दिल्ली के साकेत कोर्ट परिसर में एक दर्दनाक हादसा हुआ। कोर्ट में काम करने वाले एक कर्मचारी ने इमारत से कूदकर अपनी जान दे दी। ये घटना 8 जनवरी 2026 को हुई। मृतक का नाम हरीश था, जो कोर्ट स्टाफ का हिस्सा था।
क्या है पूरा मामला
बताया जाता है कि हरीश ने कोर्ट की एक बिल्डिंग से छलांग लगा दी। वो कोर्ट नंबर 511 के पास वाली इमारत से कूदा। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लिया और पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है, लेकिन अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया। हालांकि घटना स्थल से पुलिस को हरीश के पास ही एक सुसाइड नोट मिला। इसमें उसने साफ लिखा कि वो ऑफिस के काम के दबाव की वजह से ये कदम उठा रहा है। उसने ये भी कहा कि किसी को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाए। हरीश 60% दिव्यांग था और नौकरी उसके लिए बहुत मुश्किल हो गई थी। नोट में उसने बताया कि वो लंबे समय से मानसिक तनाव में था, नींद नहीं आती थी और ज्यादा सोचने की आदत हो गई थी।
उसने ये लिखा कि अहलमद बनने के बाद से उसके दिमाग में खुदकुशी के ख्याल आने लगे थे। वो इन्हें कंट्रोल करने की कोशिश करता रहा, लेकिन हार गया। साथ ही, जल्दी रिटायरमेंट लेने पर भी पेंशन या सेविंग्स 60 साल की उम्र तक मिलती, इसलिए उसके पास और कोई रास्ता नहीं बचा। नोट के आखिर में हरीश ने हाई कोर्ट से अपील की कि दिव्यांग लोगों के साथ नरमी बरती जाए, ताकि आगे कोई ऐसा दर्द न झेले।
कोर्ट स्टाफ और वकीलों की प्रतिक्रिया
इस घटना के बाद कोर्ट के कर्मचारियों में गुस्सा फैल गया। कई स्टाफ मेंबर्स ने परिसर में धरना दिया और सिस्टम में सुधार की मांग की। वो बोले कि काम का बोझ इतना ज्यादा है कि दिव्यांग व्यक्ति कैसे संभाले। वकीलों ने भी प्रदर्शन में साथ दिया और “जस्टिस फॉर हरीश” के नारे लगाए। साकेत कोर्ट बार एसोसिएशन ने हरीश के निधन पर गहरा दुख जताया।











