चुनाव आयोग ने तमिलनाडु और गुजरात में वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा बनाने के लिए एक खास रिवीजन प्रोसेस चलाया है। शुक्रवार को इन दोनों राज्यों के ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल्स पब्लिश किए गए। ये स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का फेज-2 है, जिसमें पुरानी और गलत एंट्रीज को हटाया जा रहा है। आसान शब्दों में कहें तो वोटर लिस्ट से डुप्लिकेट, मरे हुए लोगों और शिफ्ट हो चुके वोटर्स के नाम निकाले जा रहे हैं।
तमिलनाडु में क्या हुआ?
तमिलनाडु में ड्राफ्ट रोल से करीब 97.3 लाख नाम डिलीट किए गए हैं। 29 अक्टूबर 2025 को लिस्ट में 6.4 करोड़ वोटर्स थे, जो अब घटकर 5.4 करोड़ हो गई है। डिलीट होने की मुख्य वजहें ये हैं:
- 26.9 लाख लोग मृत पाए गए।
- 66.4 लाख लोग शिफ्ट हो चुके या एब्सेंट थे।
- लगभग 4 लाख नाम एक से ज्यादा जगह पर रजिस्टर्ड थे।
इसके अलावा, करीब 1.2 करोड़ वोटर्स को नोटिस भेजे गए हैं क्योंकि उनके फॉर्म में कुछ लॉजिकल गड़बड़ियां मिलीं। जैसे, एक ही पैरेंट से छह से ज्यादा बच्चे लिंक्ड होना, 45 साल से ऊपर उम्र लेकिन पहले कभी वोटर लिस्ट में नाम न होना, पिता का नाम मिसमैच, 15 साल से कम उम्र के वोटर, पैरेंट से 50 साल से ज्यादा उम्र का फर्क या दादा-दादी से 40 साल से कम फर्क। इन लोगों से एक्सप्लेनेशन और प्रूफ मांगा जा रहा है।
गुजरात में भी सफाई जारी
गुजरात में भी बड़े स्तर पर क्लीनिंग हुई है। यहां 73.7 लाख नाम हटाए गए। 29 अक्टूबर को लिस्ट में करीब 5.1 करोड़ वोटर्स थे, जो अब 4.3 करोड़ से ज्यादा रह गए हैं। डिलीट की वजहें:
- लगभग 18.1 लाख मृत वोटर्स।
- 51.8 लाख शिफ्ट या एब्सेंट।
- 3.8 लाख डुप्लिकेट एंट्रीज।
यहां भी 1.2 करोड़ से ज्यादा वोटर्स को नोटिस गए हैं, वजहें तमिलनाडु जैसी ही लॉजिकल डिस्क्रेपेंसीज हैं। इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स इनसे जवाब और डॉक्यूमेंट्स मांग रहे हैं।
18 जनवरी तक कर सकते हैं क्लेम
कोई भी नाम बिना नोटिस और वजह बताए नहीं हटाया जा सकता। अगर किसी को शिकायत है तो 18 जनवरी तक क्लेम या ऑब्जेक्शन फाइल कर सकते हैं। अपील का ऑप्शन भी है – पहले डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के पास, फिर स्टेट के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर के पास। ये प्रोसेस वोटर लिस्ट को एक्यूरेट बनाने के लिए है, ताकि चुनाव साफ-सुथरे हों।











