वामपंथी राज्य केरल में बड़ा घोटाला हुआ है, जहां राज्य लॉटरी वेलफेयर फंड बोर्ड में करीब 15 करोड़ रुपए का ये घोटाला किया गया है। शुरुआती तौर पर ये खबर सामने आई है कि एक कर्मचारी ने लॉटरी एजेंटों से जमा होने वाले वेलफेयर फंड के पैसे में से 14.93 करोड़ रुपये की हेराफेरी कर ली। यह मामला स्पेशल ऑडिट रिपोर्ट में पकड़ा गया, जो 2013 से 2020 तक के समय की जांच करती है।
क्या हुआ था?
केरल में लॉटरी एजेंट हर महीने कुछ हिस्सा वेलफेयर फंड बोर्ड में जमा करते हैं। यह पैसा एजेंटों और सेलर्स के कल्याण के लिए होता है। इसका इस्तेमाल मदद, बीमारी, या अन्य जरूरतों में किया जाता था। लेकिन बोर्ड के एक क्लर्क संगीत ने यह रकम बोर्ड के बैंक खाते में जमा करने की बजाय अपने और अपने रिश्तेदार के खातों में ट्रांसफर कर दी।
कैसे दिया कृत्य को अंजाम
केरल कौमुदी की रिपोर्ट्स के अनुसार, संगीत ने दस्तावेजों में छेड़छाड़ की, ताकि सालाना ऑडिट में यह बात पकड़ी न जाए। एजेंटों द्वारा दिए गए पैसे सीधे गलत खातों में चले गए, और बाहर से सब कुछ सामान्य दिखता रहा। यह हेराफेरी कई सालों तक चलती रही, जिससे कुल 14.93 करोड़ का नुकसान हुआ। बता दें कि यह वेलफेयर बोर्ड लॉटरी एजेंटों और सेलर्स के लिए बनाया गया है। हर एजेंट या सेलर जो नियमित टिकट खरीदता है, उसका एक छोटा हिस्सा इस फंड में जाता है। इस पैसे से बोर्ड सदस्यों को पेंशन, मेडिकल मदद, शिक्षा या अन्य सुविधाएं देता है। इतनी बड़ी रकम का गबन होने से उन लोगों पर सीधा असर पड़ सकता है जिनके लिए यह फंड बना है।
ऑडिट से हुआ खुलासा
मामले का खुलासा तब हुआ, जब लॉटरी की विशेष ऑडिट में खातों की जांच हुई। पैसे कहां गए, यह ट्रेस होने पर संगीत और उसके रिश्तेदार के खाते सामने आए। रिपोर्ट में साफ लिखा है कि फंड की राशि गलत जगह ट्रांसफर हुई और फर्जी कागजों से इसे छिपाया गया। यह घटना लॉटरी विभाग और वेलफेयर बोर्ड के लिए एक गंभीर मामला है, क्योंकि यह सीधे उन छोटे एजेंटों और सेलर्स के पैसे से जुड़ा है जो रोज मेहनत करके टिकट बेचते हैं। अभी तक रिपोर्ट में आगे की कार्रवाई जैसे सस्पेंशन या एफआईआर का जिक्र नहीं है, लेकिन इतनी बड़ी रकम होने से जांच आगे बढ़ना तय है।











