अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से ग्रीनलैंड को बार-बार हासिल करने की धमकियों के बाद यूरोपीय देशों ने दिखावे की कार्रवाई की है। यूरोप ने नाम बड़े और दर्शन छोटे वाला काम कर दिया है। ग्रीनलैंड की सुरक्षा के नाम पर फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन समेत कई देशों ने 50 से भी कम सैनिकों की तैनाती ग्रीनलैंड में की है।
यूरोप की सैन्य टीम ग्रीनलैंड पहुंची
यूरोपीय देशों ने मिलकर एक छोटी-सी सैन्य टीम ग्रीनलैंड भेजी है। इसे टोही मिशन यानी जायजा लेने वाला मिशन बताया जा रहा है। इसका मकसद ये देखना है कि भविष्य में आर्कटिक इलाके में ज्यादा सैनिकों और व्यायामों को कैसे बढ़ाया जा सकता है। ये सब ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस नाम के एक NATO एक्सरसाइज का हिस्सा है, जिसकी अगुवाई डेनमार्क कर रहा है। खास बात ये है कि अमेरिका इसमें शामिल नहीं है।
डेनमार्क पहले से ही ग्रीनलैंड में अपने करीब 150 सैनिक तैनात रखता है। इसके अलावा वहां सीरियस डॉग स्लेज पेट्रोल नाम की 14 सदस्यीय टीम है, जो लंबी दूरी की टोह लेती है और संप्रभुता की रक्षा करती है। इनके पास पुराने जमाने की M1917 एनफील्ड राइफलें हैं। डेनमार्क की एयर फोर्स ने C-130 हरक्यूलिस विमान भी भेजे हैं ताकि सैनिक और सामान पहुंच सके।
कौन-कौन से देश कितने सैनिक भेज रहे हैं?
- यूनाइटेड किंगडम ने 1 मिलिट्री ऑफिसर भेजा है।
- फिनलैंड ने 2 सैनिक भेजे हैं।
- नॉर्वे ने भी 2 सैनिक भेजे हैं।
- नीदरलैंड्स ने 1 सैनिक भेजा है, और आगे और भेजने की बात कही है।
- जर्मनी ने 13 सैनिक भेजे हैं।
- फ्रांस ने 15 सैनिक भेजे हैं, और आने वाले दिनों में जमीन, हवा और समुद्र से और सपोर्ट भेजने की तैयारी है।
- स्वीडन ने भी कुछ सैनिक भेजे हैं, लेकिन सटीक संख्या नहीं बताई गई।
कुल मिलाकर यूरोप से (डेनमार्क के पहले से मौजूद सैनिकों को छोड़कर) करीब 37 सैनिक ग्रीनलैंड में पहुंचे हैं। ये संख्या छोटी लग सकती है, लेकिन यूरोपीय देश इसे एकजुटता दिखाने का तरीका बता रहे हैं। पोलैंड, इटली और तुर्की ने इसमें सैनिक भेजने से इनकार कर दिया है। पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने साफ कहा कि वो सैनिक नहीं भेजेंगे। इटली के डिफेंस मिनिस्टर ने इसे “बेतुका” और “मजाक” जैसा बताया।
ट्रेड टेंशन भी बढ़ गई है
ट्रंप ने यूरोपीय देशों पर 10% टैरिफ लगा दिया है, जिसमें डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूके, नीदरलैंड्स और फिनलैंड शामिल हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर बात नहीं बनी तो जून से ये 25% तक हो सकता है। इसके जवाब में यूरोपीय संसद ने अमेरिका के साथ हाल ही में साइन हुए बड़े ट्रांसअटलांटिक ट्रेड पैक्ट को रोक दिया है।
लीडर्स क्या कह रहे हैं?
डेनमार्क के डिफेंस मिनिस्टर ट्रोएल्स लुंड पाउलसेन ने कहा कि आर्कटिक में सुरक्षा बहुत अहम है, इसलिए सहयोगियों के साथ मिलकर मौजूदगी बढ़ानी जरूरी है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बताया कि उनकी टीम पहले से वहां है और जल्द और फोर्स भेजी जाएगी। नॉर्वे, स्वीडन और नीदरलैंड्स के मिनिस्टरों ने भी अपनी हिस्सेदारी की पुष्टि की।
डेनमार्क के आर्कटिक कमांडर मेजर जनरल सोरेन एंडरसन ने कहा कि NATO सहयोगी एक-दूसरे पर हमला नहीं करेंगे, ये सिर्फ काल्पनिक बात है। फिनिश एनालिस्ट एमिल कास्टेहेल्मी ने चेतावनी दी कि यूरोप को सबसे खराब स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए, क्योंकि पुरानी सुरक्षा व्यवस्था अब पहले जैसी नहीं रही।
ऑपरेशन आर्कटिक सेंट्री
एक बड़ा मिशन ऑपरेशन आर्कटिक सेंट्री पर बात चल रही है, जो ग्रीनलैंड के आसपास निगरानी और रोकथाम के लिए होगा। लेकिन ये अभी प्लानिंग स्टेज में है और आर्कटिक की मुश्किलों की वजह से महीनों लग सकते हैं। कुल मिलाकर यूरोप अपनी तरफ से कोशिश कर रहा है कि ग्रीनलैंड पर अपना कंट्रोल बनाए रखे और ट्रंप की धमकियों का जवाब दे।











