सबरीमाला मंदिर में सोने की चोरी का मामला अब एक नया मोड़ ले चुका है। विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) की वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि मंदिर से निकाले गए सोने की प्लेटिंग में अब असली सोना कम है और उसकी जगह निकल मेटल और एक्रिलिक पॉलिमर डाला गया है। यह रिपोर्ट स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने हाई कोर्ट में पेश की, जिससे साफ हो रहा है कि चोरी बहुत सोची-समझी और योजनाबद्ध तरीके से हुई है।
क्या हुआ था मामला
केरल कौमुदी की रिपोर्ट के अनुसार, सबरीमाला मंदिर के द्वारपालक मूर्तियों (द्वारपालक) और कट्टिलेपल्ली (सोने का दरवाजा फ्रेम) पर लगी सोने की परतों को पहले निकाला गया। ये परतें सोने की प्लेटिंग के लिए बाहर भेजी गई थीं, लेकिन लौटकर आईं तो उनमें असली सोना काफी कम था। जांच में पता चला कि मूल सोने की परतों में निकल और एक्रिलिक पॉलिमर बिल्कुल नहीं था, लेकिन लौटाई गई परतों में निकल धातु मिलाई गई है। निकल एक चमकीला मेटल है जो हल्का सुनहरा दिखता है। साथ ही, पुरानी परतों में मरकरी (पारा) के निशान थे जो सोने को चिपकाने के लिए इस्तेमाल होता है, लेकिन नई परतों में मरकरी का कोई निशान नहीं मिला। इसके अलावा एक्रिलिक पॉलिमर भी काफी मात्रा में मिला है।
VSSC की रिपोर्ट कहती है कि सोने की पुरानी परत की मोटाई और अब वाली परत में निकल-अक्रिलिक की मोटाई की तुलना से चोरी की असली मात्रा का अंदाजा लगाया जा सकता है। यह सब 2024-2025 के दौरान हुआ लगता है।
पुलिस जांच की स्थिति
SIT ने हाई कोर्ट को रिपोर्ट सौंपी है। द्वारपालक मूर्तियों वाली चोरी के केस में कुल 16 आरोपी थे, जिनमें से 11 को गिरफ्तार कर लिया गया है। कट्टिलेपल्ली के केस में कुल 13 आरोपी हैं। जांच टीम को शक है कि तीन और लोग इसमें शामिल हो सकते हैं, और कुल मिलाकर ज्यादा लोग हाथ में लग सकते हैं। SIT अब और गहराई से जांच कर रही है – जैसे कि द्वारपालक मूर्तियों के अलावा पुराने ध्वजस्तंभ (फ्लैगपोल) को बदलने का मामला भी देखा जा रहा है। अब तक 202 गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं, और और लोगों से पूछताछ जारी है। मुख्य आरोपी के पिछले सालों में खरीदी गई रियल एस्टेट प्रॉपर्टी की भी जांच हो रही है, कुछ सुराग मिले हैं। कुछ आरोपियों के बैंक अकाउंट भी फ्रीज कर दिए गए हैं।
कोर्ट ने क्या कहा
जस्टिस वी राजा विजयराघवन और जस्टिस केवी जयकुमार की बेंच ने कहा कि कोर्ट को पहले से जो शक था, वह रिपोर्ट से सच साबित होता दिख रहा है। मामला काफी संवेदनशील है और इसमें और लोग शामिल लगते हैं, इसलिए ज्यादा डिटेल अभी नहीं बता रहे। कोर्ट ने SIT को सारे जब्त सबूतों की पूरी जांच कराने को कहा है। VSSC के वैज्ञानिकों के बयान भी डिटेल में दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई 9 फरवरी को होगी।
VSSC की लैब दुनिया के टॉप लेवल की है, जो रॉकेट में इस्तेमाल होने वाले मेटल अलॉय की जांच करती है। इसी वजह से SIT ने सैंपल 17 और 18 नवंबर को वहां भेजे थे। रिपोर्ट से साफ है कि यह कोई छोटी-मोटी चोरी नहीं, बल्कि एक बड़ा और संगठित खेल लगता है।











