बांग्लादेश: अपनी ही भूमि पर प्रताड़ित होते हिन्दू और भारत के विमर्श में सन्नाटा
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बांग्लादेश: अपनी ही भूमि पर प्रताड़ित होते हिन्दू और भारत के विमर्श में सन्नाटा

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा
Jan 10, 2026, 01:47 pm IST
inविश्लेषण
बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू दास की हत्या के बाद शव को पेड़ में टांगकर जला दिया गया। कट्टरपंथी मुस्लिमों के निशाने पर हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदाय हैं।

बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू दास की हत्या के बाद शव को पेड़ में टांगकर जला दिया गया। कट्टरपंथी मुस्लिमों के निशाने पर हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदाय हैं।

बांग्लादेश, जिसकी पहचान उस भाषा के आधार पर है, जिसकी जड़ें भारत में हैं और जहां अभी भी बांग्ला बोलने वाले हिन्दू रहते हैं, वे अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। यह लड़ाई वर्ष 1906 में मुस्लिम लीग की स्थापना के साथ आरंभ हुई थी, परंतु अब वह शेष बचे हिंदुओं की हत्याओं के साथ अपने अंतिम चरण में है।

बांग्लादेश में हिंदुओं की लगातार हत्याएं अब आम हो गई हैं। यह कहा जा रहा है कि ये हत्याएं दरअसल मोहम्मद यूनुस को बदनाम करने के लिए की जा रही हैं, परंतु ऐसा प्रतीत होता नहीं है। यदि मोहम्मद यूनुस को बदनाम करने के लिए यह सब हो रहा होता तो उसके शिकार कट्टरपंथी भी होते। उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की हिंसा में बांग्लादेश में हिंदुओं का जीना मुश्किल कर दिया है।

हिंदुओं की हत्या महिलाओं का बलात्कार

हिंदुओं की हत्याएं हो रही हैं, महिलाओं का बलात्कार हो रहा है, मगर इन तमाम घटनाओं पर लगातार एक अजीब सी चुप्पी है। हाल ही में न्यूयॉर्क में नवनिर्वाचित मेयर मामदानी को भारत में उमर खालिद का जेल में होना दिख जाता है, जबकि उमर खालिद की भूमिका दिल्ली को दहलाने में कितनी थी, यह किसी से छिपा नहीं है और यही कारण है कि भारत की सर्वोच्च अदालत ने उसे जमानत नहीं दी है। भारत में उमर खालिद को लेकर साथ ही वेनेजुएला की चर्चा है, मगर बांग्लादेश में अपनी ही भूमि पर तरसते हिंदुओं पर चर्चा नहीं है। भारत में उमर खालिद पर लगातार लेख आ रहे हैं। ऐसा प्रचारित किया जा रहा है कि जैसे किसी क्रांतिकारी को ही जेल में बिना बात के डाला हुआ है। उमर खालिद की आड़ में बांग्लादेश में चल रहे हिंदुओं के निरंतर विनाश को जैसे कवर किया जा रहा हो।

बांग्लादेश के हिंदू भारत का मामला हैं

यह नहीं कहा जा सकता है कि बांग्लादेश के हिन्दू भारत का मामला नहीं हैं। बांग्लादेश के हिन्दू भारत का मामला हैं, क्योंकि वे जिस धार्मिक पहचान को लेकर चल रहे हैं, उसकी जड़ें भारत में ही हैं। वे हिन्दू होने के नाते भारत को ही बसाकर चल रहे हैं और जब वे भारत को लेकर चल रहे हैं, तो यह स्वाभाविक है कि भारत को हरसंभव तरीके से उनपर ध्यान देना चाहिए।

गाजा दिखता है पर बांग्लादेश के हिंदू नहीं

भारत में एक बहुत ही बड़ा वर्ग है, जिसे गाजा की घटनाएं तो दिखती हैं, लेकिन उसे यह नहीं दिखाई देता है कि कैसे बांग्लादेश और पाकिस्तान में हिंदुओं को मारा जा रहा है। वे लोग गाजा को लेकर कहते हैं कि इजरायल वहां के स्वाभाविक नागरिकों की हत्याएं कर रहा है, मगर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में वहां के मूल और स्वाभाविक नागरिकों को तमाम अधिकारों से वंचित करने के साथ ही उन्हें उनकी भूमि से ही वंचित कर दिया गया है, इस पर बात करने से वे लोग कतराते हैं।

भूमि का नाम बदलने से भी पहचान नहीं बदलती

देवों की भूमि भारत, देखते ही देखते कई टुकड़ों में बंट गया, क्योंकि यहां किसी वर्ग विशेष की जनसंख्या बढ़ी और उन्होंने अपनी मजहबी पहचान के आधार पर इस भूमि के टुकड़े करवा दिए। भूमि की पहचान जो पहले सिंधु देश, भारत हुआ करती थी। वह पाकिस्तान और बांग्लादेश में बदल गई। परंतु नाम बदलने से पहचान नहीं बदलती है। भूमि अपना इतिहास लेकर आगे बढ़ती है, वह अपने चेतना को समेटे हुए होती है और वही उसके नागरिकों के हस्तांतरित होती रहती है। हिंसा तब होती है, जब आरोपित पहचान भूमि की स्वाभाविक पहचान को समाप्त कर देना चाहती है, जैसा कि अभी बांग्लादेश में हो रहा है।

ढाकेश्वरी देवी से बंग भूमि की पहचान

बंग भूमि की पहचान ढाकेश्वरी देवी से है, और उस पहचान का बोध निरंतर वहां के हिन्दू उन मुस्लिमों को करा रहे हैं, जो अपनी पहचान 1906 के बाद बनी मुस्लिम लीग के साथ जोड़ते हैं। और अपनी ही हिन्दू जड़ों से नफरत करते हैं, इसलिए राजनीतिक संघर्ष हो या कुछ और, हिन्दू ही उनके निशाने पर रहते हैं। उनके निशाने पर वह हिन्दू पहचान रहती है, जिससे अलग होने की मांग राजनीतिक रूप से सबसे पहले ढाका में ही की गई थी। हिंदुओं के साथ बांग्लादेश में जो हो रहा है, उसे इसी से समझा जा सकता है।

उमर खालिद को इतिहासकार बनाने की कवायद

हाल ही के दिनों में भारत में उमर खालिद को इतिहासकार कहने की भी प्रवृत्ति हो गई है। कथित इतिहासकार रामचन्द्र गुहा ने स्क्रॉल पर एक लेख में उमर खालिद को इतिहासकार कहा है और उसकी थीसिस को ऐसी शानदार थीसिस कहा है, जो हाल ही के दिनों में उन्होंने किसी भारतीय की पढ़ी है। मगर इतिहासकार होने के बाद भी वे यह नहीं समझ पा रहे हैं कि भूमि का भी इतिहास होता है और भारत भूमि का इतिहास ही बांग्लादेश और पाकिस्तान का इतिहास है। उमर खालिद जिस पहचान को समाप्त करना चाहता है, वही भारत की असली पहचान है और उसी पहचान को बांग्लादेश के जिहादी नष्ट करना चाहते हैं।

 

 

 

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