थाईलैंड और कंबोडिया के बीच हालांकि ताजा समाचारों के अनुसार, संघर्षविराम पर सहमति हो गई है। लेकिन इस संघर्ष के दौरान थाईलैंड की सेना द्वारा संवेदनशून्यता के साथ सीमा के निकट बनी भगवान विष्णु की प्रतिमा को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त किया गया था उसे लेकिन दुनियाभर के हिन्दू समाज को काफी पीड़ा पहुंची है। सोशल मीडिया पर आईं गुस्से से भरी प्रतिक्रियाओं के अलावा भी अनेक मंचों से उस घटना की भर्त्सना की जा रही है। ऐसे में थाईलैंड के प्रसिद्ध अखबार बैंकॉक पोस्ट की टिप्पणी बहुत मायने रखती है। अखबार ने इस घटना पर अपने ही देश की सेना को आड़े हाथों लिया है और उसके आस्था विरोधी इस काम की तीखी आलोचना की है।
बैंकॉक पोस्ट ने कल ‘पॉवर विद नो सेंस्टिविटी’ शीर्षक वाले अपने संपादकीय में इससे धार्मिक भावनाओं के आहत होने की बात स्वीकारी है और लिखा है कि वह भगवान विष्णु की प्रतिमा थी जिसकी पूरा सम्मान रखा जाना चाहिए था। अखबार आगे लिखता है कि यह भगवान विष्णु के प्रति हिन्दुओं की आस्था का अपमान था क्योंकि ये बस 8 हाथों वाली कोई साधारण प्रतिमा नहीं बल्कि विष्णु भगवान की पवित्र प्रतिमा थी। अखबार ने थाई सेना की कार्रवाई को सीमा विवाद के संदर्भ में उचित ठहराने से इनकार किया और क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा बताया।
अखबार की संपादकीय टिप्पणी ने उन पत्रकारों पर भी लानत भेजी है जिन्होंने इस घटना के प्रति नितांत लापरवाही बरती या इसका उपहास उड़ाया है। पत्रकारों की जवाबदेही पर सवाल उठाया गया है। सोशल मीडिया पर भी घटना को ‘मामूली’ बताने वालों की सोच पर दया व्यक्त की गई है।
The reported demolition of a Vishnu icon at the Cambodia–Thailand border is deeply troubling. Sacred religious symbols are not collateral damage; they represent living traditions, history, and identity for millions. Destroying them only escalates tensions. https://t.co/7vOs08Tfmd
— Hindu American Foundation (@HinduAmerican) December 25, 2025
दरअसल साल 2014 में थाईलैंड—कम्बोडिया सीमा के निकट स्थापित भगवान विष्णु की नौ मीटर ऊंची मूर्ति को थाई सेना के कार्मिकों द्वारा गत 22 दिसम्बर को बुलडोजर से गिरा दिया गया था। यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है। इस घटना के पक्ष-विपक्ष की बातों के बीच स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर तीखी प्रतिक्रिया पैदा हुई है।
इस हरकत से सीमा-सुरक्षा के मुद्दे से इतर धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंचाने का मुद्दा ज्यादा प्रमुखता से उपजा है। भू-राजनीतिक तनाव एकतरफ, इस दुखद कदम ने दोनों ही देशों में हिन्दू धर्म के प्रति गहन आस्था को जबरदस्त आहत किया है। हिंदू देवी-देवताओं और प्रतीकों के प्रति विश्वभर में आस्था है।
थाई मीडिया में प्रमुख स्थान रखने वाले बैंकॉक पोस्ट के संपादकीय ने पत्रकारों से सोशल मीडिया पर चल रही नोंकझोंक या घटना को मजाक के तौर पर देखने से बचने को कहा है। लिखा है कि इस घटना के राजनीतिक-धार्मिक निहितार्थों पर गहराई से विचार किया जाना चाहिए।
संपादकीय कहता है कि धार्मिक प्रतीकों को ध्वस्त करना या उनका उपहास उड़ाना आस्था के प्रति असम्मान ही माना जाएगा। ऐसे कदम क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बन सकते हैं। संपादकीय ने मीडिया-स्वतंत्रता और जिम्मेदारी के बीच संतुलन की जरूरत जताई ताकि गलत सूचना या समुदायों के बीच द्वेष को बढ़ावा न मिले।
भारत ने तो इस घटना तीखी प्रतिक्रिया की है। विदेश मंत्रालय ने इस घटना पर चिंता जताई है और शांतिपूर्ण समन्वय के मार्ग तलाशने का आग्रह दोहराया है। स्थानीय थाई मीडिया और कम्बोडिया के अधिकारियों के बयान भी तनाव कम करने और स्थिति को शांत बनाने के उपायों की बात करते हैं।
विशेष रूप से बैंकॉक पोस्ट ने पत्रकारिता के नैतिक मानकों के अनुरूप रिपोर्टिंग और विश्लेषण किए जाने की अपील की है। लिखा कि मीडिया को संवेदनशील धार्मिक प्रतीकों के बारे में सतर्क और तथ्य-आधारित कवरेज करनी चाहिए ताकि गलतफहमी और उकसावा पैदा न हो।

















