चीनी सोशल मीडिया कंपनी टिकटॉक ने आखिरकार अपने अमेरिकी ऑपरेशंस को बेचने का एक बड़ा समझौता साइन कर लिया है। कंपनी के सीईओ शौ जी च्यू ने कर्मचारियों को भेजे एक आंतरिक मेमो में बताया कि बाइटडांस (टिकटॉक की पैरेंट कंपनी) और टिकटॉक ने अमेरिकी निवेशकों के साथ बाइंडिंग एग्रीमेंट्स पर दस्तखत कर दिए हैं। इस डील से टिकटॉक अमेरिका में चलता रहेगा, जहां उसके करीब 17 करोड़ यूजर्स हैं। डील 22 जनवरी को क्लोज होने की उम्मीद है।
डील की मुख्य डिटेल्स
नई अमेरिकी इकाई का नाम “टिकटॉक यूएसडीएस जॉइंट वेंचर एलएलसी” होगा। इसमें मालिकाना हक इस प्रकार बांटा जाएगा:
- 50% हिस्सा एक कंसोर्टियम के पास होगा, जिसमें ओरेकल (15%), सिल्वर लेक (15%) और अबू धाबी की एमजीएक्स (15%) शामिल हैं।
- 30.1% हिस्सा बाइटडांस के मौजूदा निवेशकों के एफिलिएट्स के पास रहेगा।
- 19.9% हिस्सा बाइटडांस खुद रखेगा।
ओरेकल की भूमिका बढ़ेगी – वो टिकटॉक के रेकमेंडेशन एल्गोरिदम की एक कॉपी लाइसेंस करेगा और अमेरिकी यूजर्स का डेटा मैनेज करेगा। नई इकाई अमेरिकी यूजर्स के डेटा प्रोटेक्शन, एल्गोरिदम सिक्योरिटी, कंटेंट मॉडरेशन और सॉफ्टवेयर पर पूरा कंट्रोल रखेगी। ग्लोबल टिकटॉक कुछ कमर्शियल एक्टिविटीज जैसे ई-कॉमर्स, एडवरटाइजिंग और मार्केटिंग हैंडल करेगा।
क्या है पूरा मामला?
ये सब 2020 से चल रहा है, जब ट्रंप ने पहली बार कोरोना महामारी से निपटने में लापरवाही बरतने को लेकर टिकटॉक को बैन करने की धमकी दी थी। बाद में कांग्रेस ने नेशनल सिक्योरिटी चिंताओं (खासकर यूजर्स का डेटा चीन तक पहुंचने का डर) के चलते एक कानून पास किया, जिसे अप्रैल 2024 में जो बाइडेन ने साइन किया। कानून के मुताबिक, अगर बाइटडांस अमेरिकी हिस्सा नहीं बेचता तो 20 जनवरी 2025 से ऐप बैन हो जाता।
ट्रंप के दूसरे टर्म में उन्होंने कई बार डेडलाइन बढ़ाई – पहले जनवरी में, फिर अप्रैल, जून, सितंबर और दिसंबर तक। सितंबर में ट्रंप ने चीन के प्रेसिडेंट शी जिनपिंग से बात करके डील का फ्रेमवर्क तैयार किया और एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर साइन किया। अक्टूबर में ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि फाइनल डील हो गई है। अब दिसंबर में आखिरकार साइन हो गया।
क्या बदलेगा यूजर्स के लिए
अमेरिकी यूजर्स के लिए ऐप वैसा ही रहेगा। लोग वीडियो देखने के साथ ही अपलोड भी कर सकेंगे। बस बैकएंड में कंट्रोल अमेरिकी निवेशकों के पास ज्यादा होगा, ताकि सुरक्षा चिंताओं से निपटा जा सके। ओरेकल पहले से ही अमेरिकी डेटा स्टोर करता है, अब उसकी जिम्मेदारी और बढ़ेगी। एल्गोरिदम की कॉपी अमेरिकी डेटा पर री-ट्रेन होगी।











