तेजी से बदलते भू राजनीतिक परिदृश्य के बीच भारतीय विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर फ्रांस दौरे पर पहुंचे हैं। इस दौरान उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत-फ्रांस की मजबूत रणनीतिक साझेदारी पर जोर दिया और दुनिया के मौजूदा हालात पर खुलकर बात की। जयशंकर ने इस मुलाकात के बारे में एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट किया।
उन्होंने लिखा, “आज फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मिलकर बहुत खुशी हुई। मैंने पीएम मोदी की तरफ से उनकी गर्मजोशी भरी शुभकामनाएं पहुंचाईं। उनकी मौजूदा वैश्विक मुद्दों पर राय और हमारी स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के प्रति सकारात्मक नजरिए की बहुत कद्र करता हूं।”
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच यह रिश्ता काफी पुराना और भरोसेमंद वाला है। इससे पहले उसी दिन जयशंकर ने पेरिस में फ्रांस की एम्बेसडर्स कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। उन्होंने दुनिया में हो रहे बड़े बदलावों पर बात की, जैसे कि व्यापार, फाइनेंस, टेक्नोलॉजी, एनर्जी, संसाधन और कनेक्टिविटी में बड़े शिफ्ट। उनका कहना था कि इन बदलावों में सबसे अहम चीज है लोगों की सोच में बदलाव। साथ ही भारत-फ्रांस की पार्टनरशिप मल्टी-पोलारिटी (बहु-ध्रुवीय दुनिया) और स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी (रणनीतिक स्वायत्तता) को बढ़ावा देने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
भारत-यूरोप के रिश्तों पर बात
इस यात्रा का एक बड़ा हिस्सा भारत-यूरोप के रिश्तों को और मजबूत करने पर केंद्रित रहा। बुधवार को जयशंकर ने फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारोट से भी मुलाकात की। दोनों ने द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने, भारत-यूरोपीय संघ के जुड़ाव को ऊंचा करने और वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। फ्रांस को भारत का सबसे पुराना स्ट्रैटेजिक पार्टनर माना जाता है, खासकर यूरोप में। दोनों देश मिलकर वैश्विक मंच पर सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं और मल्टी-पोलारिटी को सपोर्ट करते हैं।
मैक्रों ने भी इस दौरान एक अहम बात कही। उन्होंने डिप्लोमैटिक कोर को संबोधित करते हुए बताया कि अगले महीने वे भारत आएंगे। न्यू दिल्ली में AI इम्पैक्ट समिट होने वाला है, और मैक्रों उसमें हिस्सा लेंगे। यह समिट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभावों पर फोकस करेगा, और फ्रांस-भारत के बीच टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में सहयोग को और बढ़ावा देगा।
जयशंकर की यह फ्रांस यात्रा ऐसे समय में हुई है जब दुनिया में काफी अनिश्चितता है। वैश्विक राजनीति और इकोनॉमी में स्थिरता लाने के लिए भारत और यूरोप (खासकर फ्रांस) के साथ मिलकर काम करना जरूरी हो गया है। आने वाले हफ्तों में भारत में जर्मन चांसलर और यूरोपीय संघ के टॉप लीडर्स भी आने वाले हैं, जो दिखाता है कि भारत यूरोप के साथ अपने रिश्तों को कितना अहमियत दे रहा है।














