साल 2026 के लिए पद्म पुरस्कारों की घोषणा हो चुकी है। यह पुरस्कार भारत सरकार द्वारा हर वर्ष उन लोगों को दिए जाते हैं, जिन्होंने अपने कार्यक्षेत्र में निःस्वार्थ भाव से देश और समाज की सेवा की है। पद्म पुरस्कार साहित्य, शिक्षा, चिकित्सा, कला, समाजसेवा और जनकल्याण जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वालों को सम्मानित करते हैं। हालाँकि पद्म पुरस्कार विजेताओं की आधिकारिक सूची 25 जनवरी की शाम को केंद्र सरकार द्वारा जारी की जाएगी, लेकिन इससे पहले सामने आई सूची ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस वर्ष भी सरकार ने “साधारण भारतीयों के असाधारण योगदान” को प्राथमिकता दी है।
प्रेरणा के अनकहे नाम- इस सूची में ऐसे अनेक नाम शामिल हैं, जो बड़े मंचों पर अक्सर दिखाई नहीं देते, लेकिन अपने क्षेत्र और समाज में गहरा प्रभाव छोड़ते हैं। अंके गौड़ा, आर्मिडा फर्नांडीज, भगवानदास रायकवार, भिकल्या लाडक्या ढिंडा, बृज लाल भट्ट, बुधरी ताती, चरण हेम्ब्रम, चिरंजी लाल यादव जैसे कई नाम उन लोगों के हैं, जिन्होंने बिना किसी स्वार्थ के वर्षों तक समाज की सेवा की। इन पुरस्कार विजेताओं में शिक्षक, लोक कलाकार, पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के जानकार, सामाजिक कार्यकर्ता, पर्यावरण संरक्षक और जनजातीय संस्कृति को जीवित रखने वाले लोग शामिल हैं। कोल्लाक्कयिल देवकी अम्मा जी, कुमारसामी थंगराज, महेंद्र कुमार मिश्र, नरेश चंद्र देव वर्मा, पुन्नियामूर्ति नटेसन और ओथुवर थिरुथानी स्वामीनाथन जैसे लोग अपने-अपने क्षेत्रों में प्रेरणा का स्रोत बने हैं।
UNSUNG & UNIQUE Padma Awardees (#PeoplesPadma)
Continuing the principle of celebrating Ordinary Indians making Extraordinary Contributions, this year’s Padma Awards recognise a wide spectrum of unsung heroes from across the length and breadth of India. Each awardee represents… pic.twitter.com/zA28HDEfMm
— Press Trust of India (@PTI_News) January 25, 2026
इस सूची की खास बात यह है कि इसमें देश के दूर-दराज़ और कठिन इलाकों से आने वाले लोगों को भी सम्मान दिया गया है। तगा राम भील, तेची गुबिन, संग्युसांग एस पोन्गेनर, पोखिला लेकथेपी और युमनाम जात्रा सिंह जैसे नाम इस बात का प्रमाण हैं कि प्रतिभा और सेवा किसी बड़े शहर या मंच की मोहताज नहीं होती। ई पुरस्कार विजेताओं ने अपने जीवन में अत्यंत कठिन परिस्थितियों का सामना किया है। गरीबी, सामाजिक भेदभाव, सीमित संसाधन और व्यक्तिगत दुखों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने न केवल अपने जीवन को बेहतर बनाया, बल्कि पूरे समाज के लिए काम किया। इनमें हाशिये पर रहने वाले पिछड़े वर्गों, दलित समुदायों, आदिम जनजातियों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोग बड़ी संख्या में शामिल हैं। रामचन्द्र गोडबोले और सुनीता गोडबोले, एस. जी. सुशीलम्मा, श्रीरंग देवबा लाड, श्याम सुंदर, सीमांचल पात्रो और सुरेश हनागावडी जैसे नाम यह दिखाते हैं कि सेवा भावना उम्र, भाषा या क्षेत्र की सीमाओं से परे होती है। पद्म पुरस्कार 2026 न केवल उपलब्धियों का सम्मान हैं, बल्कि यह संदेश भी देते हैं कि देश उन लोगों को नहीं भूलता जो चुपचाप, ईमानदारी से और निरंतर समाज के लिए काम करते हैं। ये पुरस्कार आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देते हैं कि सच्ची सेवा ही सबसे बड़ा सम्मान है।

















