नई दिल्ली (हि.स.) । उच्चतम न्यायालय ने मौत की सजा के लिए फांसी की जगह कम तकलीफदेह तरीके अपनाने की मांग वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट ने सभी पक्षकारों से दो हफ्ते में लिखित दलीलें जमा करने को कहा है।
याचिकाकर्ता ने फांसी को बताया क्रूर और अमानवीय
वकील ऋषि मल्होत्रा ने फांसी को मौत की सजा देने को एक क्रूर और अमानवीय तरीका बताते हुए याचिका दाखिल की है। उन्होंने मौत के लिए जहर का इंजेक्शन देने का सुझाव दिया है।
केंद्र सरकार ने कमिटी गठित करने की जानकारी दी
पिछली सुनवाई में केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय को बताया था कि वो इस मांग पर विचार करेगी। इस पर अध्ययन के लिए एक कमिटी बनाई गई है।
लॉ कमिशन की रिपोर्ट का हवाला
मल्होत्रा ने कहा है कि लॉ कमिशन ने भी यही कहा है कि विकासशील और विकसित देशों ने फांसी की बजाय इंजेक्शन या गोली मारने के तरीकों को अपनाया है। किसी कैदी को कम से कम दर्द और सहने का आसान मानवीय और स्वीकार्य तरीका है।
1967 की 35वीं रिपोर्ट का उल्लेख
लॉ कमिशन ने 1967 में 35वीं रिपोर्ट में कहा था कि ज्यादातर देशों ने बिजली करंट, गोली मारने या गैस चैंबर को फांसी का विकल्प चुन लिया है।
धारा 354(5) को असंवैधानिक घोषित करने की मांग
याचिका में मांग की गई है कि अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 354 (5) के तहत ये कहा गया है कि मौत होने तक लटकाया जाए, इसलिए इसे संविधान के जीने के अधिकार का उल्लंघन करार दिया जाना चाहिए। साथ ही सम्मानजनक तरीके से मरने को मौलिक अधिकार का दर्जा दिया जाए।















