बिहार की नुसरत परवीन इन दिनों फिर सुर्खियों में है। वजह है उसका हाल ही में अपने जॉब पर लौटना। कुछ महीने पहले हिजाब को लेकर मचे बवाल के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ी थी। लेकिन अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी में उन्होंने दोबारा अपनी ड्यूटी जॉइन की, जिससे पूरा मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। खास बात ये है नुसरत ने 23 दिनों के बाद ही अपनी नौकरी ज्वाइन कर ली थी।
कौन हैं नुसरत परवीन?
नुसरत परवीन बिहार के औरंगाबाद जिले की रहने वाली हैं और शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं। वे एक मुस्लिम महिला हैं, जो हमेशा हिजाब पहनती हैं। पिछले साल जब उन्होंने सरकारी कार्यक्रम में हिजाब पहनकर हिस्सा लिया, तो कुछ लोगों ने ऐतराज जताया था। सवाल उठे कि सरकारी ड्रेस कोड में हिजाब क्यों? इसी विवाद के बीच मामला मीडिया में फैल गया और उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ी।
हिजाब विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
दरअसल, नुसरत परवीन जिस स्कूल में काम करती थी, वहाँ एक आधिकारिक कार्यक्रम था। उन्होंने परंपरा के अनुसार हिजाब पहन रखा था, लेकिन कुछ स्थानीय अधिकारियों ने इस पर आपत्ति जताई। इस बात को लेकर माहौल गरम हो गया। सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर बहस छिड़ गई — कुछ लोगों ने उनका समर्थन किया, तो कुछ ने सरकारी दफ्तरों में धार्मिक प्रतीक पहनने पर सवाल उठाए। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि किसी को भी अपनी धार्मिक पहचान बनाए रखने का अधिकार है — चाहे वह दफ्तर हो या कोई सार्वजनिक मंच, जब तक वह अनुशासन का उल्लंघन न करे। इसके बाद शिक्षा विभाग ने भी नुसरत को दोबारा बहाल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
नुसरत की जॉइनिंग और लोगों की प्रतिक्रिया
बीते दिनों एक समारोह में जब नुसरत ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी में दोबारा अपनी नौकरी जॉइन की, तो इसे एक नई शुरुआत माना गया। मंच पर मुख्यमंत्री ने खुद उनका स्वागत किया और कहा कि “बिहार में हर महिला को बराबर सम्मान और स्वतंत्रता का अधिकार है।” इस मौके पर नुसरत ने भी कहा कि उन्हें कभी उम्मीद नहीं थी कि वे इतनी जल्दी वापस लौट पाएंगी। उन्होंने सीएम को धन्यवाद देते हुए कहा कि अब वे और ज्यादा मेहनत से काम करेंगी।
करीब सालभर के विवाद के बाद नुसरत परवीन की यह वापसी समाज और प्रशासन, दोनों के लिए एक मिसाल बन गई है — कि व्यक्तिगत आस्था और पेशेवर जिम्मेदारी, दोनों को साथ लेकर चला जा सकता है।

















