लोकल से ग्लोबल : शिक्षा बिल 2025 से बदलेगा भारत का भविष्य
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लोकल से ग्लोबल : शिक्षा बिल 2025 से बदलेगा भारत का भविष्य

विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल 2025 युवाओं को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़कर वैश्विक नागरिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। जानिए कैसे यह शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह बदल देगा।

Written byप्रो. डी. पी. सिंहप्रो. डी. पी. सिंह — edited by Shivam Dixit
Jan 14, 2026, 10:30 pm IST
in शिक्षा

विश्व की सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश होने के बावजूद भारत आज दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था की पंक्ति में शामिल है। इस विशाल उपलब्धि के पीछे सबसे बड़ी शक्ति है हमारा युवा वर्ग। यह युवा शक्ति भारत को हर क्षेत्र में अपार संभावनाओं से युक्त बनाती है और वैश्विक मंच पर नेतृत्व की क्षमता प्रदान करती है। आने वाले समय में यही युवा लोकल से ग्लोबल की यात्रा को आगे बढ़ाते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की पहचान स्थापित करेंगे।

विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल 2025 की पृष्ठभूमि

अभी हाल ही में विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल, 2025 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान द्वारा लोकसभा में प्रस्तुत किया गया। उच्च शिक्षा संस्थानों की शासन व्यवस्था में व्यापक सुधार से जुड़ा यह प्रस्ताव मूलतः राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 में कस्तूरीरंगन समिति द्वारा परिकल्पित किया गया था, जिसे पहले उच्च शिक्षा आयोग (HECI) के रूप में लागू किया जाना था और अब विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान के रूप में संरचित किया गया है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 का विज़न

इस अधिष्ठान तथा इसके तीनों परिषदों की प्रमुख जिम्मेदारी राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के उस विज़न को साकार करना है, जिसके अनुसार “भारतीय नागरिकों में भारतीय होने का गर्व, न केवल विचार में बल्कि व्‍यवहार, बुद्धि और कार्यों में भी और साथ ही ज्ञान, कौशल, मूल्यों और सोच में भी होना चाहिए जो मानव अधिकारों, स्थायी विकास और जीवनयापन तथा वैश्विक कल्याण के लिए प्रतिबद्ध हों, ताकि वे सही मायने में वैश्विक नागरिक बन सकें।”

युवाओं को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने का प्रयास

इसी दृष्टि के आधार पर तैयार यह विधेयक युवाओं को भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हुए उन्हें वैश्विक परिदृश्य में सक्षम, सफल और जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित करने का प्रयास करेगा।

वैश्विक नागरिकता और यूजीसी फ्रेमवर्क

विश्व नागरिकता की अवधारणा को उच्च शिक्षा में सुदृढ़ रूप से समाहित करने हेतु विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा वर्ष 2021 में ही “Educational Framework for Global Citizenship in Higher Education” जारी किया जा चुका है। इस का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों को इस तरह सक्षम बनाना है कि वे विद्यार्थियों में वैश्विक दृष्टिकोण, उत्तरदायित्वबोध, सांस्कृतिक समझ और वैश्विक चुनौतियों के प्रति संवेदनशीलता विकसित कर सकें। अब इस फ्रेमवर्क के प्रभावी कार्यान्वयन की ज़िम्मेदारी विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान पर निहित होगी।

लोकल से ग्लोबल की सोच और भारतीय दर्शन

यदि हमें लोकल से ग्लोबल की सोच को साकार करना है, तो उससे पूर्व हमारे युवाओं में विश्व नागरिकता का भाव विकसित करना अनिवार्य है। लोकल से ग्लोबल की हमारी यात्रा केवल व्यापार या आर्थिक विस्तार तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य दुनिया को भारत की समृद्ध ज्ञान परंपराओं और क्षेत्रीय संस्कृतियों से परिचित कराना भी है।

भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक का समन्वय

योग, ध्यान, प्राणायाम, आयुर्वेद, भारतीय दर्शन, पर्यावरणीय संतुलन और संपोष्य विकास पर आधारित हमारा भारतीय दर्शन और चिंतन आज भी कई वैश्विक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करने में सक्षम है। जब हम इन परंपरागत ज्ञान स्रोतों को आधुनिक विज्ञान और तकनीक, जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल नवाचार, के साथ जोड़ते हैं, तो यह वैश्विक स्तर पर अभूतपूर्व नवाचार का मार्ग प्रशस्त करता है।

अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग की आवश्यकता

युवाओं में वैश्विक नागरिकता की समझ विकसित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों के साथ सहयोग बेहद आवश्यक है। ऐसा सहयोग विद्यार्थियों में भारतीय संस्कार और ज्ञान परंपरा की समझ बनाए रखते हुए, उन्हें वैश्विक दृष्टिकोण और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों की गहन समझ विकसित करने में सहायक होगा।

