बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जुड़े कथित हिजाब विवाद का अंतरराष्ट्रीयकरण करके भारत की छवि को बदनाम करने के लिए इकोसिस्टम एक्टिव हो गया है। इसकी शुरुआत भारत के विरोधियों से हुई और अब इसमें पाकिस्तान की एंट्री हो चुकी है। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने भारत की छवि को खराब करने की साजिश के तहत इसे अल्पसंख्यकों के अधिकारों से जोड़ दिया। ये बेहद हास्यास्पद है कि अल्पसंख्यक अधिकारों की बात वो पाकिस्तान कर रहा है, जहां हर दिन एक हिन्दू महिला इस्लामिक कट्टरपंथियों का शिकार होती है। हर दिन किसी न किसी रूप में हिन्दू समुदाय को निशाना बनाया जाता है।
इशाक डार ने क्या कहा?
हिजाब विवाद को इस्लामोफोबिया करार देते हुए इशाक डार ने इस इकोसिस्टम को लीड किया और इसे मुस्लिमों के आत्मसम्मान इस्लामी परंपरा से जोड़ दिया। डार ने एक्स पोस्ट के जरिए कहा कि “शर्मनाक और बेहद परेशान करने वाली घटना” बताया। डार ने कहा कि बिहार में एक मुस्लिम महिला के साथ ऐसा सम्मान न दिखाना निंदनीय है। इससे अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा की जरूरत साफ दिखती है, और इस्लामोफोबिया की बढ़ती समस्या पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने जोड़ा कि महिलाओं का सम्मान और धार्मिक विश्वासों की इज्जत हर समाज में बुनियादी और गैर-मुशायरा सिद्धांत होने चाहिए।
पाकिस्तान की ह्यूमन राइट्स कमीशन ने भी इसे “बेहद शर्मनाक, निंदनीय और अमानवीय” करार दिया। उन्होंने भारतीय सरकार से तुरंत पारदर्शी जांच, पीड़ित महिला को सुरक्षा और न्याय, और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। पाकिस्तान के कुछ कट्टरपंथी नेता दो राष्ट्र सिद्धांत की बात कर रहे हैं।
पाकिस्तान में हिन्दुओं से जुड़े आंकड़े भी देखें डार
भारत में अल्पसंख्यकों की बात और इस्लामोफोबिया की बात करके साजिश कर रहे पाकिस्तान को सबसे पहले अपने गिरेबान में झांकने की जरूरत है। आकंड़ों के अनुसार, सालाना लगभग 1,000 हिन्दू लड़कियों के जबरन धर्मांतरण और निकाह के मामले सामने आते हैं। इसके अलावा हिन्दुओं पर टार्गेटेड अटैक, मंदिरों पर हमले किए गए। बताया जाता है कि अकेले 2024 में इस तरह के 112 मामले प्रकाश में आए थे। ये तो वो मामले हैं, जो सामने आते हैं। बहुत से ऐसी घटनाएं भी होती हैं, जो दब जाती हैं।
जब भारत का बंटवारा हुआ था, उस दौरान विभिन्न स्रोतों के अनुसार, पाकिस्तान (तत्कालीन वेस्ट पाकिस्तान) में हिन्दुओं की आबादी कुल जनसंख्या का लगभग 15-23% थी। कुछ रिपोर्ट्स में इसे 20.5% बताया गया है। लेकिन अब के विभिन्न स्त्रोतों का दावा है कि वर्तमान में पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की जनसंख्या गिरकर मात्र 2017 की जनगणना में यह 2.14% था (लगभग 44 लाख) और 2023 में 2.17% (लगभग 52 लाख) आंकी गई थी।
भारत में लगातार बढ़ी मुस्लिमों की जनसंख्या
अब अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि 1951 की जनगणना के दौरान देश में मुस्लिमों की आबादी कुल जनसंख्या का करीब 9.8 फीसदी थी। लेकिन, 2011 में यह बढ़कर 14.2 फीसदी हो गई थी। यानि कि इसमें 4.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। सरकार ने वर्ष 2023 में लोकसभा में इसको लेकर कहा था कि मुस्लिम जनसंख्या अनुमानित 19.75 करोड़ के आसपास है।

















