दिल्ली में फिर से स्मॉग और धुंध का कहर है। सोमवार सुबह (19 जनवरी 2026) दिल्ली-एनसीआर पर गहरा स्मॉग छाया हुआ है, जिससे हवा की क्वालिटी ‘गंभीर’ कैटेगरी में पहुंच गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मुताबिक, सुबह 8 बजे दिल्ली का ओवरऑल AQI 418 पर था, जो ‘गंभीर’ जोन में आता है। ये हालात सप्ताहांत से बिगड़ते जा रहे हैं।
हवा की क्वालिटी कितनी खराब?
शनिवार से प्रदूषण बढ़ना शुरू हुआ था। रविवार को कई जगहों पर AQI 480 से ऊपर रहा कई घंटों तक। आज सुबह दिल्ली के 37 मॉनिटरिंग स्टेशनों में से 32 पर ‘गंभीर’ लेवल था, बाकी पांच पर ‘बहुत खराब’। कुछ हॉटस्पॉट्स में हालत और भी बुरी है, इसमें आनंद विहार (497), मुंडका और रोहिणी (491), धौला कुआं और पांडव नगर (455) और आईटीओ का AQI 434 पर रहा।
सबसे कम AQI अयानगर में 356 रहा। नेहरू नगर (लाजपत नगर), सोनिया विहार, वजीरपुर, अशोक विहार, बवाना, जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम और दिल्ली यूनिवर्सिटी नॉर्थ कैंपस जैसे इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
PM2.5 लेवल और भी डरावना
PM2.5 लेवल तो और भी डरावना है। आनंद विहार में रात 1 बजे ये 890 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच गया – जो नेशनल स्टैंडर्ड से 15 गुना और WHO के सुरक्षित लिमिट से 59 गुना ज्यादा है। नेहरू नगर में शनिवार रात PM2.5 952 तक गया था। AQI आठ पॉल्यूटेंट्स (PM10, PM2.5, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, ओजोन, अमोनिया और लेड) के आधार पर कैलकुलेट होता है।
मौसम और विजिबिलिटी का हाल
स्मॉग के साथ-साथ घनी धुंध भी है, जिससे दृश्यता बहुत कम हो गई है। तापमान 12.3 डिग्री सेल्सियस है और हवा की स्पीड कम होने से प्रदूषण फैल नहीं पा रहा, बल्कि शहर के ऊपर जमा हो रहा है। ये धुंध और स्मॉग मिलकर आम लोगों की आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ पैदा कर रहे हैं। इसका असर ये हो रहा है कि इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI) पर धुंध की वजह से कई फ्लाइट्स डिले हो रही हैं। लोग सुबह से ही परेशान हैं क्योंकि लैंडिंग और टेकऑफ में दिक्कत आ रही है।
क्या कर रहा प्रशासन?
अब GRAP-4 के नियम लागू हो गए हैं, जो सबसे सख्त स्टेज है। लोगों को खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारी वालों को बाहर कम निकलने की सलाह दी गई है। एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि ऐसी हवा में बाहर रहना सेहत के लिए बहुत जोखिम भरा है, खासकर छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए। प्रदूषण लोकल एमिशन (वाहन, कंस्ट्रक्शन, इंडस्ट्री आदि) और मौसम की वजह से बढ़ा है – कम हवा चलना और स्थिर पर्यावरण प्रदूषकों को फैलने नहीं दे रहा।
















