चंडीगढ़। रामलीला मैदान के मंच से उठी जिस आवाज़ को मीडिया ने जनआंदोलन का रूप दिया, सत्ता की कुर्सी तक पहुंचाया, आज उसी मीडिया पर दमन के आरोप आम आदमी पार्टी (आप) की सरकारों पर लग रहे हैं। दिल्ली से शुरू हुआ यह टकराव अब पंजाब में और अधिक तीखे रूप में सामने आ रहा है। 2013 से 2026 तक का घटनाक्रम बताता है कि आप और मीडिया के रिश्ते सहयोग से संघर्ष की ओर बढ़ते चले गए। शुरुआत हुई इंडिया न्यूज पर कार्रवाई से। 25 नवंबर 2013 को दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आम आदमी पार्टी ने पत्रकार अनुरंजन झा और न्यूज चैनल इंडिया न्यूज के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया। यह कार्रवाई उस स्टिंग ऑपरेशन के एक दिन बाद हुई थी, जिसमें पार्टी नेताओं को बिना पृष्ठभूमि जांच के चंदा स्वीकार करने को तैयार दिखाया गया था। आप ने फुटेज को एडिटेड बताया, लेकिन विपक्ष ने इसे पारदर्शिता के दावों के उलट कदम करार दिया।
2015 में डिफेमेशन सर्कुलर से भड़का विवाद
फरवरी 2015 में दिल्ली में सरकार बनने के तीन महीने बाद, मई 2015 में केजरीवाल सरकार ने एक सर्कुलर जारी कर सरकारी विभागों को मीडिया रिपोर्टिंग के खिलाफ मानहानि के केस दर्ज करने की अनुमति दी। इसे मीडिया का गला घोंटने की कोशिश बताया गया। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां इस पर रोक लगी और जुलाई 2015 में सरकार को सर्कुलर वापस लेना पड़ा।
2016 से 2021 तक दबाव और तल्खी
इन वर्षों में दिल्ली में पत्रकारों पर सीधे दर्ज मामलों की कोई आधिकारिक सूची सामने नहीं आई, लेकिन सचिवालय में मीडिया एंट्री सीमित करने, चुनिंदा पत्रकारों को प्रेस कॉन्फ्रेंस से बाहर रखने और सोशल मीडिया पर हमलों के आरोप लगातार लगते रहे। कोविड-19 के दौरान स्थिति और तल्ख हुई।
2021 में सवाल पूछने पर हिंदुस्तान टाइम्स के पत्रकार निशाने
6 मई 2021 को ऑक्सीजन संकट पर सवाल उठाने के बाद दिल्ली सरकार के मीडिया सेल ने हिंदुस्तान टाइम्स के 7 पत्रकारों को आधिकारिक व्हाट्सऐप ग्रुप से हटा दिया, जिससे प्रेस नोट और स्वास्थ्य बुलेटिन साझा होते थे।
2022 में पंजाब में सत्ता, पुराना विवाद
मार्च 2022 में आप ने पंजाब में सरकार बनाई। 30 अप्रैल 2022 को दिल्ली के इम्पीरियल होटल में केजरीवाल-भगवंत मान की संयुक्त प्रेस कांफ्रैंस के दौरान पीआईबी मान्यता प्राप्त पत्रकार नरेश वत्स के साथ अभद्रता के आरोप लगे। उन्हें घसीटकर बाहर निकाला गया, जिसकी शिकायत पुलिस थाने में दर्ज है।
2023 में टाइम्स नाउ की पत्रकार की गिरफ्तारी
5 मई 2023 को टाइम्स नाउ नवभारत की पत्रकार भावना किशोर को आम आदमी पार्टी के कार्यक्रम की कवरेज के दौरान पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार किया। हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी को गैर-कानूनी बताते हुए जमानत दी। बाद में उन्होंने हिरासत में मानसिक प्रताड़ना और अपमानजनक व्यवहार के आरोप लगाए।
2024–25 में यूट्यूबर और पत्रकारों पर केस
फरवरी 2024 में यूट्यूबर रचित कौशिक को यूपी से पंजाब पुलिस द्वारा उठाए जाने का मामला सामने आया। फरवरी 2025 में बठिंडा में पत्रकार मनिंदरजीत सिंह सिद्धू पर केस दर्ज हुआ, जिसे पंजाब में पहला बड़ा पत्रकार मामला माना जाता है।
2025 में अजीत समाचार,तीन पत्रकार और 2025 में पंजाब केसरी निशाने पर
दिसंबर 2025 में लुधियाना साइबर थाने में तीन पत्रकारों पर केस दर्ज हुआ।हालांकि हाईकोर्ट ने इस मामले में राहत दी। मई 2025 में अजीत समाचार के प्रबंध संपादक डॉ. बरजिंदर सिंह हमदर्द समेत 26 लोगों पर केस दर्ज हुआ। जनवरी 2026 में पंजाब केसरी ग्रुप ने सरकारी दबाव और छापों का आरोप लगाया।











