मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने केदारनाथ पुनर्निर्माण और बद्रीनाथ मास्टर प्लान के संबंध में सचिवालय में संबंधित विभागों और जिलाधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक की। मुख्य सचिव ने कहा कि चारधारा यात्रा के सुचारू और व्यवस्थित संचालन के लिए यात्रा मार्ग और केदारनाथ व बद्रीनाथ में दर्शन में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं की पहचान कर उनका समाधान करना आवश्यक है। इस मौके पर चीफ सेक्रेटरी ने केदारनाथ रिकंस्ट्रक्शन और बद्रीनाथ मास्टर प्लान के कामों की प्रोग्रेस के बारे में भी जानकारी ली।
मुख्य सचिव ने कहा कि चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान और वापसी तक सुखद अनुभव मिलना चाहिए। हमें इस लेवल पर तैयारी करनी होगी। उन्होंने कहा कि भक्तों को दर्शन टोकन देते समय यह जानकारी दिखाई जानी चाहिए कि मंदिर में अभी कितने दर्शन हो रहे हैं। इस बार चारधाम यात्रा के लिए यह व्यवस्था अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जानी चाहिए। टोकन लेते समय श्रद्धालु को दर्शन में लगने वाला सम्भावित समय भी बताया जाना चाहिए। उन्होंने उन भक्तों के लिए गोल्फ कार्ट और ऑल-टेरेन गाड़ियों का इंतज़ाम भी पक्का किया जो व्हीलचेयर पर हैं और चल नहीं सकते।
चीफ सेक्रेटरी ने निर्देश दिया कि तीर्थयात्रियों को तीर्थ यात्रा के दौरान ज़रूरी और सही जानकारी मिले, इसके लिए अलग-अलग जगहों पर साइनेज और QR कोड वाले इन्फॉर्मेशन बोर्ड लगाए जाएं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी पर्यटन स्थलों के लिए सर्टिफाईड गाईड व्यवस्था उपलब्ध करायी जानी चाहिए। उन्होंने टूरिज्म डिपार्टमेंट को गाइड ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए एक एक्शन प्लान बनाने का निर्देश दिया।
मुख्य सचिव ने कहा कि केदारनाथ रोपवे संचालित होने के बाद केदारनाथ मंदिर परिसर, गौरीकुंड एवं सोनप्रयाग में श्रद्धालुओं का अत्यधिक दबाव बढ़ने की सम्भावना को देखते हुए अभी से तैयारियां सुनिश्चित कर ली जाएं। उन्होंने इसके लिए केदारनाथ मंदिर परिसर क्षेत्र विस्तार और गौरीकुंड एवं सोनप्रयाग में पार्किंग एवं अन्य सुविधाओं के लिए क्षेत्र विस्तार की सम्भावनाओं को तलाशे जाने के भी निर्देश दिए।
इस अवसर पर सचिव डॉ. वी. षणमुगम, धीराज सिंह गर्ब्याल, जिलाधिकारी रूद्रप्रयाग प्रतीक जैन एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिलाधिकारी चमोली गौरव कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित है।

















