गत दिनों असम विधानसभा ने ‘असम बहुविवाह निषेध विधेयक- 2025’ को भारी बहुमत से पारित कर दिया। राज्यपाल और राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद यह विधेयक कानून बन जाएगा। इसका उद्देश्य है राज्य में बहुविवाह की प्रथा को समाप्त करना, महिलाओं को बहुविवाह से होने वाले शोषण और संकट से बचाना, सामाजिक संतुलन और कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाना और विवाह प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और कानून-नियंत्रित बनाना। असम में इस कानून की लंबे समय से जरूरत थी। यह कानून असम में शरीयत अधिनियम-1937 (मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरियत) एप्लीकेशन एक्ट- 1937) के कई अनुच्छेदों को खत्म करता है। यह भारत में मुसलमानों के निजी मामलों जैसे विवाह, तलाक, विरासत, भरण-पोषण और दान में इस्लामी कानून (शरीयत) को लागू करने वाला एक महत्वपूर्ण कानून है, जो ब्रिटिश शासन के दौरान बना और इसने पहले के प्रथागत कानूनों पर शरीयत को प्राथमिकता दी।
जनजातियों को छूट
पारित विधेयक के अनुसार बहुविवाह एक आपराधिक कृत्य है। यह कानून भारतीय संविधान की छठी अनुसूची में शामिल असम के कुछ क्षेत्रों के उन निवासियों पर लागू नहीं होगा, जो जनजाति समाज से आते हैं। बता दें किे यह अनुसूची असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के जनजातीय क्षेत्रों पर लागू होती है, जो इन क्षेत्रों को अपनी संस्कृति, भूमि और संसाधनों की सुरक्षा के लिए स्वायत्त जिले और क्षेत्रीय परिषदें बनाने की शक्ति देती है।
दंड का प्रावधान
पारित विधेयक के अनुसार, पहली पत्नी से कानूनी रूप से अलग हुए बिना दूसरा विवाह करने वाले व्यक्ति को सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा दी जाएगी, साथ में जुर्माना भी होगा। पहला विवाह छुपाने पर 10 वर्ष तक की सजा हो सकती है। अपराधों को दोहराए जाने पर सजा दोगुनी होगी। गांव प्रमुख, काजी, पुजारी, माता-पिता या अभिभावक, जो भी जानकारी छुपाएंगे, उन्हें भी दोषी माना जाएगा। ऐसे लोगों को दो वर्ष की सजा होगी और साथ में 1,00,000 रु. का जुर्माना देना होगा। यदि किसी काजी या पुजारी ने सब कुछ जानकर भी निकाह या विवाह कराया तो उस पर 1,50,000 रु. का जुर्माना लगाया जाएगा।
इस कानून के दायरे में असम का वह नागरिक भी आएगा, जिसने राज्य के बाहर निकाह या विवाह किया हो। असम में संपत्ति रखने वाले या सरकारी लाभ पाने वाले गैर-निवासी भी इस कानून के दायरे में होंगे। दोषी व्यक्ति सरकारी नौकरी, सरकारी लाभ तथा किसी भी चुनाव में भाग लेने के लिए अयोग्य होगा। प्रभावित महिलाओं को मुआवजा देने के लिए एक प्राधिकरण नियुक्त किया जाएगा। कानून लागू होने से पहले के बहुविवाह, यदि मान्य व्यक्तिगत/रिवायती कानून के अंतर्गत हैं, तो उन पर कोई दंड लागू नहीं होगा। पुलिस को किसी प्रतिबंधित विवाह को रोकने का अधिकार होगा।
बढ़ता लव जिहाद
असम में लव जिहाद की बढ़ती घटनाओं ने हिंदू समुदाय को चिंतित कर दिया है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से लव जिहाद के सैकड़ों मामले सामने आए हैं। पिछले वर्ष जोरहाट जिले में लव जिहाद मामले में एक मुसलमान ने हिंदू लड़की के पूरे परिवार की हत्या कर दी थी। इसलिए हिंदू संगठन राज्य में लव जिहाद के खतरे को रोकने के लिए सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इन संगठनों को उम्मीद है कि नया कानून लागू होने के बाद ऐसी घटनाओं पर रोक लगेगी।
बाल विवाह दर में गिरावट
असम सरकार 2023 से राज्य में बाल विवाह के विरुद्ध कई अभियान चला रही है। बाल विवाह में शामिल होने के आरोप में हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया। राज्य भर में पुलिस ने बाल विवाह पर 12 से अधिक मामले दर्ज किए हैं। इन प्रयासों का प्रभाव भी दिख रहा है। ‘सेंटर फॉर लीगल एक्शन एंड बिहेवियर चेंज फॉर चिल्ड्रन’ के अनुसार, अप्रैल, 2022 से मार्च, 2025 के दौरान असम में बाल विवाह के मामलों में लड़कियों में 89 प्रतिशत और लड़कों में 91 प्रतिशत की गिरावट आई है।

















