श्रीनगर की स्पेशल एनआईए कोर्ट ने तीन कश्मीरियों को सोशल मीडिया के जरिए घाटी में अशांति फैलाने के आरोप में समन जारी किया है। ये तीनों लोग अब विदेश में रह रहे हैं और पुलिस का कहना है कि वे फेसबुक, एक्स (ट्विटर) और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म्स को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।
कौन हैं आरोपी?
मुबीन अहमद शाह: श्रीनगर का रहने वाला है और फिलहाल अमेरिका में रह रहा है। इसके अलावा दूसरा कट्टरपंथी अजीजुल हसन अशी भी श्रीनगर का ही है और ये भी अमेरिका में है। वहीं कुपवाड़ा का रहने वाला रिफात वानी जर्मनी में रह रहा है। ये तीनों विदेशों में बैठकर सोशल मीडिया के जरिए भारत के खिलाफ माहौल बना रहा है।
क्या है आरोप?
काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर (सीआईके) ने एफआईआर दर्ज की है। पुलिस का दावा है कि इन लोगों ने खुद को न्यूज पोर्टल के मालिक, पत्रकार या फ्रीलांसर बताकर सोशल मीडिया पर फेक, उकसाने वाली और अलगाववादी सामग्री फैलाई। इन पोस्ट्स का मकसद घाटी में सड़कों पर हिंसा भड़काना, पत्थरबाजी करवाना, सरकारी या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, लोगों के बीच नफरत फैलाना और भारत सरकार के खिलाफ गुस्सा भड़काना था।
पुलिस का कहना है कि ये लोग घाटी के अंदर और बाहर के अलगाववादी ताकतों के इशारे पर काम कर रहे थे। उनका मकसद आम जिंदगी को बाधित करना और अफवाहें फैलाकर अशांति पैदा करना था।
कानूनी धाराएं
इन तीनों के खिलाफ केस में ये धाराएं लगाई गई हैं:आईपीसी की धारा 153-ए (धर्म, जाति या समुदाय के आधार पर दुश्मनी बढ़ाना), धारा 505 (जनता में दहशत या अशांति फैलाने वाली बातें), यूएपीए की धारा 13 (आतंकी गैंग से जुड़े होने की सजा) के तहत केस दर्ज किया गया है। पहले इनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट निकले थे, लेकिन ये लोग सरकारी नजरों से बचते रहे और विदेश चले गए। इसके बाद कोर्ट ने सीआरपीसी की धारा 82 के तहत प्रोक्लेमेशन (उद्घोषणा) जारी की, यानी सार्वजनिक तौर पर इन्हें पेश होने को कहा गया।
कोर्ट ने क्या फैसला दिया?
स्पेशल एनआईए कोर्ट ने अब इन तीनों को 31 जनवरी 2026 तक पेश होने का समन जारी किया है। अगर ये नहीं आए तो उनकी संपत्ति जब्त करने और आगे की कानूनी कार्रवाई हो सकती है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने प्रोक्लेमेशन के बावजूद सोशल मीडिया पर एक्टिव रहना जारी रखा है, जिससे साइबर टेररिज्म जैसी गतिविधियां बढ़ रही हैं। सुरक्षा एजेंसियां डिजिटल स्पेस पर नजर रख रही हैं ताकि ऐसी हरकतों से घाटी में शांति भंग न हो।

















