सतारा: महाराष्ट्र के सतारा जिले में स्थित कराड में बंधुता परिषद 2026 का आयोजन हुआ। जिसमें राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष किशोर मकवाना ने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने भारत की सभी जातियों को मिटाकर हिंदू समाज के एक होने की अपेक्षा व्यक्त की थी। उन्होंने कहा था कि राष्ट्रहित सर्वोपरी है। संघ अपनी स्थापना से ही समरस हिंदू समाज के लिए कार्यरत है। संघ प्रत्यक्ष व्यवहार के माध्यम से समाज में परिवर्तन लाता है। बंधुता परिषद 2026 का आयोजन भवानी मैदान में हुआ।
उन्होंने कहा कि 1940 को डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भवानी शाखा का दौरा किया था। उस पृष्ठभूमि पर इस बंधुता परिषद का आयोजन किया गया था। उन्होंने कहा कि ‘बहिष्कृत भारत’ में डॉ. आंबेडकर ने कहा था कि हिंदू समाज का संगठन एक राष्ट्रीय कार्य है।
आंबेडकर ने कभी संघ विरोधी भूमिका नहीं अपनायी
महाराष्ट्र राज्य के लोक निर्माण मंत्री श्रीमंत छत्रपति शिवेंद्र सिंहराजे भोसले ने कहा कि महापुरुषों को जाति के बंधनों में जकड़कर समाज में दरार पैदा की जा रही है। ऐसी बंधुता परिषदों से समाज में एकता का वातावरण बनेगा। आंबेडकर ने संविधान के माध्यम से समाज में न्याय और समता स्थापित करने का प्रयास किया। हिंदुत्व के माध्यम से भी शोषणमुक्त समाज का निर्माण होना चाहिए। इसके लिए संघ कार्यरत है और आंबेडकर ने भी कभी संघ विरोधी भूमिका नहीं अपनायी थी।
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दलित समाज को भी एकात्म मानवतावाद के रास्ते पर चलना चाहिए
उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने सभी को साथ लेकर चलने का कार्य किया। शिवराय के मार्ग पर चलना चाहिए। यही संघ की भूमिका रही है। दलित इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (डिक्की) के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. मिलिंद कांबले ने कहा कि संघ के बारे में जानबूझकर गलतफहमियां फैलाई गईं।विचारों की स्वतंत्रता के गीत गाने वाले लोगों ने संघ के मंच पर जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। आंबेडकर का लोकतंत्र पर अटूट विश्वास था। उन्होंने कभी भी हिंसा को बढ़ावा नहीं दिया। दलित समाज को भी अब विचार करते हुए एकात्म मानवतावाद के रास्ते पर चलना चाहिए, जिसमें अंत्योदय का विचार निहित है।
डॉ. आंबेडकर द्वारा कराड की संघ शाखा को दी गई भेंट का ‘जनता’ (तत्कालीन समाचार पत्र) में प्रकाशित प्रमाण सामने रखते हुए प्रा. मच्छिंद्र सकटे ने अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि अगर डॉ. आंबेडकर ने संघ की शाखा का दौरा किया था, तो मैं भी उनके रास्ते पर क्यों न चलूं? हम समता के आंदोलन में काम करते हैं। हमें समता के साथ-साथ स्वतंत्रता और लोकतंत्र के साथ-साथ बंधुता भी चाहिए। यदि संघ बड़े दिल से बंधुता का विचार लेकर आगे बढ़ रहा है, तो मैं उनके साथ हूं।
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‘एक गांव – एक मंदिर, एक पनघट, एक श्मशान’ प्रस्ताव पारित
महाराष्ट्र में अंतिम संस्कार करते समय आज भी कुछ स्थानों पर जातिवाद के कारण अनुचित घटनाएं घटती हैं जो बंधुता के लिए घातक हैं। सर्व समाज के लिए खुली और सुविधाजनक श्मशान भूमि तैयार की जानी चाहिए, ताकि किसी के भी मानवाधिकारों का उल्लंघन न हो, साथ ही जातिवाद करने वालों पर कानूनी कार्रवाई हो, इसके लिए ‘एक गांव, एक मंदिर, एक पनघट (पानी का स्रोत), एक श्मशान’ का प्रस्ताव परिषद में निलेश अलाटे ने रखा। जिसे सभी ने एकमत से मंजूरी दी।
इस अवसर पर महाराष्ट्र राज्य के लोक निर्माण मंत्री श्रीमंत छत्रपति शिवेंद्र सिंहराजे भोसले, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष किशोर मकवाना, दलित इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (डिक्की) के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. मिलिंद कांबले, विधायक अतुल भोसले, लोककल्याण मंडल ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय जोशी, उपाध्यक्ष डॉ. मकरंद बर्वे, स्वागत समिति के सदस्य मच्छिंद्र सकटे आदि उपस्थित थे।
















