बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रही हिंसा ने नेपाल में काफी गुस्सा पैदा कर दिया है। नेपाल के कई शहरों में पिछले कुछ दिनों में बड़े-बड़े विरोध प्रदर्शन हुए, खासकर बीरगंज, जनकपुरधाम और गोलबाजार में। ये प्रदर्शन शुक्रवार और शनिवार को हुए, जहां लोग सड़कों पर उतरे और बांग्लादेश सरकार से हिन्दुओं की सुरक्षा की मांग की।
नेपाल में कहां-कहां हुए प्रदर्शन
प्रदर्शन मुख्य रूप से नेपाल के तराई इलाकों में हुए, जहां हिंदू आबादी ज्यादा है। गोलबाजार (सिरहा जिला) में हिंदू अधिकार समूह ‘राष्ट्रीय एकता अभियान’ ने रैली निकाली। प्रदर्शनकारियों ने ईस्ट-वेस्ट हाईवे को कुछ देर के लिए ब्लॉक भी कर दिया, जिससे ट्रैफिक जाम हो गया। जनकपुरधाम में ‘महिला अभियान जनकपुरधाम’ के बैनर तले महिलाओं ने प्रदर्शन किया। बीरगंज में मुस्लिम संगठन ‘जमीयत उलेमा-ए नेपाल’ (बारा और परसा जिला कमिटी) ने भी अलग से रैली निकाली, जिसका नेतृत्व उपाध्यक्ष मौलाना अली असगर मदनी ने किया। इन रैलियों में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों के नारे और मांगें
लोगों ने कई नारे लगाए, जैसे- “हिंदुओं की हत्या बंद करो”, “अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करो”, “मानवाधिकार का सम्मान करो”, “दीपू चंद्र दास के कातिलों को फांसी दो”, “बांग्लादेश सरकार मुर्दाबाद”, “मोहम्मद यूनुस मुर्दाबाद”, और “हिंदू-मुस्लिम एकता जिंदाबाद”। मांग साफ थी कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रही हिंसा रोकी जाए, उनकी जान-माल की सुरक्षा हो, और दोषियों को सजा मिले।
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बांग्लादेश में क्या घटनाएं हुईं
प्रदर्शनों की वजह बांग्लादेश में हाल की दो मुख्य घटनाएं हैं। 18 दिसंबर को 25 साल के हिंदू युवक दीपू चंद्र दास (जो कपड़े की फैक्ट्री में काम करते थे) पर ईशनिंदा का झूठा आरोप लगाया गया। इसके बाद भीड़ ने उन्हें पीट-पीटकर मार डाला, शव को पेड़ पर लटकाया और आग लगा दी। दूसरी घटना में बुधवार रात एक और हिंदू व्यक्ति अमृत मंडल उर्फ सम्राट को भीड़ ने पीटकर मार डाला। ये घटनाएं अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार बनने के बाद हुईं, जहां कुछ लोग इस्लामी कट्टरपंथियों के बढ़ते प्रभाव की बात कर रहे हैं।
नेताओं और संगठनों की बातें
सिरहा में राष्ट्रीय एकता अभियान के जिला अध्यक्ष हेमंत सिंह ने कहा कि हम शांतिपूर्ण तरीके से बांग्लादेश सरकार पर दबाव डालना चाहते हैं कि अल्पसंख्यकों की जान और सुरक्षा की गारंटी दें। जब तक ऐसी घटनाएं रुक नहीं जातीं, हमारा संघर्ष जारी रहेगा। बीरगंज की मुस्लिम रैली में मौलाना अली असगर मदनी ने भी हिस्सा लिया और हिंदुओं की हत्या की निंदा की।

















