उमर खालिद-शरजील इमाम की जमानत खारिज होने पर भड़के वामपंथियों ने JNU में लगाए 'मोदी-शाह कब्र खुदेगी' के नारे
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उमर खालिद-शरजील इमाम की जमानत खारिज होने पर भड़के वामपंथियों ने JNU में लगाए ‘मोदी-शाह कब्र खुदेगी’ के नारे

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगा साजिश केस में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत खारिज कर दी। JNU में विरोध प्रदर्शन के दौरान 'मोदी-शाह तेरी कब्र खुदेगी' नारे लगे। कोर्ट ने दोनों की भूमिका गंभीर बताई।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Jan 6, 2026, 12:10 pm IST
in भारत
jnu anti modi shah slogan

जेएनयू में लगे मोदी विरोधी नारे

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों के मुख्य साजिशकर्ता उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी, जिससे वामपंथियों में ऐसा गुस्सा फैला कि वे अपना असली रंग दिखा बैठे। वामपंथ की गढ़ मानी जाने वाली जेएनयू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की हत्या के नारे लगाए गए। वाम पंथियों ने “मोदी-शाह तेरी कब्र खुदेगी, जेएनयू की धरती पर” के नारे लगाए।

कोर्ट का फैसला क्या था?

सुप्रीम कोर्ट की बेंच (जस्टिस अरविंद कुमार और एन.वी. अंजारिया) ने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम की भूमिका बाकी आरोपियों से अलग और ज्यादा गंभीर है। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि इन दोनों ने साजिश में केंद्रीय और निर्णायक भूमिका निभाई। प्लानिंग, लोगों को जुटाना और रणनीति बनाने में इनका हाथ दिखता है। इसलिए इनकी जमानत याचिका खारिज की गई। कोर्ट ने साफ कहा कि ट्रायल में देरी को “ट्रंप कार्ड” की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। जमानत मिलना यह नहीं मानता कि आरोप कमजोर हो गए हैं। उमर खालिद और शरजील इमाम अब एक साल तक नई जमानत याचिका नहीं दाखिल कर सकेंगे। संरक्षित गवाहों और प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही पूरी होने तक जमानत मुश्किल।

दोनों पिछले पांच साल से ज्यादा समय से तिहाड़ जेल में बंद हैं। उमर खालिद 13 सितंबर 2020 से और शरजील इमाम 28 जनवरी 2020 से हिरासत में हैं। मामला UAPA के तहत है, जिसमें दिल्ली दंगों के पीछे “बड़ी साजिश” का आरोप है।

जेएनयू में क्या हुआ?

फैसले के बाद जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में छात्रों ने जोरदार विरोध जताया। कैंपस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारे लगे। एक वायरल वीडियो में सुनाई दिया – “मोदी-शाह तेरी कब्र खुदेगी, जेएनयू की धरती पर”। कुछ नारों में गौतम अडानी का भी जिक्र था। यह प्रदर्शन उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत न मिलने के गुस्से में हुआ। साथ ही, 2020 के जेएनयू हमले की छठी बरसी भी थी।

अलग-अलग पक्षों की प्रतिक्रिया

बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इसे “टुकड़े इकोसिस्टम” का काम बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे नारे भारत-विरोधी ताकतों से आते हैं। पूनावाला ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा कि ऐसे लोगों का बचाव करने वाले अब पीएम और गृह मंत्री को धमकी दे रहे हैं। एबीवीपी के उपाध्यक्ष मनीष चौधरी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि जेएनयू में ऐसी नारेबाजी आम हो गई है।

दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने नारों को निंदनीय बताया। उनका कहना था कि पीएम और गृह मंत्री की नीतियों पर बोल सकते हैं, लेकिन देश के खिलाफ जाकर धमकी देना गलत है। कुछ कांग्रेस नेताओं ने फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण कहा और उमर-शरजील के साथ अन्याय बताया।

मामला कैसे शुरू हुआ?

यह पूरा मामला फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्व दिल्ली दंगों से जुड़ा है, जिसमें 53 लोगों की जान गई और सैकड़ों घायल हुए। पुलिस का आरोप है कि CAA-NRC विरोध के नाम पर भड़काऊ भाषण और चक्का जाम जैसे प्लान से दंगे भड़के। उमर खालिद और शरजील इमाम पर मुख्य साजिशकर्ता होने का आरोप है। शरजील के कुछ वीडियो में असम को अलग करने जैसी बातें और दिल्ली को लकवाग्रस्त करने की योजना बताई गई। उमर खालिद पर भी पुराने जेएनयू प्रोटेस्ट (2016) के “टुकड़े-टुकड़े” नारे से जोड़कर सबूत पेश किए गए। ट्रायल अभी चल रहा है, और कोर्ट ने कहा कि हर आरोपी की भूमिका अलग-अलग देखनी होगी। पांच अन्य आरोपियों को 11-12 शर्तों के साथ जमानत मिली, क्योंकि उनकी भूमिका सहायक या सीमित मानी गई।

Topics: जेएनयू भड़काऊ नारेजेएनयू मोदी-शाह विरोधी नारेशरजील इमाम जमानतमोदी शाह कब्र खुदेगीJNU provocative slogansदिल्ली दंगाJNU anti-Modi-Shah slogansDelhi RiotsSharjeel Imam bailSupreme Court decisionModi-Shah's grave will be dugसुप्रीम कोर्ट फैसलाउमर खालिद जमानतUmar Khalid bail
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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