भारत अब विदेशी हथियारों पर कम निर्भर होकर अपने बनाए हुए हथियारों को पूरी ताकत से आगे बढ़ा रहा है। हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर की कामयाबी के बाद भारत ने फ्रांस के मशहूर हैमर प्रिसिजन गाइडेड हथियार को खुद बनाने का फैसला किया है। साथ ही भारतीय सेना ने देसी कामिकाज़े ड्रोन्स के लिए 5000 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर दिया है। ये ड्रोन्स भारी जैमिंग और स्पूफिंग में भी काम कर सकते हैं। 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय लड़ाकू विमानों ने हैमर सहित कई हथियारों से पाकिस्तान और PoK में आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था। अब ये सफलता भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो रही है।
ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और आत्मनिर्भरता पर जोर
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर ने साबित कर दिया कि भारत के हथियार अब दुनिया के सामने खड़े हो सकते हैं। इस ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना ने राफेल और अन्य विमानों से हैमर (Highly Agile Modular Munition Extended Range) जैसे प्रिसिजन हथियारों का इस्तेमाल किया, जो आतंकी कैंपों को दूर से ही सटीक निशाना बनाते हैं। अब भारत सरकार ने फैसला किया है कि इस फ्रेंच हथियार को देश में ही बनाया जाएगा। ये हैमर राफेल के अलावा देसी तेजस लड़ाकू विमान पर भी लगाया जाएगा। सरकारी कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) ने फ्रांस की सैफ्रान कंपनी के साथ हाल ही में समझौता किया है। ये जॉइंट वेंचर 50-50 का होगा, जिसमें हैमर को भारत में बनाना, कस्टमाइज करना, सप्लाई और मेंटेनेंस सब शामिल है। इससे भारतीय वायुसेना को दोनों विमानों पर एक समान प्रिसिजन स्ट्राइक की ताकत मिलेगी।
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देसी कामिकाज़े ड्रोन्स का बड़ा ऑर्डर
सेना की तरफ से एक और बड़ा कदम उठाया गया है। भारतीय आर्मी ने स्वदेशी कामिकाज़े ड्रोन्स (लोइटरिंग मुनिशन्स) के लिए करीब 5000 करोड़ रुपये का ऑर्डर प्लेस किया है। ये ड्रोन्स दुश्मन के इलाके में घूमकर टारगेट ढूंढते हैं और खुद को उड़ा कर निशाना साधते हैं। खास बात ये है कि ये भारी इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग और स्पूफिंग वाली स्थिति में भी काम करते हैं, मतलब दुश्मन के सिग्नल ब्लॉक करने के बावजूद ये प्रभावी रहते हैं। ऑपरेशन सिंदूर में ऐसे ड्रोन्स का इस्तेमाल देखकर सेना को भरोसा हुआ कि देसी तकनीक अब रियल वार में काम आ रही है। इससे पहले भी सिंदूर में ब्रह्मोस, आकाश मिसाइल और D4 एंटी-ड्रोन सिस्टम जैसे देसी हथियारों ने कमाल दिखाया था।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में तेज रफ्तार
ऑपरेशन सिंदूर ने ये साफ कर दिया कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ सिर्फ नारा नहीं, हकीकत बन रहा है। पहले जहां भारत ज्यादातर हथियार आयात करता था, अब देसी उत्पादन पर फोकस है। हैमर को लोकल बनाने से तकनीक ट्रांसफर होगा और भारत खुद प्रिसिजन स्ट्राइक की मास्टरी हासिल कर लेगा। इसी तरह कामिकाजे ड्रोन्स का ऑर्डर प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर की कंपनियों को बूस्ट देगा। कुल मिलाकर, सिंदूर की सफलता के बाद भारत हथियारों के मामले में ‘हैमर एंड टॉंग्स’ यानी पूरी ताकत से देसी रास्ते पर चल पड़ा है।

















