सोशल मीडिया पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत को लेकर फर्जी दावे वायरल किए जा रहे हैं। एक सामाचार वेबसाइट के नाम का लोगो और डिजाइन कॉपी कर उसे शेयर किया जा रहा है, जिसमें कहा गया है कि संघ प्रमुख मोहन भागवत ने परशुराम को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की है। इसमें लिखा है कि परशुराम जी बढ़ई समाज से थे, वे हमेशा अपने साथ फरसा कुल्हाड़ी रखते थे और वे किसी ब्राह्मण के पुत्र नहीं थे।
मूल ग्राफिक्स से की गई छेड़छाड़
यह वायरल दावा फर्जी है। पीटीआई की फैक्ट चेक टीम ने भी इसकी पड़ताल की। प्रभात खबर की न्यूज वेबसाइट के मूल ग्राफिक्स से छेड़छाड़ कर उसे एडिट किया गया और फिर भ्रामक दावे के साथ उसे सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है। प्रभात खबर ने स्वयं पोस्ट शेयर कर इस फर्जी दावे का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर संघ प्रमुख से जुड़ा वायरल पोस्ट पूरी तरह फर्जी है।
प्रभात खबर ने फर्जी खबरों से सतर्क रहने की अपील की
प्रभात खबर ने ‘भ्रामक पोस्ट से सावधान’ शीर्षक के साथ लिखा, “सोशल मीडिया पर प्रभात खबर का लोगो और डिजाइन कॉपी कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के नाम से एक बयान वायरल किया जा रहा है। यह पोस्ट प्रभात खबर द्वारा जारी नहीं की गई है। यह हमारी ब्रांड गाइडलाइन और भाषा शैली का भी पालन नहीं करती। पाठकों और दर्शकों से अपील है कि ऐसी भ्रामक और फर्जी खबरों से सतर्क रहें।” बता दें कि प्रभात खबर के फेसबुक अकाउंट पर 13 दिसंबर को पोस्ट किए गए मूल ग्राफिक्स पर लिखा है, “यह भारत के लिए जीने का समय है, मरने का नहीं।”
भ्रामक दावे को कब से फैलाया जा रहा
दरअसल, फेसबुक पर एक यूजर ने गुरुवार (18 दिसंबर) को समाचार वेबसाइट प्रभात खबर का ग्राफिक्स शेयर किया। ग्राफिक्स में मोहन भागवत जी की तस्वीर है। सोशल मीडिया पर संघ को लेकर फेक न्यूज पैडलर इस तरह के भ्रामक व बेबुनियाद दावे फैलाते रहते हैं। संघ प्रमुख मोहन भागवत की ओर से ऐसा कोई बयान नहीं दिया गया है। यह वायरल दावा पूरी तरह झूठा है।

















