सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड राज्य की वन भूमि पर अवैध कब्जों पर कड़ा रुख अपनाया 
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सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड राज्य की वन भूमि पर अवैध कब्जों पर कड़ा रुख अपनाया 

वन क्षेत्र में अवैध कब्जों पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने  नाराजगी जताते हुए कहा कि हमारे लिए यह बेहद चौंकाने वाला है कि उत्तराखंड सरकार और उसके अधिकारी अपनी आंखों के सामने वन भूमि पर हो रहे अतिक्रमण को मूक दर्शक की तरह देख रहे हैं।

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो
Dec 24, 2025, 10:10 pm IST
inभारत
supreme court

सुप्रीम कोर्ट

देहरादून। उत्तराखंड की वन भूमि पर अतिक्रमण मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने उत्तराखंड शासन में वन विभाग की निष्क्रियता पर स्वतः संज्ञान लेते हुए शासन स्तर पर जांच समिति गठित कर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। साथ ही वन क्षेत्र में निर्माण कार्य पर फिलहाल रोक लगा दी है।

वन क्षेत्र में अवैध कब्जों पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने  नाराजगी जताते हुए कहा कि हमारे लिए यह बेहद चौंकाने वाला है कि उत्तराखंड सरकार और उसके अधिकारी अपनी आंखों के सामने वन भूमि पर हो रहे अतिक्रमण को मूक दर्शक की तरह देख रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी भी निजी व्यक्ति या पक्ष को उस जमीन पर कोई तीसरा पक्ष बनाने की अनुमति नहीं होगी यानी वे न तो वह जमीन किसी को बेच सकते हैं और न ही किराए पर दे सकते हैं।

जिन जमीनों पर अभी मकान नहीं बने हैं और वे खाली पड़ी हैं, उन्हें वन विभाग तुरंत अपने कब्जे में लेगा. यह पूरा मामला 2866 एकड़ फॉरेस्ट लैंड से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। सरकार ने इसे फॉरेस्ट लैंड घोषित किया था. आरोप है कि इस सरकारी जमीन का एक हिस्सा ऋषिकेश की एक संस्था, ‘पशु लोक सेवा समिति’ को लीज पर दिया गया. इसके बाद यह संस्था बंद हो गई. साल 1994 में एक सरेंडर डीड यानी एक लिखित समझौते के जरिए 594 एकड़ जमीन वापस वन विभाग को सौंप दी गई.

जमीन वापसी के इस फैसले को फाइनल मान लिया गया और लंबे समय तक इसे किसी ने भी कानूनी तौर पर चुनौती नहीं दी, इसके बाद साल 2001 में कुछ लोगों ने अचानक सामने आकर यह दावा किया कि इस सरकारी जमीन पर उनका कब्जा है. कुल मिलाकर मुद्दा ये बना कि जब संस्था बंद हुई तो उसने जमीन सरकार को लौटा दी और मामला वहीं खत्म हो जाना चाहिए था. लेकिन सालों बाद कुछ लोगों ने अवैध रूप से उस जमीन पर अपना हक जताना शुरू कर दिया. वहीँ अब सुप्रीम कोर्ट का निर्देश आने के बाद वन विभाग और उत्तराखंड शासन भी सक्रिय हुआ हैँ और इस मामले के साथ ही तमाम वन भूमि पर कब्ज़े की फ़ाइलो को खंगला जा रहा है।

उधर वन विभाग के मुखिया रंजन कुमार मिश्रा का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए शासन स्तर पर एक समिति का गठन किया जा रहा है और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों का पालन कराते हुए ,वन क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाया जा रहा है।

Topics: उत्तराखंड सरकारवनभूमि पर अतिक्रमणसुप्रीम कोर्टउत्तराखंड
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