ईरान में मुल्ला शासन के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच देश की पुलिस विभाग के प्रमुख ने प्रदर्शनकारियों को तीन दिन के अंदर ही प्रदर्शनों को रोकने के लिए कहा है। अन्यथा पूरी ताकत से दमन का किया जाएगा। ईरानी सरकार के क्रूर दमन के चलते देश में अब तक 16500 से अधिक मौतें हो चुकी हैं।
प्रदर्शन क्यों शुरू हुए
देश में आर्थिक हालात बहुत खराब हैं। महंगाई बहुत ऊंची है, मुद्रा की वैल्यू लगातार गिर रही है, और लोगों की जेब पर बोझ बढ़ता जा रहा है। बाजारों में सामान महंगा होने से आम आदमी परेशान है। शुरुआत तेहरान के ग्रैंड बाजार से हुई, जहां व्यापारी और आम लोग सड़कों पर उतरे। फिर ये प्रदर्शन मशहद, इस्फहान समेत कई बड़े शहरों में फैल गए। लोग सड़कों पर निकलकर सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे थे। शुरुआत में ये शांतिपूर्ण थे, लेकिन बाद में कुछ जगहों पर हिंसा हुई, जिसमें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं।
क्या कहती है ईरानी सरकार
ईरान की सरकार ने इन प्रदर्शनों को ‘दंगे’ करार दिया और उन्हें विदेशी ताकतों (खासकर अमेरिका और इजरायल) द्वारा भड़काने का आरोप लगाया। पुलिस प्रमुख अहमद-रेजा रादान ने 19 या 20 जनवरी 2026 को टीवी पर बयान दिया कि जो लोग ‘धोखे में आकर’ इन दंगों में शामिल हुए हैं, उन्हें तीन दिनों के अंदर सरेंडर कर देना चाहिए। अगर ऐसा नहीं किया तो कानून की पूरी ताकत से कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि भ्रमित युवाओं को दुश्मन सैनिक नहीं माना जाएगा और उनके साथ नरमी बरती जाएगी। सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई ने भी कहा कि उपद्रवियों की कमर तोड़ देनी चाहिए। सरकार ने आर्थिक समस्याओं को जल्द ठीक करने का वादा किया है और तीनों प्रमुखों (कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका) ने इसके लिए काम करने का संकल्प लिया है।
इंटरनेट और संचार पर रोक
प्रदर्शन तेज होने के बाद 8 जनवरी 2026 से देश में इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क पर लगभग पूरी तरह बंदी लगा दी गई। ये बंदी अब 11-12 दिनों से ज्यादा हो चुकी है। फोन कॉल्स, मैसेज और इंटरनेट सब प्रभावित हैं। सरकार का कहना है कि ये ‘आतंकी गतिविधियों’ को रोकने के लिए किया गया है। जानकारी बाहर आने में बहुत मुश्किल हो रही है। कुछ जगहों पर इंटरनेट धीरे-धीरे बहाल हो रहा है, लेकिन पूरा कनेक्शन अभी नहीं लौटा। इस वजह से दुनिया को सही तस्वीर मिलना मुश्किल है।
मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट
मानवाधिकार समूहों के मुताबिक, प्रदर्शन दबाने में भारी हिंसा हुई है। ईरान ह्यूमन राइट्स जैसे संगठनों ने हजारों मौतों की पुष्टि की है – कुछ रिपोर्ट्स में 3,400 से 3,700 से ज्यादा मौतें बताई गई हैं, और असल संख्या इससे ज्यादा भी हो सकती है। हजारों लोग गिरफ्तार हुए हैं– सरकारी आंकड़े 3,000 बताते हैं, लेकिन संगठन 20,000 से 26,000 तक का अनुमान लगाते हैं। ईरान में फांसी की सजा बहुत ज्यादा दी जाती है। संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी वोल्कर टर्क ने चेतावनी दी है कि सरकार फांसी को धमकी के तौर पर इस्तेमाल कर रही है। पिछले साल भी 1,500 से ज्यादा फांसी हुई थीं, और अब प्रदर्शन से जुड़े मामलों में मौत की सजा बढ़ने की आशंका है।

















