डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले साल में ही कई देशों पर सैन्य हमले करवाए हैं। वे खुद को शांतिदूत कहते हैं, शांति का नोबल भी चाहते हैं। लेकिन, आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका ने 20 जनवरी 2025 के बाद से विदेशी जमीन पर कुल 622 बम गिराए। ये हमले ज्यादातर ड्रोन और हवाई जहाजों से हुए। आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट लोकेशन एंड इवेंट डेटा प्रोजेक्ट के अनुसार, इनमें सात मुख्य देश शामिल हैं—वेनेजुएला, सीरिया, नाइजीरिया, ईरान, सोमालिया, यमन और इराक। इन कार्रवाइयों में सैकड़ों लोग मारे गए, जिसमें आम नागरिक भी शामिल हैं।
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने कई बार दावा किया कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान जैसे संघर्षों को रोका, लेकिन भारत ने इसे खारिज कर दिया। फिर भी कुछ देशों ने उनका समर्थन किया। अब इन हमलों की वजह से दुनिया में तनाव बढ़ा हुआ है। आइए इन देशों के बारे में थोड़ा विस्तार से जानते हैं।
वेनेजुएला
वेनेजुएला पर अमेरिका लंबे समय से नकेल कस रहा था। 2025 में ज्यादातर हमले वहां की नावों और तेल टैंकरों पर हुए, जिन्हें ड्रग तस्करी से जोड़ा गया। लेकिन 3 जनवरी 2026 को सबसे बड़ा हमला हुआ। अमेरिकी सेना ने राजधानी काराकास पर भारी बमबारी की। एयरपोर्ट, बंदरगाह और सैन्य ठिकाने तबाह हो गए। राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़कर न्यूयॉर्क ले जाया गया। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अस्थायी रूप से वहां का शासन संभालेगा और तेल संसाधनों का इस्तेमाल करेगा। इस ऑपरेशन को ‘एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ नाम दिया गया, जिसमें 150 से ज्यादा विमानों ने हिस्सा लिया।
सीरिया
सीरिया में अमेरिकी हमले आईएसआईएस से जुड़े थे। दिसंबर 2025 में पल्मायरा में दो अमेरिकी सैनिक और एक अनुवादक की हत्या हुई, जिसका आरोप आईएसआईएस पर लगा। जवाब में अमेरिका ने 70 ठिकानों पर भारी बमबारी की। ये कार्रवाई आईएसआईएस के बचे हुए सदस्यों को कमजोर करने के लिए की गई।
नाइजीरिया
नाइजीरिया पर हमला ईसाइयों पर अत्याचार के आरोप में हुआ। अमेरिका ने वहां की सरकार को चेतावनी दी कि अगर कदम नहीं उठाए तो हमला होगा। दिसंबर 2025 में हमला हुआ और आईएसआईएस से जुड़े कई आतंकी मारे गए। लेकिन ये कार्रवाई ज्यादा असरदार नहीं रही, क्योंकि वहां संप्रदायिक हिंसा जारी है।
ईरान
ईरान पर जून 2025 में हमला हुआ, जब इजरायल ने पहले ईरान पर हमला किया। अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों—नतांज, इस्फहान और फोर्डो—पर बंकर बस्टर बम गिराए। ट्रंप ने कहा कि इससे ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम काफी पीछे धकेल दिया गया। ईरान ने जवाब में कतर में अमेरिकी बेस पर हमला करने की कोशिश की। 22 जून को सीजफायर हो गया। इस झड़प में इजरायल को 28 और ईरान को 1100 से ज्यादा लोग खोने पड़े।
सोमालिया
सोमालिया में अमेरिका अल-शबाब और आईएसआईएस के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रहा है। 2025 में 111 से ज्यादा हमले हुए। अमेरिकी सेना वहां की सेना को ट्रेनिंग भी देती है और साथ मिलकर ऑपरेशन करती है। ये हमले आतंकी हमलों को रोकने के लिए किए गए।
यमन
यमन में हूती विद्रोहियों पर हमले जनवरी 2025 से शुरू हुए। हूती लाल सागर में अमेरिकी और इजरायली जहाजों पर हमला कर रहे थे। जवाब में अमेरिका ने ‘ऑपरेशन रफ राइडर’ के तहत हूतियों के ठिकानों पर बमबारी की। अमेरिका का दावा है कि 500 हूती मारे गए, लेकिन हूतियों के मुताबिक 123 आम लोग मारे गए। मई 2025 में ओमान की मध्यस्थता से ट्रूस हो गया।
इराक
इराक में आईएसआईएल के खिलाफ कार्रवाई जारी रही। मार्च 2025 में अल-अनबार प्रांत में हमला हुआ, जिसमें आईएसआईएस का नंबर-2 नेता अब्दुल्लाह मक्की मुस्लिह अल-रिफाई मारा गया। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इसकी पुष्टि की। ये हमले आईएसआईएस के बचे हुए सदस्यों को खत्म करने के लिए थे। ये सभी कार्रवाइयां ट्रंप प्रशासन की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का हिस्सा बताई जाती हैं, लेकिन इनसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी विवाद हुआ है।












