रूस यूक्रेन युद्ध: यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने रूस से चल रहे संघर्ष को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। तीन साल से ज्यादा समय से चले आ रहे इस युद्ध के बीच, जेलेंस्की ने कहा है कि वह यूक्रेन की नाटो में शामिल होने की पुरानी मांग को छोड़ने के लिए तैयार हैं। ये बात उन्होंने 14 दिसंबर 2025 को बर्लिन में अमेरिकी दूतों से बातचीत के दौरान कही। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जेरेड कुशनर से पांच घंटे की मीटिंग हुई, जिसमें जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज भी मौजूद थे।
जेलेंस्की ने छोड़ी नाटो की जिद
रूस शुरू से ही यूक्रेन के नाटो में जाने का विरोध करता रहा है। उसका कहना है कि इससे रूस की सुरक्षा को खतरा होगा। यही वजह थी कि 2022 में रूस ने यूक्रेन पर हमला किया। अब जेलेंस्की ने माना कि अमेरिका और कुछ यूरोपीय देश यूक्रेन को नाटो में लेने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने पत्रकारों से कहा, “अमेरिका और कुछ यूरोपीय देशों ने यूक्रेन के नाटो में शामिल होने की कोशिश को ना कह दिया है।” ऐसे में जेलेंस्की ने इसे अपना समझौता बताया और कहा कि नाटो की जगह मजबूत सुरक्षा गारंटी चाहिए।
जेलेंस्की की दो मुख्य शर्तें
हालांकि नाटो मांग छोड़ने के बदले जेलेंस्की ने दो साफ शर्तें रखी हैं। पहली, रूस द्वारा कब्जा किए गए यूक्रेन के इलाकों पर अपना दावा नहीं छोड़ेंगे। ट्रंप की शांति योजना में इन इलाकों को रूस को सौंपने की बात थी, लेकिन जेलेंस्की इससे सहमत नहीं हैं। वे कहते हैं कि ये इलाके यूक्रेन के हैं और इन्हें वापस लेने का हक बना रहेगा।
दूसरी शर्त ये है कि अमेरिका और पश्चिमी देश यूक्रेन को ठोस सुरक्षा गारंटी दें। जेलेंस्की चाहते हैं कि ये गारंटी नाटो के आर्टिकल 5 जैसी हो, यानी अगर रूस दोबारा हमला करे तो अमेरिका और यूरोपीय देश यूक्रेन की मदद करें। उन्होंने कहा, “हमें ऐसा भरोसा चाहिए जो रूस को फिर से हमला करने से रोके। ये हमारी तरफ से भी एक बड़ा समझौता है।” इसके अलावा कनाडा, जापान जैसे दूसरे देशों से भी गारंटी की बात की जा रही है।
बातचीत का मौजूदा हाल
बर्लिन की मीटिंग में यूक्रेन, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के अधिकारी शामिल थे। एक 20 पॉइंट की शांति योजना पर चर्चा हो रही है, जिसमें आखिर में सीजफायर की बात है। जेलेंस्की ने कहा कि मौजूदा फ्रंटलाइन पर सीजफायर सबसे सही विकल्प होगा। अभी तक यूक्रेन और रूस के बीच सीधी बात नहीं हुई है। ट्रंप प्रशासन यूक्रेन पर दबाव डाल रहा है कि समझौता करें, क्योंकि यूक्रेन युद्ध में मुश्किल स्थिति में है।

















