नए साल से ठीक पहले देशभर में गिग वर्कर्स (जैसे डिलीवरी बॉय और ड्राइवर) ने बड़ा धरना-हड़ताल शुरू कर दी है। ये लोग Swiggy, Zomato, Zepto, Blinkit, Amazon और Flipkart जैसी कंपनियों के साथ जुड़े हुए हैं। उनका मुख्य कहना है कि 10 मिनट वाली डिलीवरी का ऑप्शन पूरी तरह हटाया जाए, क्योंकि ये उनके लिए बहुत खतरनाक साबित हो रहा है।
हड़ताल की वजह क्या है?
ये हड़ताल अचानक नहीं आई। पिछले कुछ समय से गिग वर्कर्स की कमाई घट रही है, काम का दबाव बहुत बढ़ गया है और सेफ्टी का कोई खास ध्यान नहीं दिया जा रहा। खासकर 10-मिनट डिलीवरी का मॉडल सबसे बड़ी समस्या बन गया है। वर्कर्स कहते हैं कि इस वजह से उन्हें भीड़भाड़ वाली सड़कों पर तेज रफ्तार से भागना पड़ता है, जिससे एक्सीडेंट का खतरा बहुत ज्यादा हो जाता है। मानसिक तनाव भी बढ़ता है। पेमेंट सिस्टम में भी बदलाव आए हैं, जिससे पहले जितनी कमाई होती थी, वो अब नहीं हो पा रही। फेस्टिवल टाइम में स्पेशल इंसेंटिव या बोनस भी पहले जैसा नहीं मिल रहा।
अल्गोरिदम (ऐप का सिस्टम) इतना जटिल और गैर-पारदर्शी है कि वर्कर्स को पता ही नहीं चलता कि उन्हें कितना और क्यों मिल रहा है या नहीं मिल रहा। कई बार आईडी ब्लॉक कर दी जाती है या टीम लीडर धमकाते हैं। कुछ जगहों पर वेयरहाउस के पास बाउंसर भी लगाए गए हैं ताकि हड़ताल में शामिल होने वाले डरें।
क्या-क्या मांग कर रहे हैं वर्कर्स?
टेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) और इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (IFAT) के बैनर तले ये हड़ताल हो रही है। उनकी मुख्य मांगें ये हैं:
- सभी प्लेटफॉर्म से 10 मिनट डिलीवरी का ऑप्शन तुरंत हटाया जाए।
- पुराना पेआउट स्ट्रक्चर वापस लाया जाए, जिसमें फेस्टिवल (दशहरा, दिवाली, बकरीद आदि) पर अच्छा इंसेंटिव मिलता था।
- पारदर्शी और फेयर इंसेंटिव सिस्टम हो, अल्गोरिदम पर वर्कर्स का कुछ कंट्रोल हो या कम से कम समझ आए।
- सही तरीके से शिकायत सुनने का सिस्टम बने (ग्रिवांस रिड्रेसल मैकेनिज्म)।
- सोशल सिक्योरिटी मिले – एक्सीडेंट इंश्योरेंस, मेडिकल मदद, बीमारी में सपोर्ट आदि।
TGPWU के प्रेसिडेंट शेख सलाउद्दीन ने कहा है, “फास्ट डिलीवरी का मॉडल असुरक्षित है और कमाई भी कम कर रहा है। हमने 25 दिसंबर को हड़ताल की थी, जिसमें करीब 40,000 वर्कर्स शामिल हुए और 50-60% ऑर्डर लेट हो गए। 31 दिसंबर को असली तस्वीर दिखेगी। हम बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन सरकार को भी बीच में आना चाहिए।”
कितने बड़े स्तर पर है ये हड़ताल?
ये देशव्यापी है। हैदराबाद से लेकर दिल्ली, बेंगलुरु, पुणे, कोलकाता, गुरुग्राम तक असर दिख रहा है। यूनियन का दावा है कि 1.5 लाख से ज्यादा वर्कर्स इसके साथ हैं। 25 दिसंबर की हड़ताल को उन्होंने “ट्रेलर” कहा था, और आज की “मेन पिक्चर”। नए साल की शाम को पार्टी, खाना-पीना, लास्ट मिनट शॉपिंग सब प्रभावित हो सकता है, क्योंकि पीक टाइम में डिलीवरी ठप हो सकती है।
वर्कर्स कहते हैं कि कंपनियां उन्हें “पार्टनर” कहती हैं, लेकिन असल में जिम्मेदारी नहीं लेतीं। एक्सीडेंट हो जाए तो इलाज का खर्चा खुद का, कंपनी कुछ नहीं देती। कई लोग 10-12 घंटे काम करते हैं, लेकिन कमाई पहले जैसी नहीं रह गई। ये हड़ताल बस पैसे की नहीं, बल्कि इज्जत, सेफ्टी और इंसानी हक की लड़ाई है।