भारतीय सांस्कृतिक दृष्टि और वैश्विक आदान-प्रदान

हमारी सांस्कृतिक परंपरा हमेशा से यह सिखाती रही है कि जहाँ से भी श्रेष्ठ और कल्याणकारी विचार प्राप्त हों, उन्हें बिना किसी भेदभाव के स्वीकार करना चाहिए। ऋग्वेद में कहा गया है—“आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः”, अर्थात्, “सभी दिशाओं से कल्याणकारी विचार हमारे पास आएँ।”

अंतरराष्ट्रीय परिसरों और सहयोग का प्रोत्साहन

यही कारण है कि सरकार अपने शिक्षण संस्थानों को विदेशों में परिसर स्थापित करने और अन्य देशों के उच्च शिक्षण संस्थानों को भारत में परिसर खोलने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। ज्ञान और अनुभव का वास्तविक आदान-प्रदान तभी संभव है जब हम सीमाओं के पार सहयोग करें।

विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान का संरचनात्मक ढांचा

विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025 ने शिक्षा में इस अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर विशेष ध्यान दिया है। इस विधेयक के माध्यम से तीन मौजूदा कानूनों—यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन एक्ट, 1956; ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन एक्ट, 1987; और नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन एक्ट, 1993—को निरस्त कर उन्हें विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान के तहत एक ही आयोग और तीन स्वतंत्र परिषदों के ढांचे में शामिल किया जाना प्रस्तावित है।

तीन प्रमुख परिषदों की भूमिका

अधिष्ठान के अंतर्गत तीन प्रमुख परिषदों का गठन प्रस्तावित है—विकसित भारत शिक्षा विनियमन परिषद (Regulatory Council), विकसित भारत शिक्षा गुणवत्ता परिषद (Accreditation Council) और विकसित भारत शिक्षा मानक परिषद (Standards Council)।

विनियमन, गुणवत्ता और मानकों की व्यवस्था

विनियमन परिषद उच्च शिक्षा संस्थानों के नियमन और नीतियों का निर्धारण करेगी, जिसमें चयनित विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में संचालन की अनुमति देना और उच्च प्रदर्शन वाले भारतीय विश्वविद्यालयों को विदेशों में परिसर स्थापित करने की सुविधा देना शामिल है। साथ ही यह परिषद उच्च शिक्षा के वाणिज्यीकरण को रोकने के लिए नीति बनाएगी। गुणवत्ता परिषद संस्थानों की गुणवत्ता का मूल्यांकन करेगी और उन्हें मान्यता प्रदान करेगी, जबकि मानक परिषद पाठ्यक्रम, शिक्षण-पद्धति, मूल्यांकन और छात्र समर्थन के नवाचार के लिए गैर-बाध्यकारी व्यवस्था सुनिश्चित करेगी।

युवा शक्ति, विकसित भारत और वैश्विक भविष्य

विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान का उद्देश्य केवल उच्च शिक्षा को बेहतर बनाना नहीं है, बल्कि युवाओं में स्थानीय परंपराओं के प्रति गर्व और जुड़ाव की भावना भी पैदा करना है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वैश्विक मानकों के माध्यम से युवाओं के लिए सफलता का मार्ग तैयार करना इस अधिष्ठान का प्रमुख लक्ष्य है।

विकसित भारत @2047 और शिक्षा सुधार

भारत सरकार द्वारा आरंभ की गई मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस जैसी पहलों ने विकसित भारत @2047 के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए मजबूत आधार तैयार किया है। अब यह देखना होगा कि हाल ही में पेश किया गया विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल 2025 अपने लोकल से ग्लोबल के उद्देश्य को कितने प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा पाएगा और भारत को विश्वगुरु बनने की दिशा में कितना मजबूत करेगा। ऐसा लगता है कि इस बिल से शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक और संरचनात्मक बदलाव संभव हैं, जो न केवल आर्थिक और तकनीकी विकास को बल देंगे, बल्कि नवाचार, उच्च शिक्षा में गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी प्रोत्साहित करेंगे। इन परिवर्तनों के माध्यम से हमारा युवा वर्ग वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार होगा और भारत की सांस्कृतिक धरोहर और ज्ञान परंपरा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से प्रस्तुत कर सकेगा।

Topics: Dharmendra PradhanNew Education Policy 2020Viksit Bharat Bill 2025Higher Education ReformGlobal CitizenshipIndian YouthViksit Bharat Shiksha Adhisthan Bill 2025NEP 2020 Higher Education ReformGlobal Citizenship IndiaDharmendra Pradhan Education Bill
प्रो. डी. पी. सिंह
प्रो. डी. पी. सिंह
पूर्व अध्यक्ष, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यू.जी.सी.) [Read more]
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