प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने I-PAC मामले में बड़ा कदम उठाया है। एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य के डीजीपी राजीव कुमार और कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज कुमार के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई है। यह सब इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी (I-PAC) के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जुड़ा है, जो मुख्य रूप से कोयला घोटाले से संबंधित है।
मामला क्या है?
ईडी ने 8 जनवरी 2026 को कोलकाता में I-PAC के दफ्तर और उसके को-फाउंडर प्रतीक जैन (जिन्हें टीएमसी का आईटी हेड भी बताया जा रहा है) के घर पर छापेमारी की थी। यह छापेमारी लगभग 2,742 करोड़ रुपये के कथित कोयला घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच का हिस्सा थी। ईडी का कहना है कि जांच के दौरान राज्य की तरफ से गंभीर बाधा डाली गई।
ईडी के मुख्य आरोप
ईडी ने अपनी याचिका में कहा है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बड़ी संख्या में पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचीं। उन्होंने और अन्य अधिकारियों ने ईडी के अधिकारियों को धमकाया, जांच में रोक लगाई और महत्वपूर्ण सबूत छीन लिए। आरोप है कि फिजिकल दस्तावेज, लैपटॉप, मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक सामग्री जबरन ले जाई गई। एजेंसी का कहना है कि “कानून के रक्षक खुद अपराध में शामिल हो गए” और सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई। ईडी ने यह भी बताया कि जांच पूरी नहीं हो पाई क्योंकि पंचनामा और तलाशी की प्रक्रिया बाधित हुई।
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कोलकाता हाई कोर्ट में भी दायर की गई थी याचिका
ईडी ने पहले कोलकाता हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की थी, जिसमें ममता बनर्जी और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी। लेकिन वहां सुनवाई के दौरान हंगामा हो गया। ईडी का दावा है कि टीएमसी समर्थकों ने कोर्ट में शोर मचाया, व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए प्लानिंग की गई और जज को सुनवाई टालनी पड़ी। इसके बाद ईडी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
याचिका में सीबीआई से जांच कराने की भी मांग की गई है। ईडी ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी कहा कि उसके अधिकारियों के खिलाफ राज्य पुलिस ने प्रतिशोध में कई FIR दर्ज की हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा और जांच में कोई दखल न दिए जाने की गुहार लगाई है।
टीएमसी के लिए चुनावी रणनीति बनाती है I-PAC
I-PAC एक पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म है, जो तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनावी रणनीति बनाती है। ईडी की कार्रवाई को ममता बनर्जी ने छापेमारी के दौरान मौके पर जाकर कहा था कि यह राजनीतिक बदले की कार्रवाई है और केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग हो रहा है। मामले में राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल किया है, ताकि कोई फैसला उनके पक्ष सुने बिना न आए। वहीं ईडी ने जब्त सामग्री को सील करके फॉरेंसिक जांच की मांग भी की है।











