अमेरिका से भारत पर 500 फीसदी टैरिफ का खतरा मंडरा रहा है? ये सवाल इन दिनों सुर्खियों में है। दरअसल, अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने दावा किया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बाइपार्टिसन बिल को मंजूरी दे दी है, जिसमें रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने का प्रावधान है।
बिल का मुख्य मकसद क्या है?
ये बिल रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रूस की अर्थव्यवस्था को सपोर्ट करने वालों पर नकेल कसने के लिए लाया जा रहा है। ग्राहम के मुताबिक, जो देश रूसी क्रूड ऑयल खरीदकर पुतिन की “वार मशीन” को ईंधन दे रहे हैं, उन्हें सजा मिलनी चाहिए। इसमें 500 फीसदी तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। ये टैरिफ अमेरिका में उन देशों की एक्सपोर्टेड गुड्स पर लगेगा, जो रूस से तेल खरीदते रहेंगे।
निशाने पर BRICS
ग्राहम ने स्पष्ट कहा कि भारत, चीन और ब्राजील जैसे देश इस बिल के दायरे में आएंगे। वजह साफ है – ये देश रूस से काफी मात्रा में सस्ता तेल खरीद रहे हैं। भारत के लिए ये खासा बड़ा मुद्दा है, क्योंकि पिछले सालों में रूसी क्रूड भारत की रिफाइनरियों के लिए बड़ा सोर्स बना हुआ है। दिसंबर 2025 में भारत ने करीब 12 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी तेल आयात किया, जो नवंबर के 18.4 लाख बैरल से कम है। ये आंकड़े केप्लर डेटा से आए हैं। रिलायंस जैसी कंपनियां भी अब रूसी तेल कम ले रही हैं।
ट्रंप ने क्या कहा और कब मंजूरी दी?
ग्राहम ने बताया कि ट्रंप के साथ उनकी लंबी बातचीत हुई, जिसमें उन्होंने ये बिल ग्रीनलाइट कर दिया। ट्रंप ने कहा कि रूस पर लगे प्रतिबंधों से मॉस्को को भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने भारत का भी जिक्र किया और कहा कि रूस से व्यापार करने वालों पर दबाव बनाना जरूरी है। ट्रंप ने पहले भी कई बार चेतावनी दी थी कि अगर भारत रूसी तेल खरीदना नहीं रोकेगा, तो टैरिफ बढ़ाए जा सकते हैं। जनवरी 2026 की शुरुआत में ट्रंप ने कहा था, “वे (भारत) मुझे खुश करना चाहते थे। हम उन पर टैरिफ बहुत जल्दी बढ़ा सकते हैं।”
अभी क्या स्थिति है?
ग्राहम का कहना है कि बिल पर वोटिंग अगले हफ्ते हो सकती है। अगर पास हो गया, तो राष्ट्रपति को अधिकार मिल जाएगा कि वो ऐसे देशों पर एक्शन लें। फिलहाल भारत ने रूसी तेल की खरीद काफी कम कर दी है। ग्राहम ने दावा किया कि भारतीय राजदूत विनय क्वात्रा ने उनसे बात की और बताया कि नई दिल्ली रूसी क्रूड कम कर रही है। राजदूत ने अनुरोध भी किया कि ट्रंप को इसकी जानकारी दी जाए, ताकि भारतीय गुड्स पर टैरिफ कम हो सके।
पिछले साल अमेरिका ने भारत पर पहले 25 फीसदी और फिर अतिरिक्त टैरिफ लगाकर कुल 50 फीसदी तक पहुंचा दिया था, ठीक रूसी तेल खरीद के कारण। अब ये नया बिल उस दबाव को और बढ़ा सकता है।















