सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: भोजशाला में बसंत पंचमी पर हिंदुओं को पूरे दिन पूजा की अनुमति
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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: भोजशाला में बसंत पंचमी पर हिंदुओं को पूरे दिन पूजा की अनुमति

22 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला विवाद पर फैसला सुनाया। बसंत पंचमी (23 जनवरी) को हिंदुओं को सूर्योदय से सूर्यास्त तक सरस्वती पूजा और मुसलमानों को दोपहर 1-3 बजे नमाज की इजाजत।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Jan 22, 2026, 01:41 pm IST
inमध्य प्रदेश
Dhar Bhojshala ASI Survey

मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। सर्वोच्च अदालत ने हिन्दुओं और मुसलमानों को एक साथ पूजा और नमाज की इजाजत दे दी है। भोजशाला मां सरस्वती (वाग्देवी) का मंदिर है।

विवाद की जड़ क्या है?

भोजशाला का विवाद सालों पुराना है। 2003 में ASI ने एक आदेश जारी किया था, जिसमें हर मंगलवार को हिंदुओं को पूजा करने की इजाजत है और बसंत पंचमी के दिन भी पारंपरिक अनुष्ठान की अनुमति दी गई है। वहीं, मुसलमानों को हर शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक नमाज पढ़ने का समय मिला हुआ है। समस्या तब आती है, जब बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ जाती है, जैसे कि इस बार 23 जनवरी 2026 को पड़ रही है। ऐसे में दोनों समुदायों की धार्मिक गतिविधियां एक साथ आ जाती हैं, जिससे टकराव की आशंका बढ़ जाती है।

हिंदू पक्ष, खासकर हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस जैसी संस्थाओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने मांग की थी कि बसंत पंचमी के पूरे दिन सिर्फ हिंदुओं को पूजा करने की अनुमति मिले और मुसलमानों को नमाज से रोका जाए, क्योंकि यह सरस्वती पूजा का खास दिन होता है। दूसरी तरफ, मुस्लिम पक्ष ने भी अपनी बात रखी कि शुक्रवार को जुमे की नमाज का अपना महत्व है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया?

22 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई की और एक संतुलित फैसला सुनाया। कोर्ट ने दोनों समुदायों की भावनाओं का ख्याल रखते हुए दोनों को राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में हिन्दुओं के लिए बसंत पंचमी के दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक मां वाग्देवी की पूजा-अर्चना करने की पूरी अनुमति है। यानी पूरे दिन हिंदू भक्त सरस्वती पूजा कर सकेंगे। वहीं मुसलमानों के लिए शुक्रवार की जुमे की नमाज दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक पढ़ी जा सकेगी, जैसा कि पहले से ASI के 2003 के आदेश में था। इस समय के दौरान नमाज के लिए आने वाले लोगों की संख्या जिला प्रशासन को बतानी होगी।

इसके साथ ही शीर्ष कोर्ट ने जिला प्रशासन को साफ निर्देश दिए हैं कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के पूरे इंतजाम किए जाएं। दोनों पक्षों की गतिविधियां शांतिपूर्ण तरीके से होनी चाहिए।

मौके पर सुरक्षा का इंतजाम

भोजशाला परिसर और आसपास के इलाके में पहले से ही भारी सुरक्षा व्यवस्था कर दी गई है। करीब 8 हजार से ज्यादा पुलिस और सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। CCTV कैमरों से भी निगरानी की जा रही है, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। यह फैसला दोनों समुदायों के लिए एक तरह से राहत भरा है, क्योंकि कोर्ट ने किसी एक पक्ष को पूरी तरह से वरीयता नहीं दी, बल्कि समय बांटकर दोनों की धार्मिक जरूरतों को जगह दी है।

भोजशाला ही था सरस्वती मंदिर

भोजशाला ही ‘सरस्वती मंदिर’ था। इस बात का दावा पूर्व पुरातत्वविद के के मुहम्मद ने किया है। उनका कहना है कि भोजशाला, जिसे मुस्लिम पक्ष ‘कमल मस्जिद’ असल में वो कोई मस्जिद नहीं, बल्कि सरस्वती मंदिर था। लेकिन बाद में इस्लामवादियों ने इस्लामी इबादतगाह में बदल दिया।

केके मुहम्मद का कहना है कि धार स्थित भोजशाला के बारे में ये ऐतिहासिक तथ्य है कि ये सरस्वती मंदिर ही था। बाद में इसे मस्जिद बनाया गया। केके मुहम्मद पूजा स्थल अधिनियम 1991 का हवाला देते कहते हैं कि इस कानून के तहत किसी भी धार्मिक स्थल की स्थिति आधार वर्ष 1947 निर्धारित है। उस वर्ष में अगर ये एक मंदिर था तो ये मंदिर ही रहेगा और अगर ये मस्जिद था तो ये मस्जिद ही रहेगा।

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कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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