कोलकाता। भारतीय जनता पार्टी (BJP) पश्चिम बंगाल के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद समिक भट्टाचार्य ने मंगलवार को साल्ट लेक स्थित पार्टी कार्यालय से मीडिया को संबोधित करते हुए राज्य में चल रही मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर राज्य सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए।
समिक भट्टाचार्य ने कहा कि देश के 11 राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया चल रही है, लेकिन केवल पश्चिम बंगाल में ही इसका खुला विरोध किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार शुरू से ही मतदाता सूची की शुद्धि के प्रयासों में बाधा डाल रही है। भाजपा का स्पष्ट मत है कि जनता को त्रुटिरहित और निष्पक्ष मतदाता सूची मिलनी चाहिए और इस मुद्दे पर पार्टी सीधे चुनाव आयोग से बात करेगी।
सोशल मीडिया साइट X दुनियाभर में डाउन… भारत में भी यूजर्स परेशान; क्यों हुआ ऐसा जानिए?
उन्होंने बताया कि 15 जनवरी तक मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और सुधार की प्रक्रिया जारी है। फॉर्म-7 के जरिए मृत मतदाताओं और फर्जी विवरण वाले नाम हटाए जा रहे हैं, लेकिन इस प्रक्रिया में लगातार अड़चनें आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) यह कहकर फॉर्म लेने से इनकार कर रहे हैं कि उन्हें “ऊपर से” कोई निर्देश नहीं मिला है। वहीं, फॉर्म-6 के मामले में लोगों को केवल ऑनलाइन आवेदन करने को कहा जा रहा है। समिक भट्टाचार्य ने सवाल उठाया कि जब ईआरओ और एईआरओ कार्यालयों में भी आवेदन स्वीकार नहीं किए जा रहे, तो यह “ऊपर” कौन है, जो पूरे सिस्टम को नियंत्रित कर रहा है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी और भारत निर्वाचन आयोग से पूछा कि ऐसी व्यवस्था क्यों बनाई गई, जिसमें बीएलओ दबाव में काम कर रहे हैं या विरोध के कारण पीछे हट रहे हैं। एसआईआर की सुचारु और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। उत्तर कोलकाता, दक्षिण कोलकाता, हावड़ा सदर, उत्तर दिनाजपुर, श्रीरामपुर, हुगली, मेदिनीपुर, बांकुड़ा, कूचबिहार, बीरभूम, पुरुलिया और बैरकपुर जैसे इलाकों में इसी तरह की घटनाएं सामने आई हैं, जहां भाजपा कार्यकर्ता विरोध कर रहे हैं। समिक भट्टाचार्य ने दावा किया कि बूथ स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं और जिला राजनीति से जुड़े लोगों ने मतदाता सूची की जांच की है और फर्जी मतदाताओं को शामिल किए जाने के खिलाफ आवाज उठाई है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इसी तरह दोषपूर्ण तरीके से एसआईआर प्रक्रिया चलाई गई, तो भाजपा पश्चिम बंगाल में चुनाव नहीं होने देगी। उन्होंने चुनाव आयोग से समन्वय दुरुस्त करने और प्रक्रिया को सुचारु बनाने की मांग की।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले हो रहे हैं और मुख्यमंत्री भड़काऊ भाषण देकर जनता में भ्रम फैला रही हैं। साथ ही उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि कथित तौर पर हटाए गए 54 लाख नामों में से कितने वास्तव में फर्जी थे और कितने वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। भट्टाचार्य ने कहा कि मुख्यमंत्री कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के इस्तेमाल को लेकर आरोप लगा रही हैं, जबकि उनकी पार्टी स्वयं एसआईआर की निष्पक्ष प्रक्रिया नहीं चाहती। उन्होंने आरोप लगाया कि त्रुटिपूर्ण मतदाता सूची के सहारे चुनाव कराने की कोशिश की जा रही है, जिसे भाजपा स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि सभ्य समाज में इस तरह की कार्यप्रणाली नहीं चल सकती।
उन्होंने बताया कि इस पूरे मामले को लेकर दिल्ली में भी संवाद किया गया है और ज्ञानेश कुमार से पश्चिम बंगाल आकर एसआईआर प्रक्रिया का निरीक्षण करने का अनुरोध किया गया है। उन्होंने कहा कि पहले सत्तारूढ़ दल मतदाताओं को धमकाता था, लेकिन अब यह प्रक्रिया चुनाव आयोग के अधीन है। ऐसे में बीएलओ द्वारा फॉर्म-7 स्वीकार न करना और फॉर्म-6 केवल ऑनलाइन भरने को कहना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी पर सवाल खड़ा करता है। भाजपा ने निष्पक्ष, पारदर्शी और सुचारु चुनावी प्रक्रिया की मांग दोहराई है।

















