बांग्लादेश में हिन्दुओं पर अत्याचार थमने का नाम नहीं ले रहे हैं, आएदिन वहां हिन्दू महिलाओं, पुरुषों और बच्चों को चुन—चुनकर निशाना बनाया जा रहा है। एक छुटभैए इस्लामवादी ‘छात्र नेता’ ने गला फाड़—फाड़कर कहा था कि ‘अगर हम भारत के उत्पाद प्रयोग करना छोड़ दें तो भारत घुटनों पर आ जाएगा।’ लेकिन शायद आम बांग्लादेशियों को नहीं पता कि बांग्लादेश भारत से सबसे सस्ते दाम में चावल खरीदता आ रहा है। अभी गत दिसम्बर माह में ही उसने भारत से 50 हजार टन चावल खरीदने का फैसला किया है, 355 डॉलर प्रति टन के हिसाब से। डीजल तो वह पिछले कई साल से भारत से ही ले रहा है।
वहां के प्रसिद्ध अखबार डेली स्टार ने लिखा है कि, यूं तो बांग्लादेश पाकिस्तान और विएतनाम से भी चावल लेता है लेकिन वे दोनों देश उससे कहीं ज्यादा कीमत वसूलते हैं और यह बात बांग्लादेश के सरकारी व्यापार अधिकारियों तक ने स्वीकारी है कि ‘भारत चावल की सबसे कम कीमत लगाता है इसलिए वहां से चावल लेने में हमें फायदा है।’ अब ताजा जानकारी के अनुसार, बांग्लादेश ने भारत से 180,000 टन डीजल लेने का सौदा किया है। यह डीजल जनवरी से दिसम्बर 2026 के बीच लिया जाएगा।
इस सौदे के तहत बांग्लादेश भारतीय सरकारी कंपनी नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड से 14.62 अरब टका (1,462 करोड़ रुपए) की लागत से 180,000 टन डीजल आयात करेगा। बांग्लादेश की सरकारी कंपनी बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लागत के एक हिस्से का भुगतान करेगी, जबकि बाकी राशि बैंक लोन से आएगी।
वित्त सलाहकार सालेहुद्दीन अहमद की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में नुमालीगढ़ रिफाइनरी से इस डीजल के आयात के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है। इससे पहले, पिछले साल 22 अक्तूबर को आर्थिक मामलों की सलाहकार समिति ने 2026 में बांग्लादेश पेट्रोलियम कार्पोरेशन के लिए रिफाइंड ईंधन तेल के आयात को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। उस फैसले के अनुसार, खरीद समिति ने अब विशेष रूप से नुमालीगढ़ से डीजल आयात करने के प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया है।

सूत्रों ने बताया है कि इस आयात की लागत ऑयल इंडिया लिमिटेड की सहायक कंपनी नुमालीगढ़ के साथ बातचीत के आधार पर तय की गई है। कुल लागत 119.133216 मिलियन डॉलर या बांग्लादेशी मुद्रा में लगभग 14.62 अरग टका (1,461.76 करोड़ रु.) तय की गई है। प्रति बैरल डीजल का प्रीमियम 5.50 डॉलर तय किया गया है, जबकि आधार मूल्य 83.22 डॉलर तय हुआ है।
यहां बता दें कि आधार मूल्य अंतरराष्ट्रीय बाजार दरों के अनुसार तय किया जाता है और आयात अनुबंध और वैश्विक बाज़ार के उतार-चढ़ाव के अनुसार बदलता रहता है। यह कोई निश्चित मूल्य नहीं है, बल्कि यह बाजार की स्थितियों के आधार पर बढ़ या घट सकता है।
दरअसल नुमालीगढ़ रिफाइनरी से बांग्लादेश यह डीजल 15 साल के दीर्घकालिक समझौते के तहत आयात करने जा रहा है। आयात प्रक्रिया पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान हस्ताक्षर हुए अनुबंध के हिस्से के तौर पर जारी रखी गई है।
नुमालीगढ़ रिफाइनरी भारत के असम राज्य में है। वहां से, डीजल को लगभग 60 किलोमीटर दूर पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में कंपनी के मार्केटिंग टर्मिनल तक पहुंचाया जाता है। उस टर्मिनल से डीजल बांग्लादेश पेट्रोलियम कंपनी के पार्वतीपुर डिपो में भेजा जाता है। जनवरी 2016 से डीजल काफी वक्त से ट्रेन से ट्रांसपोर्ट किया जा रहा था।
दोनों देशों के बीच ईंधन ट्रांसपोर्ट को आसान बनाने और लागत कम करने के लिए, बांग्लादेश-भारत मैत्री पाइपलाइन बनाई गई थी। भारतीय फंडिंग से बनी 130 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन का निर्माण 12 दिसंबर 2022 को पूरा हुआ था। अब इस पाइपलाइन के जरिए डीजल ट्रांसपोर्ट किया जा रहा है। इसके अलावा, मार्च 2024 से ढाका में नुमालीगढ़ रिफाइनरी का एक संपर्क कार्यालय भी काम कर रहा है।
ध्यान रहे, यह वही बांग्लादेश है जिसमें बैठे इस्लामवादी 5 अगस्त 2024 के बाद से भारत और हिन्दुओं को लेकर जहर उगल रहे हैं, हिन्दुओं की सरेआम हत्याएं कर रहे हैं। लेकिन यूनुस सरकार भारत की महत्ता जानती है इसलिए बीच बीच में बयान देती है कि भारत से संबंधों को सुधारने पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है। सच ही है कि, इस वक्त वहां के राजनीतिक उथलपुथल से भरे वातावरण के चलते दोनों देशों के बीच संबंध सबसे तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं।

















