एक तरफ अपनी दादागीरी दिखाने के चक्कर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दुनियाभर में देशों पर टैरिफ ठोंक रहे हैं। वहीं उनके टैरिफ को धता बताते हुए भारत लगातार दुनियाभर के देशों के साथ व्यापार समझौते कर रहा है। इसी क्रम में भारत और न्यूजीलैंड ने 22 दिसंबर 2025 को एक कॉम्प्रिहेंसिव फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की नेगोशिएशंस को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने फोन पर बातचीत के बाद इसकी घोषणा की। यह भारत का इस साल तीसरा FTA है, जबकि अमेरिका और यूरोपीय यूनियन के साथ बातचीत अभी चल रही है।
एग्रीमेंट की मुख्य बातें
इस समझौते से न्यूजीलैंड के भारत को होने वाले एक्सपोर्ट्स पर 95% सामान पर टैरिफ पूरी तरह खत्म हो जाएंगे या काफी कम हो जाएंगे। आधे से ज्यादा प्रोडक्ट्स पर तो पहले दिन से ही ड्यूटी फ्री हो जाएगा। न्यूजीलैंड की सरकार के मुताबिक, इससे उनके एक्सपोर्ट्स में हर साल 1.1 से 1.3 बिलियन न्यूजीलैंड डॉलर की बढ़ोतरी हो सकती है। भारत की तेजी से बढ़ती मिडल क्लास और इकोनॉमी का फायदा न्यूजीलैंड के बिजनेस को मिलेगा, जो 2030 तक 12 ट्रिलियन न्यूजीलैंड डॉलर की हो जाएगी।
दोनों देशों के बीच अभी दो तरफा ट्रेड करीब 3.14 बिलियन न्यूजीलैंड डॉलर का है। भारत से मुख्य रूप से फार्मास्यूटिकल्स जाते हैं, जबकि न्यूजीलैंड से कृषि प्रोडक्ट्स जैसे ऊन, लॉग्स, सेब और फल आते हैं। दोनों नेता अगले पांच साल में बाइलेटरल ट्रेड को दोगुना करने और न्यूजीलैंड से भारत में 20 बिलियन डॉलर निवेश की उम्मीद कर रहे हैं।
नेगोशिएशंस का बैकग्राउंड
बातचीत मार्च 2025 में शुरू हुई थी, जब लक्सन भारत आए थे और प्रधानमंत्री मोदी से मिले। उस समय चार राउंड्स की प्लानिंग हुई, सिर्फ नौ महीनों में ही डील फाइनल हो गई। पहले 2015 में बातचीत रुक गई थी, लेकिन इस बार तेजी से काम हुआ। भारत ने पहले इसी साल यूके और ओमान के साथ FTA साइन किए हैं।
भारत के लिए फायदे
भारत की तरफ से फोकस स्किल्ड प्रोफेशनल्स की मोबिलिटी पर रहा। न्यूजीलैंड हर साल 1,667 टेम्पररी वर्क वीजा देगा, खासकर डॉक्टर्स, नर्सेस, टीचर्स, आईटी प्रोफेशनल्स और इंजीनियर्स के लिए। साथ ही वर्किंग हॉलिडे वीजा में 1,000 अतिरिक्त जगहें मिलेंगी। भारत के ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स, फार्मा और आईटी सर्विसेस को भी बेहतर एक्सेस मिलेगा।
न्यूजीलैंड का बयान
लक्सन ने कहा कि यह डील न्यूजीलैंड के लिए हजारों जॉब्स, हाई वेज और ज्यादा ऑपर्चुनिटीज लाएगी। उनके ट्रेड मिनिस्टर ने इसे “हिस्टोरिक” बताया। हालांकि, डेयरी प्रोडक्ट्स जैसे मिल्क, चीज और बटर पर कोई बड़ा कंसेशन नहीं मिला, जो न्यूजीलैंड के बड़े एक्सपोर्ट हैं। यह समझौता दोनों देशों के बिजनेस, फार्मर्स, छोटे उद्योगों, स्टूडेंट्स और युवाओं के लिए नए दरवाजे खोलेगा।











