, जिससे पहचान सत्यापन और भी तेज हो जाएगा। होटल चेक-इन, रेलवे स्टेशन या एयरपोर्ट पर प्रक्रिया सरल होगी और लंबी लाइन में इंतजार कम होगा। इसके अलावा, फिजिकल कार्ड खोने का डर भी खत्म हो जाएगा। डिजिटल ऐप में पहचान सुरक्षित रहने से यह चिंता भी कम होगी। सरकार का उद्देश्य पहचान प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल बनाना है। UIDAI की ओर से आधार ऐप का फुल वर्जन 28 जनवरी को लॉन्च किया जाएगा। इस दिन को UIDAI दिवस के तौर पर भी मनाया जाता है। सरकार का मकसद है कि वरिष्ठ नागरिकों और परिवारों की यात्रा को आसान बनाया जा सके और पहचान वेरिफिकेशन को पूरी तरह डिजिटल किया जा सके।















