श्रीजगन्नाथ मंदिर के लिए एकरूप भूमि नीति लाएगी ओडिशा सरकार: कानून मंत्री
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श्रीजगन्नाथ मंदिर के लिए एकरूप भूमि नीति लाएगी ओडिशा सरकार: कानून मंत्री

यह जानकारी राज्य के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करने के बाद दी।

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद — edited by Lalit Fulara
Jan 1, 2026, 06:34 pm IST
in ओडिशा

भुवनेश्वर:ओडिशा सरकार पुरी स्थित 12वीं शताब्दी के श्री जगन्नाथ मंदिर के प्रशासन को और अधिक सुचारु, पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने के लिए यूनिफॉर्म लैंड सेटलमेंट पॉलिसी (ULSP), 2003 में बड़े सुधार और श्री जगन्नाथ मंदिर (SJT) अधिनियम, 1955 में आवश्यक संशोधन करने जा रही है। यह जानकारी राज्य के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करने के बाद दी।

मीडियाकर्मियों से बातचीत में मंत्री ने बताया कि बैठक में भगवान श्री जगन्नाथ के नाम पर दर्ज भूमि संपत्तियों के प्रबंधन, मंदिर प्रशासन, सुरक्षा व्यवस्था और अनुशासन से जुड़े लंबे समय से लंबित मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि यह निर्णय लिया गया है कि यूनिफॉर्म लैंड सेटलमेंट पॉलिसी, 2003 में आवश्यक सुधार किए जाएंगे और लगभग 70 वर्ष पुराने श्री जगन्नाथ मंदिर अधिनियम, 1955 में नए प्रावधान जोड़ते हुए संशोधन लाया जाएगा।

कानून मंत्री ने बताया कि श्री जगन्नाथ मंदिर के पास ओडिशा सहित देश के छह अन्य राज्यों में 55,000 एकड़ से अधिक भूमि है, लेकिन इन संपत्तियों से मंदिर को अपेक्षित राजस्व प्राप्त नहीं हो पा रहा है। कई स्थानों पर मंदिर की भूमि पर निजी व्यक्तियों द्वारा अवैध कब्जा किया गया है, जो वर्षों से वहां रह रहे हैं, लेकिन न तो उनके पास वैध भूमि अधिकार हैं और न ही वे मंदिर को कोई राजस्व प्रदान करते हैं।

उन्होंने कहा कि इस स्थिति में न तो मंदिर को उसके अधिकार का राजस्व मिल पा रहा है और न ही भूमि पर रह रहे लोगों को कानूनी सुरक्षा। इस असंतुलन को नीति सुधार के माध्यम से दूर करना आवश्यक है।” लोक सेवा भवन स्थित विधि विभाग के सम्मेलन कक्ष में आयोजित इस बैठक में भगवान श्री जगन्नाथ के नाम पर दर्ज भूमि के उचित बंदोबस्त पर विशेष चर्चा हुई। लंबे समय से मंदिर भूमि पर स्थायी रूप से रह रहे दैतापति, निजोग, सेवायत एवं मठों को भूमि आवंटन से संबंधित मौजूदा नीति में संशोधन के प्रस्तावों पर विचार किया गया।

अधिकारियों ने बताया कि प्रस्तावित संशोधनों से सेवायतों और गैर-सेवायतों, दोनों को लाभ मिलेगा, जो वर्षों से इन क्षेत्रों में निवास कर रहे हैं। साथ ही, इससे श्री मंदिर के लिए राजस्व संग्रह की प्रक्रिया भी अधिक सुगम और पारदर्शी हो सकेगी। बैठक में भगवान श्री जगन्नाथ के नाम पर दर्ज कई मूल्यवान संपत्तियों को अतिक्रमण से मुक्त कर उन्हें उच्चतम मूल्य पर आवंटित करने के प्रस्तावों पर भी चर्चा की गई।

इसके अतिरिक्त, श्री जगन्नाथ मंदिर अधिनियम में व्यापक संशोधन पर भी विचार किया गया ताकि मंदिर में अनुशासित आचरण, सुव्यवस्थित पूजा-अर्चना और प्रभावी प्रशासन सुनिश्चित किया जा सके। अधिनियम की प्राचीनता को ध्यान में रखते हुए, उप-समितियों के गठन, धार्मिक रीति-नीतियों को सुव्यवस्थित करने, अनुशासनहीनता रोकने, मंदिर परिसर में निषिद्ध वस्तुओं के प्रवेश पर रोक तथा दंडात्मक प्रावधानों को सशक्त बनाने जैसे सुधारों पर चर्चा हुई।

कानून मंत्री ने बताया कि मंदिर की पवित्रता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए मोबाइल फोन, कैमरा एवं अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं के मंदिर परिसर में प्रवेश पर प्रतिबंध से जुड़े मुद्दों पर भी मंथन किया गया। बैठक में श्रद्धालुओं और भक्तों के बीच मंदिर परिसर में मर्यादा और शालीनता बनाए रखने को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। इसके अंतर्गत मंदिर दर्शन के दौरान उपयुक्त भारतीय पारंपरिक वस्त्र पहनने के प्रति लोगों को प्रोत्साहित करने पर चर्चा हुई। साथ ही, श्री जगन्नाथ संस्कृति को लेकर भ्रामक जानकारी फैलाने या सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई के लिए अधिनियम में प्रावधान जोड़ने पर भी विचार किया गया।

सामाजिक-आर्थिक पहलू को रेखांकित करते हुए मंत्री ने कहा कि पुरी में कई गरीब सेवायत दशकों से मंदिर भूमि पर रह रहे हैं, लेकिन उनके पास भूमि पर कोई कानूनी अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि यूनिफॉर्म लैंड सेटलमेंट पॉलिसी में सुधार से सेवायतों और मंदिर—दोनों को लाभ होगा, साथ ही मंदिर का कॉर्पस फंड भी मजबूत होगा। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, भगवान श्री जगन्नाथ के नाम पर ओडिशा के 24 जिलों में 60,426.943 एकड़ भूमि दर्ज है, जबकि 395.252 एकड़ भूमि पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और बिहार में चिन्हित की गई है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राज्य विधि आयोग इस विषय पर पहले ही दो चरणों में विचार-विमर्श कर चुका है और मंदिर में अनुशासन एवं प्रशासन को सुदृढ़ करने के लिए कई सुझाव सरकार को सौंप चुका है। उन्होंने कहा कि बुधवार की बैठक मंदिर प्रशासन और भूमि प्रबंधन में समग्र सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

Topics: OdishabhubaneswarPuriShri Jagannath Temple
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