किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर के कन्वर्जन की कोशिश के मामले में जांच रिपोर्ट महिला आयोग को सौंप दी गई है। इसके साथ ही केजीएमयू में प्रशासन ने रिपोर्ट कन्वर्जन के आरोपी डॉक्टर को निलंबित कर दिया। केजीएमयू प्रशासन ने आरोपी रेजिडेंट की मदद करने वालों की पहचान के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की है। इस जांच समिति में पैरामेडिकल संकाय के डीन प्रो. के के सिंह, प्रो. सुरेश कुमार, प्रॉक्टर प्रो. आर ए एस कुशवाहा, प्रो. हैदर अब्बास और प्रो. सुमित रुंगटा को शामिल किया गया है।
पुलिस जांच जारी
उधर, पुलिस ने आरोपी डॉ. रमीज मलिक की मां और पिता से शुक्रवार को पूछताछ की। डॉ. रमीज के माता पिता ने महिला डॉक्टर से दोस्ती होने की बात की जानकारी से इन्कार कर दिया। उधर केजीएमयू प्रशासन ने पीड़िता की सुरक्षा को देखते हुए उसे परिसर में हॉस्टल आवंटित किया है। इससे पहले पीड़िता परिसर के बाहर किराये पर रह रही थी।
कन्वर्जन का दबाव
उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले, लखनऊ के किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी की लेडी रेजिडेंट डॉक्टर ने आत्महत्या का प्रयास किया था। पीड़िता का आरोप है उसके साथ पढ़ने वाले मुस्लिम रेजिडेंट डॉक्टर ने उस पर कन्वर्जन का दबाव बनाया था। जब पीड़िता ने इंकार कर दिया तो वह मानसिक रूप से प्रताड़ित करने लगा। पीड़िता ने आत्महत्या का प्रयास किया। उसके बाद यह मामला किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के प्रशासन की जानकारी में आया।
प्रेमजाल में फंसाने का आरोप
आरोप है कि मुस्लिम रेजिडेंट डॉक्टर ने पीड़िता को प्रेमजाल में फंसा लिया। पीड़िता का शोषण किया। उसने शादी का भी वादा किया था। जब बात शादी करने की आई तो उसने कन्वर्जन का दबाव बनाया। जब पीड़िता ने कन्वर्जन करने से मना किया तो उसके साथ पढ़ने वाले मुस्लिम रेजिडेंट डॉक्टर ने विवाह से इनकार कर दिया। जब युवक ने शादी से मना कर दिया तो पीड़िता डिप्रेशन में चली गई। पीड़िता के घरवालों ने सीएम के जन सुनवाई पोर्टल और राज्य महिला आयोग में शिकायत की।
जानकारी के अनुसार, दोनों एमडी पैथोलॉजी के छात्र हैं। वर्ष 2025 के जुलाई माह में दोनों की मुलाकात हुई थी। परिजनों का आरोप है पीड़िता काफी डरी हुई है। 17 दिसंबर को उसने हॉस्टल में दवा की कई गोलियां खाकर आत्महत्या का प्रयास किया। उसके बाद उसे ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था। कुछ समय के बाद पीड़िता को क्रिटिकल केयर यूनिट में भर्ती कराया गया। स्वास्थ में सुधार होने के बाद पीड़िता को गत 19 दिसंबर को डिस्चार्ज कर दिया गया।
















