पाकिस्तान के सेना प्रमुख और सीडीएफ बने जनरल असीम मुनीर अपनी सेना की काबिलियत या कहें नाकाबिलियत के बारे में जब बोलते हैं, झूठ ही बोलते हैं। कल लीबिया में भी उन्होंने अपने जहाजों और रक्षा उपकरणों को लेकर खूब डींगें हांकी। उन्होंने झूठे दावे किए कि आपरेशन सिंदूर में उनकी सेना ने ‘भारत के कई विमान गिराए क्योंकि उनके सुरक्षा तंत्र बहुत मुस्तैद और कारगर हैं।’ मुनीर उस लीबिया में रक्षा सौदा करने गए हैं जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने प्रतिबंधित किया हुआ है और दुनिया के किसी देश ने लीबिया से कोई खास संबंध नहीं बनाए हुए हैं। ऐसे गरीब देश से रक्षा सौदा करके मुनीर भले अपनी पींठ खुद थपथपा लें लेकिन सामरिक नीतियों के मामले में जिन्ना का देश एक बार फिर फिसड्डी साबित हुआ है।
यह रक्षा सौदा लगभग 4 अरब डॉलर मूल्य का बताया जा रहा है, जिसमें 16 जेएफ-17 फाइटर जेट्स और अन्य सैन्य उपकरण/हथियार शामिल होने की बात कही जा रही है। कई रक्षा विश्लेषक इसे पाकिस्तान की बढ़ती रक्षा-आयात/निर्यात-नीति के एक ‘बड़े कदम’ के तौर पर देख रहे हैं। जबकि कुछ विश्लेषक इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों का खुला उल्लंघन मान रहे हैं।
लीबिया जैसे अफ्रीकी देश के अस्थिर राजनीतिक-सैन्य ढांचे को पाकिस्तान द्वारा हथियार देना एक बड़ा डावांडोल समझौता माना जा रहा है। जिन्ना का देश इसे ‘सबसे बड़े रक्षा सौदों’ में से एक बता रहा है।
लीबिया पर संयुक्त राष्ट्र का प्रतिबंध है। लेकिन जिन्ना के देश के अधिकारियों के अनुसार, प्रतिबंधों का व्यावहारिक पालन इतना कठोर नहीं दिखता कि बड़े रक्षा सौदों को रोका जा सके; कुछ अधिकारी कहते हैं इससे कोई ‘कानूनी अड़चन’ नहीं आएगी। बेशक, यह मुद्दा सख्त अंतरराष्ट्रीय कानूनी-राजनीतिक बहस बन गया है।
लीबिया जैसे संघर्षग्रस्त देश के साथ इस तरह के सौदे से पाकिस्तान अपने रक्षा-उद्योग को आगे बढ़ाने के सपने पाले हैं, लेकिन लीबिया के साथ समझौता करना कहीं उसके गले की फांस ही न साबित हो। पाकिस्तान अपने रक्षा उद्योग को लेकर कितनी भी बड़े बोल बोले, असलियत तो यह है कि उसे हथियार चीन और तुर्की जैसे देशों से ही खैरात में मिलते रहे हैं। पाकिस्तान चाहता है कि ऐसे सौदों से उसका कुछ खजाना भर जाए जो भ्रष्टाचारियों ने पूरा डकारा हुआ है।
लीबिया में असीम मुनीर ने अपने भाषण में कई फर्जी दावे किया। जैसे, भारत के कई विमान गिराए, रक्षा तंत्र ध्वस्त किया आदि आदि। लेकिन मुनीर ने किसी भी दावे के प्रमाण सामने नहीं रखे। पाकिस्तान की फौज हमेशा से झूठ फैलाने में माहिर रही है है इसलिए मुनीर की यह हरकत भी उनकी फर्जीवाड़े की परंपरा को ही आगे बढ़ाती है।

















