अपने देश, संस्कृति और धर्म के लिये जीवन जीने की अनुभूति, संघर्ष और मृत्युंजयी स्वभाव का साक्षात् दर्शन प्रभास क्षेत्र में स्थित सोमनाथ मंदिर है। महान संस्कृति और महान पूर्वजों को मात्र पुस्तकों में नहीं पढ़ा जा सकता, उनका साक्षात्कार नई पीढ़ी को कराने का जीवंत गुरुकुल, सोमनाथ मंदिर है।
स्वाभिमान की सौराष्ट्र गाथा
चन्द्रदेव की तपस्या, आशुतोष भगवान सोमनाथ की कृपा, सौराष्ट्र के तलवार रास का ओज और तेज हिन्दू जाति के स्वाभिमान को प्रखरता प्रदान बढ़ा रहा है। सोमनाथ की रक्षा के लिये हम्मीर गोविल की वेगडा भील के साथ साके की अमर गाथा, अपना सर्वस्व न्योछावर करने की हमारी परंपरा का स्मरण करा रही है। सौराष्ट्र के सांस्कृतिक इतिहास के पृष्ठों में आज भी दुर्लभदेव-देवायत बोदर और अहिराणी की पुकार सुनाई दे रही है। पास जाकर सुनने पर अपने पति देवायत बोदर ने जिस पुत्र को देश के लिये स्वयं अपने हाथ से बलिदान कर दिया, उस पुत्र की आँखें निकाल कर, उन आँखों पर चलती अहिराणी की लोरियाँ सुनाई दे रही है। इन लोरियों में ही सोमनाथ की भक्ति और मंत्र छिपे थे, क्योंकि राव नवधण को बचाने के लिये देवायत बोदर और अहिराणी अपने पुत्र को बलिवेदी पर चढ़ाने में तनिक भी पीछे नहीं हटे। अहीर के आसरे में सुरक्षित रहा राव नवघण प्रतीक्षा कर रहा है, भीमदेव के साथ रणभूमि में गजनी के अमीर से लड़ने को, सोमनाथ की रक्षा में अपने आप को समाप्त करके हिन्दू जाति के सम्मान को सुरक्षित रखने को।
जय सोमनाथ
सैकड़ों वर्षों से इतिहास में भूलाये जा रहे राव नवघण, देवायत बोदर और अहिराणी आज सोमनाथ के मंदिर की नींव बने हुए हैं। अहिराणी और अहीर के आसरे के मार्मिक और रोंगटे खड़े करने वाले प्रसंगों को समुद्र से आती तेज हवायें बार-बार याद दिलाती हैं। लोहकोट के समर्पण के बाद भी सोमनाथ की रक्षा के लिये अपने पूरे कुल के साथ साका करने निकल रहे और गढ़वी को गढ़ और नंदीदत्त को अंत:पुर का दायित्व दे रहे, मरूस्थली के घोघाबापा की एक-एक श्वास सोमनाथ के स्वाभिमान की रक्षा कर रही है। अपने ही हाथों अंत:पुर में सोमनाथ के लिये होम हुए वीरों की राजवधुओं को सतीत्व प्रदान कर रहे नंदीदत्त सोमनाथ के शृंगार को तेजस्विता प्रदान कर रहे हैं। धर्मगजदेव के हाथों अमीर की हार और सोठल के धोखे से धर्मगजदेव का बलिदान सोमनाथ की प्राचीरों में अंकित है। सोमनाथ की रक्षा के लिये भीमदेव के साथ रणभूमि में गजनी के अमीर से लड़ रहे बालुकाराय, विमलदेव और राव नवधण ने सोमनाथ के स्वाभिमान को जीवित रखा। सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के लिये भीमदेव को बचाने की संघर्ष गाथा…बार बार आक्रमणों के बाद भी पुनर्निर्माण की मृत्युंजयी गाथा… सोमनाथ की भव्य और दिव्य आरती मंदिर रक्षा के लिये बलिदान हुए लाखों भक्तों की आरती है। जय सोमनाथ

















