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बुद्ध अवशेषों पर PM मोदी का बड़ा संदेश, कहा- भारत बौद्ध परंपरा का जीवंत वाहक

प्रधानमंत्री मोदी ने भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। बोले– भारत सिर्फ संरक्षक नहीं, बुद्ध परंपरा का जीवंत वाहक है।

Written byएजेंसीएजेंसी — edited by Shivam Dixit
Jan 3, 2026, 03:02 pm IST
in भारत, दिल्ली

नई दिल्ली (हि.स.) । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों से जुड़ी प्रदर्शनी का उद्घाटन किया और कहा कि भारत इनका संरक्षक ही नहीं बल्कि बुद्ध परंपरा का जीवंत वाहक भी है। पिपरहवा, वैशाली, देवनी मोरी और नागार्जुन कोंडा जैसे स्थलों से प्राप्त भगवान बुद्ध से जुड़े अवशेष बुद्ध के संदेश की जीवित उपस्थिति है। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध के अभिधम्म, उनकी वाणी, उनकी शिक्षाएं मूल रूप से पाली भाषा में ही हैं। हमारा प्रयास है कि पाली भाषा सामान्य जन तक पहुंचे। इसके लिए पाली को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया गया है।

बुद्ध के अवशेष भारत की सांस्कृतिक चेतना का अभिन्न अंग

प्रधानमंत्री मोदी ने पवित्र अवशेषों को भारत की सांस्कृतिक चेतना से जोड़ते हुए कहा कि भारत के लिए यह हमारे आराध्य का ही एक अंश है और हमारी सभ्यता का अभिन्न अंग है। इन्हें अपने बीच पाकर हम सभी धन्य हैं। इनका भारत से बाहर जाना और लौटकर फिर भारत आना अपने आप में बहुत बड़ा सबक है। यह बताते हैं कि गुलामी हमें राजनीतिक और आर्थिक नहीं बल्कि विरासत की दृष्टि से भी नुकसान पहुंचाती है।

गुलामी के दौर में छीने गए थे भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष

उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को गुलामी के कालखंड में भारत से छीना गया। करीब सवा सौ साल तक ये देश से बाहर रहे। उन्होंने इन पवित्र अवशेषों को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में निलाम करने का प्रयास किया।

राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी

प्रधानमंत्री ने आज राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में भगवान बुद्ध से जुड़ी पिपरवाह अवशेषों की विशाल अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। उदघाटन के बाद आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत केवल भगवान बुद्ध के पावन अवशेषों का संरक्षक नहीं है… बल्कि उनकी परंपरा का जीवंत वाहक भी है। पिपरहवा, वैशाली, देवनी मोरी और नागार्जुन कोंडा जैसे प्राप्त भगवान बुद्ध से जुड़े अवशेष बुद्ध के संदेश की जीवित उपस्थिति है।”

भगवान बुद्ध का मार्ग पूरी मानवता के लिए

उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध का ज्ञान उनका दिखाया मार्ग पूरी मानवता के लिए है। हमारे लिए उनके अवशेष हमारे आराध्य का अंश है और हमारी सभ्यता का अभिन्न अंग है। भगवान बुद्ध सबके हैं और सबको जोड़ते हैं। वे स्वयं को बहुत भाग्यशाली समझते हैं कि भगवान बुद्ध का उनके जीवन में बहुत ही गहरा स्थान रहा है।

वडनगर और सारनाथ से प्रधानमंत्री का भावनात्मक जुड़ाव

उन्होंने कहा कि उनका जन्म वडनगर में हुआ है और यह स्थान बौद्ध शिक्षा का बहुत बड़ा केंद्र था। वहीं वे भूमि जहां भगवान बुद्ध ने प्रथम उपदेश दिया वे सारनाथ आज उनकी कर्मभूमि है।

विश्वभर में बुद्ध अवशेषों के प्रति श्रद्धा का ज्वार

उन्होंने कहा कि “भगवान बुद्ध का ज्ञान, उनका दिखाया मार्ग पूरी मानवता का है। ये भाव हमने बीते कुछ महीनों में बार-बार अनुभव किया। बीते कुछ महीनों में भगवान बुद्ध के पावन अवशेष जिस भी देश में गए, वहां आस्था और श्रद्धा का ज्वार उमड़ आया। भारत का सदैव प्रयास रहा है कि दुनिया भर का बहुत विरासत से जुड़े स्थानों का विकास हो और भारत इसमें यथासंभव योगदान दे सके।”

देशभर में विकसित किया जा रहा है बौद्ध सर्किट

उन्होंने कहा कि आज भारत में सभी बौद्ध तीर्थ स्थलों के बीच बेहतर संपर्क सुनिश्चित करने और विश्व भर के तीर्थयात्रियों को आस्था और आध्यात्मिकता का समृद्ध अनुभव प्रदान करने के लिए पूरे देश में एक बौद्ध सर्किट विकसित किया जा रहा है। हमारा प्रयास इस बौद्ध विरासत को स्वाभाविक और सहज तरीके से संरक्षित करना है, ताकि यह आने वाली पीढ़ियों तक पहुंच सके।

Topics: Buddhist heritage IndiaPiprahwa relicsBuddhist circuit IndiaPM Modi Buddha relicsBuddha sacred relics exhibition
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