बांग्लादेश में बढ़ती हिंसा, भारत विरोधी भावनाएं भड़काने और इस्लामी कट्टरपंथियों के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने पर अभिनेत्री रोकेया प्राची ने यूनुस सरकार की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने बांग्लादेश सरकार को बेनकाब करते हुए मुहम्मद यूनुस को पाकिस्तान का एजेंट बताया और कहा कि हालिया हिंसा अंतरिम सरकार की रणनीतिक योजना का हिस्सा लगती है। ये योजना भारत विरोधी भावनाएं भड़काने के लिए है, जिसका मकसद सत्ता में बने रहना और पाकिस्तान, तुर्की, डीप स्टेट के कट्टरपंथी एजेंडे का समर्थन करना है।
इस्लामी आतंकवादियों के खिलाफ एक भी मामला दर्ज नहीं
अभिनेत्री ने सोमवार (23 दिसंबर) को समाचार एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में कहा, “सबसे पहले अंतरिम सरकार ने दर्जनों इस्लामी आतंकवादियों को जेल से रिहा कर दिया, जिन्हें हत्या और आतंकी गतिविधियों के लिए दोषी ठहराया गया था। ये सभी कट्टरपंथी भीड़ इकट्ठा करते थे, जो यूनुस सरकार का विरोध करने वालों पर हमला करते थे।”
वह आगे कहती हैं कि यह कोई आकस्मिक घटना नहीं थी, जिसमें इन छात्र नेताओं को मारा गया और विरोध प्रदर्शनों के बाद जो हिंसा हुई। मुहम्मद यूनुस के सत्ता में आने के बाद हमलों के लिए जिम्मेदार अपराधियों को माफी दे दी गई। उनके खिलाफ एक भी मामला दर्ज नहीं किया गया है।
मुहम्मद यूनुस पाकिस्तान का एजेंट
बांग्लादेश की राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेत्री प्राची अपने ही देश में 14 अगस्त 2024 से छिपकर रह रही हैं। बताया जाता है कि जब वह मुजीबुर रहमान की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए जा रही थीं, तभी भीड़ ने उनके ऊपर हमला कर दिया था। उन्होंने भारतीय मीडिया के समक्ष बांग्लादेश सरकार को बेनकाब करते हुए मुहम्मद यूनुस को पाकिस्तान का एजेंट बताया।
बांग्लादेश में हिंदू छिपकर रहने को मजबूर
हिंसा को लेकर अभिनेत्री ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि बांग्लादेश, पाकिस्तान के इशारों पर काम कर रहा है। 5 अगस्त 2024 को मुहम्मद यूनुस ने धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले करवाए और इस्लामिक भावनाओं का गलत इस्तेमाल कर जनता को भड़काया। भारत ने बांग्लादेश की अत्याचार के समय मदद की थी, लेकिन अब पाकिस्तान वहां से बैठे-बैठे पटकथा लिख रहा है। यूनुस का भाई बांग्लादेश में ज्यादा सक्रिय है। प्राची ने इसे योजनाबद्ध प्री-प्लान्ड मर्डर करार दिया और कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति बहुत खराब है, उन्हें छिपकर रहना पड़ रहा है और परिवार से मिलना मुश्किल हो गया है। उन्होंने बताया कि लोग अपनी जान जोखिम में डालकर संघर्ष कर रहे हैं, जबकि सरकार मूकदर्शक बनकर बैठी है।

















