Konark Sun Temple odisha: नये साल पर धार्मिक पर्यटक नई-नई जगहों की सैर करते हैं। पर्यटक मंदिरों में दर्शन कर भगवान का आशीर्वाद लेते हैं। भारत में ऐसे कई मंदिर हैं जिनके रहस्य आज तक नहीं खुले हैं। ये मंदिर हमारी सभ्यता, संस्कृति और धर्म के प्रतीक है। ऐसा ही एक सूर्य मंदिर भारत में है जिसे देखने के लिए दुनियाभर से लोग आते हैं। यह मंदिर ओडिशा में है और 772 से भी अधिक साल पुराना है। इस मंदिर का निर्माण इस तरह से किया गया है कि सूर्य की पहली किरण मंदिर के प्रवेश द्वार पर पड़ती है। इस मंदिर का नाम है कोणार्क सूर्य मंदिर। आइये इस मंदिर की कहानी जानते हैं।
कलिंग शैली में बना है ये मंदिर, 1250 में हुआ था इसका निर्माण
कोणार्क सूर्य मंदिर बलुआ पत्थर और ग्रेनाइट से बना है। यह मंदिर ओडिशा के पुरी में है और कलिंग शैली में बनाया गया है। मंदिर भगवान सूर्य को समर्पित है। इस मंदिर का निर्माण 1250 ई. में गांग वंश राजा नरसिंहदेव प्रथम ने कराया था। कहा जाता है कि राजा नरसिंह देव ने 12 साल के पूरे राजस्व को मंदिर के निर्माण में लगा दिया था। इस मंदिर को पूर्व दिशा की ओर बनाया गया है।
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यूनेस्को ने इस मंदिर को घोषित किया है विश्व धरोहर
इस मंदिर की संरचना रथ के आकार की है। रथ में कुल 12 जोड़ी पहिए हैं। एक पहिए का व्यास करीब 3 मीटर है। इन पहियों को धूप धड़ी भी कहते हैं। रथ में सात घोड़े हैं जिनको सप्ताह के सात दिनों का प्रतीक माना जाता है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर दो मूर्तियां हैं, जिसमें सिंह के नीचे हाथी है और हाथी के नीचे मानव शरीर है। कोणार्क शब्द दो शब्दों कोण और अर्क से मिलकर बना हुआ है जिसमें अर्क का अर्थ सूर्यदेव है। यह मंदिर जगन्नाथ पुरी से करीब 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। 1984 में इस मंदिर को यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल घोषित किया था।
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चंद्रभागा नदी में कूदकर दे दी थी मंदिर बनाने वाले मुख्य शिल्पकार ने जान
इस मंदिर के करीब 2 किलोमीटर उत्तर में चंद्रभागा नदी बहती थी जो अब विलुप्त हो गई है। इस मंदिर को लेकर एक ऐसी कहानी कहा जाती है जो रहस्य से कम नहीं है। कहा जाता है कि इस मंदिर के निर्माण में 1200 कुशल शिल्पियों ने 12 साल तक काम किया लेकिन मंदिर का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया। जिसके बाद मुख्य शिल्पकार दिसुमुहराना के बेटे धर्मपदा ने निर्माण पूरा किया और मंदिर बनने के बाद उन्होंने चंद्रभागा नदी में कूदकर जान दे दी थी।















