बांग्लादेश में राजनीतिक हिंसा का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। वहां एक और तथाकथित छात्र नेता पर गोलियां दागी गई हैं। नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) के खुलना डिविजनल चीफ और केंद्रीय आयोजक मोतालेब सिकदर पर अज्ञात बंदूकधारियों ने हमला कर दिया है। सिकदर के सिर में गोली मारी गई थी, जिसके बाद उसे गंभीर हालत में नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के अनुसार, उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। वह अभी वेंटिलेटर पर है। इस हमले का तरीका भी उस्मान हादी पर हुए हमले से मिलता-जुलता रहा, उसके भी सिर को निशाना बनाया गया था।
सिकदर पर हमले की यह घटना खुलना शहर के एक व्यस्त इलाके में दोपहर करीब 2 बजे हुई। सिकदर अपने पार्टी कार्यालय से बाहर आया ही था कि दो मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने उस पर अंधाधुंध गोलियां दागनी शुरू कर दीं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हमलावरों ने सिकदर के सिर को ही निशाना बनाया था। ढाका में मारे गए तथाकथित छात्र नेता उस्मान हादी के भी सिर पर गोलियां दागी गईं। हमले में सिकदर के सुरक्षाकर्मी भी घायल हुए। हमलावर मौके से फरार हो गए। स्थानीय पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर छानबीन शुरू कर दी, सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है।
मोतालेब सिकदर एनसीपी के प्रमुख नेताओं में माना जाता है। वह अपनी पार्टी की खुलना डिविजन का प्रभारी है और पार्टी की केंद्रीय समिति में आयोजक के रूप में सक्रिय है। बताते हैं, सिकदर ने पिछले कुछ समय से बांग्लादेश की राजनीति में भ्रष्टाचार और सत्ताधारी दलों के खिलाफ मुखर आवाज बुलंद की हुई है। उसकी पार्टी एनसीपी 2024 के राजनीतिक उथल-पुथल के दौर के बाद उभरी पार्टी है, यह विपक्षी गठबंधन का हिस्सा भी है। इसी सिकदर ने हाल ही में खुलना में एक रैली आयोजित की थी, जिसमें उसने ‘लोकतंत्र की बहाली’ का नारा बुलंद किया था। उसकी पार्टी नेताओं का आरोप है कि यह हमला पार्टी के विरोधियों द्वारा कराया गया है।
उस्मान हादी को मरे ज्यादा दिन नहीं हुए हैं। उसे गत शनिवार को दफानाया गया था। उसके जनाजे में बहुत बड़ी संख्या में कट्टरपंथी तत्व इकट्ठे हुए थे और उन्होंने जमकर इस्लामवादी तथा भारत विरोधी नारे लगाए थे। हादी भी एक प्रमुख विपक्षी नेता रहा था। नवंबर 2025 में ढाका के बानानी इलाके में हमला हुआ था। उसमें भी अज्ञात बंदूकधारियों ने सिर में गोली मारी थी। हादी किसी तरह बच तो गया लेकिन उसे लंबे समय तक सिंगापुर के अस्पताल में रहना पड़ा था। वहीं उसकी मौत हुई जहां से उसका मृत शरीर ढाका लाकर दफनाया गया था।
अब सिकदर पर भी गोलियां चलना पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के उस आरोप को सही ठहराता है कि मोहम्मद यूनुस की सरकार से कानून व्यवस्था नहीं संभल रही है। उनकी सरकार के कुर्सी के हटने के बाद से उस देश में कट्टरपंथी तत्व हावी हो चले हैं और उन्होंने हिन्दुओं का जीना मुहाल किया हुआ है। दीपू की हत्या और शव को जलाने की मानसिकता अब उस देश को पाकिस्तान की तरह गर्त में पहुंचाने जा रही है।
वैसे भी बांग्लादेश की राजनीति लंबे समय से हिंसा की ताप झेलती आ रही है। 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद देश में अंतरिम सरकार बनी, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता बढ़ गई। विपक्षी दलों पर हमले, कार्यकर्ताओं की हत्याएं और जबरन गायब करने की घटनाएं आम हो गई हैं। इस बीच हिन्दुओं को भी निशाना बनाया गया, उनके घर—दुकान जलाए गए। बड़ी संख्या में हिन्दू महिलाओं को अपमानित किया गया। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में अब तक राजनीतिक हिंसा की करीब 150 घटनाएं दर्ज हुई हैं। कहा जा रहा है कि इसमें भी एनसीपी जैसे नए दल विशेष रूप से निशाने पर हैं क्योंकि वे युवाओं को जोड़ रहे हैं। खुलना जैसे क्षेत्रों में राजनीतिक रस्साकशी यूं भी कुछ ज्यादा ही है।
एनसीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सिकदर पर हमले की निंदा करते हुए इसे ‘लोकतंत्र पर सीधा हमला’ बताया है। विपक्षी गठबंधन बीएनपी ने भी बयान जारी कर पूरे देश में हड़ताल का ऐलान किया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, अमेरिका के विदेश विभाग ने कहा है कि बांग्लादेश में राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। उधर यूरोपीय संघ ने इस घटना की स्वतंत्र जांच की मांग की।
पुलिस ने अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया है, लेकिन खुलना डिवीजन में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस ने कहा कि विशेष जांच टीम गठित की गई है। हालांकि, विपक्ष को विश्वास कम है क्योंकि पिछले कई मामलों में जांचें लटकी पड़ी हैं। सिकदर के परिवार ने अस्पताल से अपील की है कि उसे उचित इलाज दिया जाए। तमाम राजनीतिक दल सतर्क हो गए हैं, कई नेताओं ने अपनी सुरक्षा बढ़ा ली है।

















