अक्षय पात्र फाउंडेशन ने विश्व आर्थिक मंच (वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम) की वार्षिक बैठक 2026 के दौरान स्विट्ज़रलैंड के दावोस में खाद्य और पोषण सुरक्षा का सशक्त संदेश वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया। इस अवसर पर प्रोमेनेड स्ट्रीट पर राटिया सेंटर के समीप एक विशेष फूड कियोस्क स्थापित कर प्रतिदिन ताज़ा पका हुआ, पौष्टिक भारतीय भोजन परोसा गया। अक्षय पात्र द्वारा प्रतिदिन एक हज़ार से अधिक आगंतुकों को भोजन उपलब्ध कराया गया, जिससे यह स्पष्ट रूप से प्रदर्शित हुआ कि भोजन संवाद, संवेदना और सकारात्मक सामाजिक कार्रवाई का एक प्रभावशाली माध्यम हो सकता है। इस पहल ने बच्चों और समुदायों के लिए खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में संगठन के प्रयासों की ओर वैश्विक नेताओं और प्रभावशाली हस्तियों का ध्यान आकर्षित किया।
वैश्विक मंच पर अक्षय पात्र के पोषण मिशन की सराहना
कियोस्क का उद्घाटन भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के महानिदेशक श्री चंद्रजीत बनर्जी ने किया। भारत सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री माननीय श्री प्रह्लाद जोशी ने भी कियोस्क का दौरा किया और भोजन की सादगी एवं पोषण मूल्य की सराहना की। स्विट्ज़रलैंड में भारत के उप राजदूत श्री अनूप ढींगरा ने भी कियोस्क पर पहुंचकर अपना समर्थन व्यक्त किया। इस दौरान विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि, वैश्विक प्रतिनिधिमंडल, नीति-निर्माता, उद्योग जगत के नेता और सिविल सोसायटी के सदस्य शून्य से नीचे तापमान के बीच गर्म और स्वादिष्ट भारतीय भोजन का आनंद लेते नजर आए। प्रतिष्ठित आगंतुकों ने बच्चों के लिए अक्षय पात्र की स्कूल भोजन योजना को सड़कों, बिजली और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी भौतिक अवसंरचना के समान ही एक महत्वपूर्ण निवेश बताया।
पोषण, मानव पूंजी और सांस्कृतिक कूटनीति का संगम
विशेषज्ञों ने इस बात पर बल दिया कि जिस प्रकार अवसंरचना आर्थिक उत्पादकता को सक्षम बनाती है, उसी प्रकार पोषण संज्ञानात्मक विकास, सीखने की क्षमता और दीर्घकालिक मानव पूंजी निर्माण का आधार है। पर्याप्त पोषण के अभाव में शिक्षा और विकास पर किए गए निवेश का प्रतिफल सीमित रह जाता है। दावोस में अक्षय पात्र की भोजन सेवा पहल को सांस्कृतिक कूटनीति के एक प्रभावी माध्यम के रूप में सराहा गया। इसने वैश्विक प्रतिभागियों को करुणा और सेवा पर आधारित भारत के सभ्यतागत मूल्यों का प्रत्यक्ष अनुभव कराया। भोजन काउंटर पर आरंभ हुई चर्चाएं केवल भोजन कार्यक्रमों तक सीमित न रहकर सतत खाद्य प्रणालियों, सार्वजनिक-निजी साझेदारी और लागत-प्रभावी सामाजिक अवसंरचना जैसे व्यापक विषयों तक विस्तारित हुईं।
पोषण से शिक्षा, शिक्षा से विकास
इस अवसर पर अक्षय पात्र टीम ने प्राचीन भारतीय परंपरा ‘अन्नदान’ के माध्यम से पोषण, शिक्षा और आर्थिक विकास के बीच के गहरे संबंध को विश्व के सबसे प्रभावशाली वैश्विक मंचों में से एक पर रेखांकित किया। यह पहल केवल प्रतीकात्मक नहीं थी, बल्कि इस दृढ़ विश्वास को दर्शाती थी कि किसी भी बच्चे को भूख के कारण शिक्षा से वंचित नहीं होना चाहिए और पोषण बाल विकास एवं कल्याण की आधारशिला है। दावोस 2026 में अक्षय पात्र की उपस्थिति ने यह स्पष्ट किया कि खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना रणनीतिक राष्ट्र-निर्माण और वैश्विक विकास का एक अहम निवेश है। फाउंडेशन ने यह सशक्त संदेश दिया कि बच्चों के पोषण में निवेश समाज द्वारा किए जा सकने वाले सर्वाधिक प्रभावी निवेशों में से एक है।
भारत से वैश्विक पोषण अभियान तक
उल्लेखनीय है कि अक्षय पात्र पिछले 25 वर्षों से भारत सरकार की प्रमुख पीएम पोषण योजना के अंतर्गत सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों को पौष्टिक मध्याह्न भोजन उपलब्ध करा रहा है। वर्तमान में यह संगठन देश के 16 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों में प्रतिदिन 23 लाख से अधिक बच्चों को भोजन प्रदान करता है और वर्ष 2030 तक 30 लाख बच्चों तक पहुंचने का लक्ष्य रखता है। दावोस में आयोजित यह भोजन कार्यक्रम वर्ल्ड फूड मूवमेंट (WFM) के सहयोग से संपन्न हुआ। अक्षय पात्र की सफलता से प्रेरित होकर इसके संस्थापकों ने वर्ल्ड फूड मूवमेंट की स्थापना की है, जिसका उद्देश्य अमेरिका सहित विश्वभर में छात्रों और समुदायों को पोषण उपलब्ध कराना है।
अक्षय पात्र–WFM: वैश्विक स्तर पर पोषण का साझा संकल्प
अक्षय पात्र और WFM के संस्थापक एवं अध्यक्ष श्री मधु पंडित दास ने कहा कि अक्षय पात्र एक सामाजिक नवाचार है, जिसने सार्वजनिक-निजी साझेदारी, तकनीक और सुशासन को एकीकृत कर पिछले 25 वर्षों से भारतीय विद्यालयों में बड़े पैमाने पर गर्म और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया है। उन्होंने कहा कि WFM, अक्षय पात्र के अनुभव और विशेषज्ञता का उपयोग अपनी वैश्विक परियोजनाओं में करेगा। वहीं, वैश्विक संचार एवं रणनीति के कार्यकारी निदेशक श्री नवीन नीरद दास ने आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ठंडे शीतकालीन सप्ताह के दौरान वैश्विक प्रतिनिधियों को गर्म और पौष्टिक भोजन परोसना अत्यंत संतोषजनक अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि दावोस में शुरू हुई रचनात्मक चर्चाओं को आगे बढ़ाते हुए बच्चों और समाज के कल्याण के लिए निरंतर कार्य किया जाएगा।












