उत्तर प्रदेश के संभल जिले में स्थित मदीना नाम की अवैध मस्जिद को लेकर एक ताजा मामला सामने आया है। ये मस्जिद अवैध थी। इसके सर्वे के बाद प्रशासन ने बुलडोजर एक्शन की तैयारी शुरू कर दी। इसके बाद कार्रवाई से ठीक एक दिन पहले स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोगों ने खुद ही उस ढांचे को हटाना शुरू कर दिया है।
क्या हुआ था घटनास्थल पर
संभल जिले के असमोली थाना क्षेत्र में सलेमपुर सालार उर्फ हाजीपुर गांव में ये मामला है। यहां ग्राम समाज की जमीन (गेट नंबर 641, करीब 439 वर्ग मीटर) पर बिना इजाजत के एक पक्की मस्जिद बनी हुई थी, जिसका नाम मदिना मस्जिद बताया जा रहा है। 4 जनवरी को शनिवार को ही लोग हथौड़ों से दीवारें तोड़ने लगे। उन्होंने लोहे के गेट, लकड़ी के दरवाजे-खिड़कियां और दूसरे सामान को अलग करके रख लिया ताकि प्रशासन जब आए तो ज्यादा नुकसान न हो।
अवैध निर्माण कैसे पकड़ा गया
ये विवाद कई साल पुराना है। 2018 में पटवारी ने रिपोर्ट दी थी कि ये जमीन ग्राम समाज की है और यहां कोई निर्माण नहीं होना चाहिए। उसके आधार पर तहसीलदार कोर्ट में केस चला। जांच पड़ताल के बाद अवैध कब्जा साबित हुआ। 28 दिसंबर 2025 को डिप्टी तहसीलदार बबलू कुमार की टीम ने मौके पर जांच की। इसके बाद तहसीलदार धीरेंद्र सिंह ने हाजी शमीम पर 8.78 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और बेदखली का आदेश दिया। प्रशासन ने 5 जनवरी 2026 को बुलडोजर और ट्रैक्टर लेकर ढहाने की तैयारी की थी।
लोगों ने खुद क्यों हटाना शुरू किया
समुदाय के लोग समझ गए कि प्रशासन की कार्रवाई टलने वाली नहीं है। इसलिए उन्होंने खुद ही सामान निकालना और दीवारें तोड़ना शुरू कर दिया। इससे उन्हें भारी मशीनों से होने वाले नुकसान से कुछ बचत हुई। खबर में लिखा है कि लोग जिम्मेदारी दिखाते हुए ये काम कर रहे थे।
प्रशासन की तैयारी
तहसीलदार धीरेंद्र सिंह ने कहा कि 2018 की पटवारी रिपोर्ट के बाद सबूतों के आधार पर ये फैसला हुआ। प्रशासन ने नगर पालिका के अफसरों को बुलडोजर मुहैया कराने को कहा था। लेकिन चूंकि लोग खुद ही काम कर रहे थे, तो शायद 5 जनवरी को ज्यादा बड़ा एक्शन न हुआ हो। ये पूरा मामला सरकारी जमीन पर बिना मंजूरी के बने ढांचे को लेकर है, जहां प्रशासन सख्ती से अतिक्रमण हटा रहा है और स्थानीय लोग भी अब खुद सहयोग कर रहे हैं ताकि ज्यादा विवाद न बढ़े।











