इजरायल ने दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है, जिसने सोमालीलैंड को एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र के रूप में आधिकारिक तौर पर मान्यता दे दी है। यह फैसला इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने लिया और इसे अब्राहम समझौतों की भावना में लिया गया कदम बताया। अब्राहम समझौते 2020 में अमेरिका की मध्यस्थता में हुए थे, जिनके तहत इज़रायल ने कई अरब देशों के साथ संबंध सामान्य किए थे।
सोमालीलैंड का बैकग्राउंड
सोमालीलैंड सोमालिया का उत्तरी हिस्सा है, जो 1991 से ही खुद को अलग देश मानता आ रहा है। उस साल सोमालिया में गृहयुद्ध शुरू हुआ था और केंद्र सरकार कमज़ोर पड़ गई थी। सोमालीलैंड ने तब से अपनी अलग सरकार, पुलिस, मुद्रा, पासपोर्ट और झंडा बना रखा है। यहां पिछले 30 सालों से तुलनात्मक रूप से शांति और स्थिरता बनी हुई है, जो सोमालिया के बाकी हिस्सों से काफी अलग है।
यह इलाका पहले ब्रिटिश प्रोटेक्टरेट था और 1960 में पांच दिन के लिए स्वतंत्र भी रहा था, जिसे उस समय इज़रायल समेत कई देशों ने मान्यता दी थी। लेकिन बाद में यह सोमालिया के साथ मिल गया। 1991 में अलग होने के बाद से आज तक किसी भी संयुक्त राष्ट्र सदस्य देश ने सोमालीलैंड को स्वतंत्र राज्य नहीं माना था। इस मान्यता की कमी की वजह से अंतरराष्ट्रीय व्यापार, मदद और कर्ज़ लेने में बहुत मुश्किल होती थी। सोमालीलैंड की सरकार लंबे समय से उम्मीद कर रही थी कि कोई बड़ा देश पहले कदम उठाएगा, ताकि बाकी देश भी आगे आएं।
इज़रायल का फैसला और सहयोग की बात
नेतन्याहू ने सोमालीलैंड के राष्ट्रपति अब्दिरहमान मोहम्मद अब्दुल्लाही (जिन्हें अब्दिरहमान सिरो भी कहते हैं) के साथ वीडियो कॉल पर बात की और उन्हें बधाई दी। दोनों पक्षों ने एक संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर किए, जिसमें आपसी मान्यता की बात है। इज़रायल के विदेश मंत्री गिदियोन सआर भी इसमें शामिल थे।
नेतन्याहू ने कहा कि इज़रायल सोमालीलैंड के साथ तुरंत कृषि, स्वास्थ्य, टेक्नोलॉजी और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाएगा। उन्होंने राष्ट्रपति अब्दुल्लाही को इज़रायल आने का न्योता भी दिया। सोमालीलैंड की तरफ से राष्ट्रपति ने कहा कि यह कदम क्षेत्रीय और वैश्विक शांति की दिशा में है। उन्होंने अब्राहम समझौतों में शामिल होने की इच्छा जताई और कहा कि दोनों देश मिलकर स्थिरता, समृद्धि और साझा फायदे के लिए काम करेंगे।
सोमालिया और दूसरे देशों की प्रतिक्रिया
सोमालिया सरकार ने इस फैसले की कड़ी निंदा की। प्रधानमंत्री कार्यालय ने इसे “अवैध कदम” और “संप्रभुता पर सीधा हमला” बताया। सोमालिया का कहना है कि सोमालीलैंड उसका अभिन्न हिस्सा है और वह अपनी एकता व सीमाओं की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।
मिस्र के विदेश मंत्री ने सोमालिया, तुर्की और जिबूती के समकक्षों से फोन पर बात की। इन चारों देशों ने इज़राइल के इस कदम की निंदा की और कहा कि किसी देश के अंदर अलग क्षेत्र को मान्यता देना अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए खतरनाक मिसाल है। उन्होंने सोमालिया की एकता और क्षेत्रीय अखंडता का पूरा समर्थन जताया।
अफ्रीकी संघ (AU) ने भी इस मान्यता को खारिज कर दिया। AU चेयर ने कहा कि अफ्रीकी संघ सोमालिया की एकता के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और ऐसे कदम पूरे महाद्वीप में शांति व स्थिरता को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
















